15 मिनट पहले
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तस्वीर चीनी जासूसी जहाज जियांग यांग होंग 03 की है।
हिंद महासागर में चीन का दखल बढ़ता जा रहा है। इससे भारत की चिंता बढ़ रही है। इस बीच चीन का एक जासूसी जहाज मालदीव की तरफ बढ़ रहा है। भारतीय नौसेना इस पर नजर बनाए हुए है।
भारतीय नौसेना के एक अधिकारी ने कहा- चीन का खुफिया जहाज जियांग यांग होंग 03 इंडोनेशिया के सुंडा स्ट्रैट से होते हुए हिंद महासागर में घुसा और अब मालदीव की तरफ बढ़ रहा है। यह मालदीव इसलिए जा रहा है क्योंकि श्रीलंका ने इसे अपने किसी भी बंदरगाह पर रुकने की इजाजत नहीं दी। फरवरी के पहले हफ्ते में यह मालदीव की राजधानी माले के बंदरगाह पहुंच सकता है।
चीनी जासूसी जहाज जियांग यांग होंग 03 इसके पहले 2019 और 2020 में मालदीव के माली में लंगर डाल चुका है। इसे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में भी देखा जा चुका है जिसके बाद भारत को जासूसी का खतरा बढ़ता नजर आया।
भारत की चिंता की एक वजह मालदीव के साथ बिगड़ते रिश्ते
15 नवंबर 2023 को मालदीव के नए राष्ट्रपति और चीन समर्थक कहे जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने शपथ ली। इसके बाद से भारत और मालदीव के रिश्तों में खटास आई है। दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू ने अपनी चुनावी कैंपेन में इंडिया आउट का नारा दिया। उन्होंने सत्ता में आने के बाद भारत के सैनिकों को निकाल लेने के आदेश दिए। भारत के साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे एग्रीमेंट खत्म करने की घोषणा की। इसके बाद मालदीव के दो मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप विजिट को लेकर उनके और भारत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।
इसके बाद मुइज्जू 8-13 जनवरी को चीन के दौरे पर चले गए। यहां से लौटने के बाद उन्होंने चीन की तारीफ की। कहा- चीन ने हमारे आंतरिक मसलों में दखल नहीं दिया। चीन ने यह भी कहा कि वो हमारे किसी भी घरेलू मामले पर अपना असर नहीं डालेगा। इन सभी घटनाक्रम के चलते भारत और मालदीव के रिश्ते बिगड़ रहे हैं।

राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू अपने दूसरे विदेश दौरे पर चीन गए। इससे पहले वो तुर्किये गए थे।
चीन खुफिया जहाज को रिसर्च शिप कहता है
चीन के पास कई जासूसी जहाज हैं। वो भले ही कहता हो कि वो इन शिप का इस्तेमाल रिसर्च के लिए करता है लेकिन इनमें पावरफुल मिलिट्री सर्विलांस सिस्टम होते हैं। मालदीव और श्रीलंकाई बंदरगाह पर पहुंचने वाले चीनी जहाजों की जद में आंध्रप्रदेश, केरल और तमिलनाडु के कई समुद्री तट आ जाते हैं।
एक्सपर्ट का कहना है कि चीन ने भारत के मुख्य नौसैना बेस और परमाणु संयंत्रों की जासूसी के लिए इस जहाज को श्रीलंका भेजा है। चीन के जासूसी जहाजों में हाई-टेक ईव्सड्रॉपिंग इक्विपमेंट (छिपकर सुनने वाले उपकरण) लगे हैं। यानी श्रीलंका के पोर्ट पर खड़े होकर यह भारत के अंदरूनी हिस्सों तक की जानकारी जुटा सकता है।
साथ ही पूर्वी तट पर स्थित भारतीय नौसैनिक अड्डे इस शिप की जासूसी के रेंज में होंगे। चांदीपुर में इसरो के लॉन्चिंग केंद्र की भी इससे जासूसी हो सकती है। इतना ही नहीं देश की अग्नि जैसी मिसाइलों की सारी सूचना जैसे कि परफॉर्मेंस और रेंज के बारे में यह जानकारी चुरा सकता है।
एक महीने से ज्यादा समय से भारत इस जासूसी जहाज पर कड़ी नजर रख रहा है। यह 23 सितंबर को मलक्का जलडमरूमध्य से हिंद महासागर में पहुंचा। 10 सितंबर को अपने होमपोर्ट गुआंगजौ से निकलने के बाद इसे 14 सितंबर को सिंगापुर में देखा गया था।

तस्वीर युआंग वांग 5 की है। चीन के पास ऐसे 7 जासूसी शिप हैं। इनसे वो प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर की निगरानी कर सकता है। ये लैंड बेस्ड कमांडिंग सेंटर को जानकारी भेजते हैं।
इन जासूसी जहाजों को चीन की सेना ऑपरेट करती है
चीन के पास कई जासूसी जहाज हैं। ये पूरे प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर में काम करने में सक्षम हैं। ये शिप जासूसी कर बीजिंग के लैंड बेस्ड ट्रैकिंग स्टेशनों को पूरी जानकारी भेजते हैं। चीन युआन वांग क्लास शिप के जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल की लॉन्चिंग को ट्रैक करता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिप को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स यानी SSF ऑपरेट करती है। SSF थिएटर कमांड लेवल का ऑर्गेनाइजेशन है। यह PLA को स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक, इन्फॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और साइकोलॉजिकल वारफेयर मिशन में मदद करती है।
चीन के जासूसी जहाज पावरफुल ट्रैकिंग शिप हैं। ये शिप अपनी आवाजाही तब शुरू करते हैं, जब भारत या कोई अन्य देश मिसाइल टेस्ट कर रहा होता है। शिप में हाईटेक ईव्सड्रॉपिंग इक्विपमेंट (छिपकर सुनने वाले उपकरण) लगे हैं। इससे यह 1,000 किमी दूर हो रही बातचीत को सुन सकता है।
मिसाइल ट्रैकिंग शिप में रडार और एंटीना से बना इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगा होता है। ये सिस्टम अपनी रेंज में आने वाली मिसाइल को ट्रैक कर लेता है और उसकी जानकारी एयर डिफेंस सिस्टम को भेज देता है। यानी, एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आने से पहले ही मिसाइल की जानकारी मिल जाती है और हमले को नाकाम किया जा सकता है।

महासागर में QUAD देशों की संभावित चुनौती से डरा हुआ है चीन
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के समुद्री रक्षा मंच QUAD को चीन खतरा मानता है। चीन इसे डरकर अपनी समुद्री रक्षा तैयारियों में जुटा है। QUAD के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र सामरिक रूप से अहम है, चीन यहां अपनी मौजूदगी चाहता है।
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