तेहरान3 घंटे पहले
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तस्वीर में ईरान के धर्मगुरू के साथ डिप्टी आर्मी चीफ अली फदावी (बाएं) नजर आ रहे हैं। (फाइल)
ईरान के डिप्टी मिलिट्री चीफ अली फदावी ने इजराइल पर मिसाइल हमले की धमकी दी है। फदावी ने स्टूडेंट्स से मुलाकात के दौरान कहा- अगर जरूरत हुई तो हम इजराइल पर मिसाइल हमला करने में संकोच नहीं करेंगे। इसमें हमें कोई दिक्कत नहीं है।
फदावी ने दावा किया कि इजराइल अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन सच्चाई ये है कि इसका सक्सेस रेट सिर्फ 30% है।

ईरान के डिप्टी मिलिट्री चीफ अली फदावी ने इजराइल पर मिसाइल हमले की धमकी दी है।
सीधी जंग भी मुमकिन
- ‘यरूशलम पोस्ट’ ने ईरान्स इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के डिप्टी चीफ अली फदावी और स्टूडेंट्स के बीच हुई बातचीत पर रिपोर्ट जारी की है। फदावी सोमवार को तेहरान यूनिवर्सिटी पहुंचे थे। यहां उन्होंने इजराइल और हमास की जंग के अलावा इसमें ईरान पर लग रहे आरोपों पर चर्चा की। फदावी ने कहा- अगर जरूरी हुआ और ऑर्डर मिल गए तो हमें हाइफा शहर पर हमले में कोई झिझक नहीं होगी।
- दरअसल, एक स्टूडेंट ने फदावी से पूछा था कि क्या ईरान सरकार और फौज इजराइल के खिलाफ कोई डायरेक्ट एक्शन लेने के लिए तैयार है। फदावी ने इसका ही जवाब दिया। उन्होंने कहा- इस बारे में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। अगर जरूरी हुआ तो हम हाइफा पर सीधा हमला करेंगे।
- एक और सवाल के जवाब में अली ने इजराइल के आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम के बारे में बात की। कहा- आयरन डोम सिर्फ 30% कारगर है। सच ये है कि अमेरिका ने इजराइल को बनाया ही अपनी सिक्योरिटी के लिए है। अमेरिका खुद को महफूज महसूस नहीं करता। वो अपने हित के लिए इजराइल को भी दांव पर लगा सकता है।

1 अक्टूबर को इस्लामिक यूनिटी कॉन्फ्रेंस की एक सेरेमनी में हमास के प्रतिनिधि (सफेद कोट में) ईरान के राष्ट्रपति रईसी के साथ दिख रहे हैं।
इजराइल अभी और भुगतेगा
फदावी ने इजराइल को जंग के गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी। कहा- गाजा के लोग जिस तरह से इजराइल को जवाब दे रहे हैं, उसको देखिए। वो जुल्म का जवाब अपने तरीके से दे रहे हैं।
अली ने आगे कहा- जब तक इजराइल की तरफ से यह जुल्म और बर्बरता बंद नहीं होती, तब तक उसे यही सब भुगतना पड़ेगा। उसका नाम दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा। कुछ और इंतजार कीजिए। अभी इजराइल को और भी कुछ भुगतना है।
अमेरिकी अखबार का दावा
- अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कुछ दिन पहले हमास और हिजबुल्लाह के सीनियर अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने इजराइल पर हमले की प्लानिंग में हमास की मदद की थी। इसके बाद उन्होंने 2 अक्टूबर को बेरूत में एक बैठक में हमले के लिए हरी झंडी दे दी थी।
- WSJ के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अधिकारी अगस्त से हमास के साथ मिलकर इजराइल पर 1973 के बाद जमीन, हवा और समुद्र के रास्ते अब तक के सबसे बड़े हमले की प्लानिंग कर रहे थे।
- 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले के बाद ईरान में लोगों ने जश्न भी मनाया था। लोग आतिशबाजी करते नजर आए थे। ईरान ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। उसने कहा है कि हमास के हमले में उसकी कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के एडवाइजर ने कहा कि हम फिलिस्तीन के इजराइल पर किए अटैक का समर्थन करते हैं।
- ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कहा- फिलिस्तीन अपने हितों की रक्षा जरूर करेगा। इजराइल इस क्षेत्र में मौजूद दूसरे देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है और इसके लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा।

तस्वीर सितंबर की है, जब UN जनरल असेंबली के सेशन के लिए नेतन्याहू न्यूयॉर्क गए थे। यहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।
अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है इजराइल
- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि हमास के आतंकी इजराइली सैनिकों और नागरिकों को सड़कों और उनके घरों में मार रहे हैं, ये गलत है। इजराइल की मदद के लिए हम हर तरह से तैयार हैं। उसे अपनी और अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने अपनी टीम से इजराइल, फिलिस्तीन, UAE, तुर्किये के कॉन्टैक्ट में रहने के लिए कहा है।
- वहीं, अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि वो इस बात का ध्यान रखेंगे कि इजराइल को अपनी सुरक्षा में किसी तरह की कमी न रहे। ऑस्टिन ने बताया कि मदद के लिए अमेरिकी जहाज और लड़ाकू विमान इजराइल की तरफ बढ़ रहे हैं।
- अमेरिका एअरक्राफ्ट कैरिअर USS जेराल्ड आर फोर्ड के साथ, क्रूजर USS नॉर्मंडी, डिस्ट्रॉयर USS थॉमस हडनर, USS रैमेज, USS कार्नी और USS रूजवेल्ट भी भेज चुका है। USS जेराल्ड आर फोर्ड F-35, F-15, F-16, और F-10 लड़ाकू विमानों से लैस है।
- दरअसल, अमेरिका मिडिल ईस्ट में इजराइल को एक बड़े सहयोगी के तौर पर देखता है। इसकी एक बड़ी वजह ईरान से निपटना भी है। अमेरिका की फॉरेन असिस्टेंस एजेंसी के मुताबिक अमेरिकी मदद से इजराइल उस इलाके में आसपास के खतरों से निपटने के लिए सैन्य बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहता है।



























