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लद्दाख9 मिनट पहले
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इंडियन आर्मी के फायर एंड फ्यूरी कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो शेयर किया।
सियाचिन ग्लेशियर की ऑपरेशनल पोस्ट पर पहली बार महिला मेडिकल ऑफिसर की तैनाती की गई है। 15 हजार 200 फीट की ऊंचाई पर कैप्टन फातिमा वसीम को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इंडियन आर्मी के फायर एंड फ्यूरी कोर ने पोस्ट कर सोमवार (11 दिसंबर) को इस बात की जानकारी दी। इंडियन आर्मी के फायर एंड फ्यूरी कोर ने वीडियो जारी किया। सियाचिन बैटल स्कूल में फातिमा ने ट्रेनिंग की थी।
इससे पहले, स्नो लेपर्ड ब्रिगेड की कैप्टन गीतिका कौल पहली महिला मेडिकल ऑफिसर बनीं थीं, जिन्हें सियाचिन की बैटलफील्ड पर तैनात किया गया है, जिसकी ऊंचाई 15,600 फीट है।
कैप्टेन गीतिका ने अपनी तैनाती को लेकर इंडियन आर्मी का आभार जताया था। कैप्टेन गीतिका कौल ने कहा था- वे देश के लिए अपना हर कर्तव्य निभाएंगी। अपनी जान दांव पर लगा कर देश की हिफाजत करेंगी।
फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स को आधिकारिक तौर पर 14वां कॉर्प्स कहा जाता है। इसका हेडक्वार्टर लेह में है। इनकी तैनाती चीन-पाकिस्तान की सीमाओं पर होती है। साथ ही ये सियाचिन ग्लेशियर की रक्षा करते हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है सियाचिन
- सियाचिन ग्लेशियर लद्दाख में स्थित करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बेहद दुर्गम इलाका है। ये कराकोरम पर्वत रेंज में स्थित है।
- सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा जंग का मैदान है, जहां पिछले 38 सालों से भारत-पाकिस्तान की सेनाएं आमने-सामने हैं।
- 1984 से ही करीब 76 किलोमीटर लंबे पूरे सियाचिन ग्लेशियर और इसके सभी प्रमुख दर्रे भारत के नियंत्रण में हैं।
- सियाचिन की भौगोलिक स्थिति उसे भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण बनाती है। इसके एक तरफ पाकिस्तानी नियंत्रण वाला इलाका है तो वहीं दूसरी तरफ चीन।
- यहां से भारत पाकिस्तान के साथ ही चीन की भी गतिविधियों पर नजर रख सकता है। साथ ही भारत, पाक और चीन के सैन्य गठबंधन को रोकता है, जो लद्दाख की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
- सियाचिन उस पॉइंट NJ9842 के ठीक उत्तर में हैं, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा यानी LoC खत्म होती है।
- सियाचिन सालभर बर्फ से ढंका रहता है। यहां औसत तापमान जीरो से भी कम -10 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है। सर्दियों में यहां का तापमान -50 से -70 डिग्री सेंटीग्रेड हो जाता है।
1984 से लगातार सियाचिन ग्लेशियर में डटे हैं सैनिक
सियाचिन ग्लेशियर भारत-पाक बॉर्डर के पास करीब 78KM में फैला है। इसके एक तरफ पाकिस्तान, दूसरी तरफ अक्साई चीन है। 1972 के शिमला समझौते में सियाचिन को बेजान और बंजर बताया गया था। हालांकि तब भारत-चीन के बीच इसके सीमा का निर्धारण नहीं हुआ था।
1984 में भारतीय सेना को जानकारी मिली कि पाकिस्तानी सेना इस इलाके को कब्जे में लेने की कोशिश कर रही है, जिसके बाद 13 अप्रैल 1984 को भारतीय सेना ने अपनी फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की स्पेशल टुकड़ी को इस इलाके में तैनात कर दिया।
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