चंडीगढ़। पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग (पीएसएचआरसी) ने चंडीगढ़ में गंभीर वायु प्रदूषण पर सख्त हो गया है। मानवाधिकार आयोग ने चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) से इस संबंध में विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तलब की है। आयोग ने संज्ञान लेते हुए कहा कि चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आयोग ने गंभीर चिंता जताई कि शहर के कुछ हिस्सों विशेष रूप से सेक्टर-22 के आसपास एक्यूआई स्तर 300 के पार पहुंच गया, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लंबे समय तक वायु गुणवत्ता अत्यंत खराब श्रेणी में बनी रही। आयोग ने सीपीसीसी से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों, किसी संरचित प्रतिक्रिया तंत्र के अस्तित्व और उसके प्रभावी क्रियान्वयन तथा संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए अपनाए गए उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 दिसंबर को निर्धारित की है।
वायु प्रदूषण जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
आयोग ने टिप्पणी की कि इस स्तर का वायु प्रदूषण जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। विशेषकर बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवतियों, सांस व हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह भयावह है। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीने के अधिकार को भी सम्मिलित करता है और खतरनाक वायु गुणवत्ता के लंबे समय तक संपर्क में रहना बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग ने यह भी संज्ञान लिया कि जहां एनसीआर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी), वाहन प्रतिबंध और यातायात नियंत्रण जैसे व्यापक कदम लागू किए गए हैं, वहीं चंडीगढ़ में ऐसी ठोस और प्रभावी कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक तैयारियों और प्रतिक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पीएसएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संत प्रकाश ने कहा कि इतने गंभीर पर्यावरणीय और मानवाधिकार मुद्दे पर उदासीनता बरतना संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों की विफलता के समान है।















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