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नई दिल्ली15 मिनट पहले
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बेंच मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त को करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अगस्त) को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ. आर वी अशोकन से एक इंटरव्यू के माफीनामे को लेकर सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि क्या कोर्ट की अवमानना के लिए माफी उन अखबार में पब्लिश हुआ, जहां न्यूज एजेंसी PTI को दिया गया इंटरव्यू प्रकाशित हुआ था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अशोकन के खुद के पैसों से ये माफीनामा छपना चाहिए, न कि IMA फंड से। बेंच मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त को करेगी।
IMA अध्यक्ष ने कोर्ट की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था
सुप्रीम कोर्ट IMA द्वारा 2022 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें पतंजलि द्वारा कोविड टीकाकरण अभियान और मॉडर्न मेडिकल प्रैक्टिसेस को बदनाम करने का आरोप है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल को सुनवाई के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा था कि, ‘IMA एक उंगली पतंजलि की ओर उठा रहा है, जबकि बाकी चार उंगलियां उनकी ओर हैं।’
इसके बाद 29 अप्रैल को IMA अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन ने न्यूज एजेंसी PTI में कोर्ट की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। डॉ. अशोकन ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के अस्पष्ट बयानों ने प्राइवेट डॉक्टरों का मनोबल कम किया है। पतंजलि ने कोर्ट को इस बयान के बारे में बताया था। बेंच ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और IMA चीफ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही अखबारों में माफी मांगने का निर्देश दिया था।
इसके बादअशोकन ने 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनकी बिना शर्त माफी कई पब्लिकेशंस में पब्लिश कर दी गई है। माफीनामें को एसोसिएशन की मंथली पब्लिकेशन, आईएमए वेबसाइट और पीटीआई में प्रकाशित की गई थी।

7 मई की सुनवाई में क्या हुआ था?
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने 7 मई को IMA की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई की थी। इसमें कहा गया है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ निगेटिव प्रचार किया।
बेंच ने कहा था कि अगर लोगों को प्रभावित करने वाले किसी प्रोडक्ट या सर्विस का विज्ञापन भ्रामक पाया जाता है तो सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स भी समान रूप से जिम्मेदार हैं।
IMA की आलोचना में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि आप (IMA) कहते हैं कि दूसरा पक्ष (पतंजलि आयुर्वेद) गुमराह कर रहा है, आपकी दवा बंद कर रहा है – लेकिन आप क्या कर रहे थे?! … हम स्पष्ट कर दें, यह अदालत किसी भी तरह की पीठ थपथपाने की उम्मीद नहीं कर रही है।

10 जुलाई, 2022 को पब्लिश पतंजलि वेलनेस का विज्ञापन। एडवर्टाइजमेंट में एलोपैथी पर “गलतफहमियां” फैलाने का आरोप लगाया गया था। इसी विज्ञापन को लेकर IMA ने 17 अगस्त 2022 को याचिका लगाई थी।
कोर्ट ने केंद्र से पूछा- राज्यों को भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई से क्यों रोका
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि उसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष अधिकारियों को भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल, 1945 के रूल 170 के तहत कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए क्यों कहा।
कोर्ट ने कहा था- ब्रॉडकास्टर्स को सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म दाखिल करना होगा
SC ने कहा था कि ब्रॉडकास्टर्स को कोई भी विज्ञापन दिखाने से पहले एक सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म दाखिल करना होगा, जिसमें कहा जाएगा कि विज्ञापन नियमों का अनुपालन करते हैं। अदालत ने कहा था कि टीवी ब्रॉडकास्टर्स ब्रॉडकास्ट सर्विस पोर्टल पर घोषणा अपलोड कर सकते हैं और आदेश दिया कि प्रिंट मीडिया के लिए चार हफ्ते के भीतर एक पोर्टल स्थापित किया जाए।
कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ी 2022 की गाइडलाइन का भी जिक्र किया था। इसकी गाइडलाइन 13 में कहा गया है कि किसी व्यक्ति को उस प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में पर्याप्त जानकारी या अनुभव होना चाहिए जिसे वो एंडोर्स कर रहा है। उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह भ्रामक नहीं है। बेंच ने उपभोक्ता की शिकायत दर्ज करने के लिए प्रोसेस बनाने की जरूरत बताई।

सात पॉइंट में पतंजलि मामले की अब तक की सुनवाई…
1. अगस्त 2022: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पतंजलि के खिलाफ याचिका लगाई
सुप्रीम कोर्ट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की ओर से 17 अगस्त 2022 को दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें कहा गया है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ निगेटिव प्रचार किया। वहीं खुद की आयुर्वेदिक दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का झूठा दावा किया।
2. नवंबर 2023: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पतंजलि भ्रामक दावे करके देश को धोखा दे रही
कोर्ट ने कहा- पतंजलि भ्रामक दावे करके देश को धोखा दे रही है कि उसकी दवाएं कुछ बीमारियों को ठीक कर देंगी, जबकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। पतंजलि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट में बताई गई बीमारियों के इलाज का दावा करने वाले अपने प्रोडक्ट्स का विज्ञापन नहीं कर सकती।
3. जनवरी 2024: कोर्ट के आदेश के बाद भी पतंजलि ने प्रिंट मीडिया में जारी किए विज्ञापन
IMA ने दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में प्रिंट मीडिया में जारी किए गए विज्ञापनों को कोर्ट के सामने पेश किया।कोर्ट के मना करने के बाद भी पतंजलि की ओर से गुमराह करने वाले विज्ञापन जारी करने के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी कर ये भी पूछा है कि उनके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
4. मार्च 2024: स्वामी रामदेव और MD आचार्य बालकृष्ण को कोर्ट में पेश होने को कहा
19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि पतंजलि आयुर्वेद ने अवमानना नोटिस का जवाब नहीं दिया है। अदालत ने पतंजलि के को-फाउंडर बाबा रामदेव और कंपनी के MD आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट पेश होने को भी कहा। बालकृष्ण ने 21 मार्च को एक माफीनामा जारी किया।
5. अप्रैल 2024: कोर्ट ने माफीनामा रिजेक्ट किया, कहा- आपकी माफी से संतुष्ट नहीं
2 अप्रैल को कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को भ्रामक विज्ञापनों के संबंध में उचित हलफनामा दायर नहीं करने पर फटकार लगाई। अदालत ने रामदेव और बालकृष्ण को “कार्रवाई के लिए तैयार” रहने को कहा। कोर्ट ने उनकी माफी को खारिज करते हुए कहा- आपकी माफी इस अदालत को संतुष्ट नहीं कर रही है।
6. अप्रैल 2024: पतंजलि ने कोर्ट में माफीनाफा फाइल किया, 67 अखबारों में भी छपवाया
पतंजलि ने 23 अप्रैल को कोर्ट में भ्रामक विज्ञापनों को लेकर माफीनामा फाइल किया। इसे 67 अखबारों में पब्लिश किया गया था। इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा- आपके विज्ञापन जैसे रहते थे, इस ऐड का भी साइज वही था? जब आप कोई विज्ञापन प्रकाशित करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम उसे माइक्रोस्कोप से देखेंगे।
7. अप्रैल 2024: ओरिजिनल माफीनामा की जगह ई-फाइलिंग करने पर फटकार लगाई
कोर्ट ने पतंजलि के वकील को ओरिजिनल माफीनामा (न्यूज पेपर्स की कॉपी) की जगह ई-फाइलिंग करने पर फटकार लगाई। कोर्ट ने पतंजलि पर समय पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर उत्तराखंड सरकार को भी फटकारा। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख दी।








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