तोशाम के डाडम में अवैध खनन, भ्रष्टाचार व खनन के चलते हुए मौतों के मामले अब उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई न करने पर मुख्य सचिव से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने कहा तस्वीर में दिखाए गड्ढों से प्रथम दृष्टया यह सिद्ध होता है कि अवैध खनन हुआ है। कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में खनन पर हैरानी जताते हुए सरकार मानचित्र के साथ यह विवरण देने का आदेश दिया है कि अरावली पहाड़ियों का कौन सा भाग संरक्षित/आरक्षित वन घोषित है और किस भाग में खनन निषिद्ध है।
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स्थानीय निवासी राकेश दलाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से अवैध खनन का मामला हाईकोर्ट के समक्ष रखा। याची ने बताया कि डाडम में बड़े स्तर पर अवैध खनन हो रहा है और इस बारे में अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को शिकायत दी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। याची ने बताया कि स्थानीय निवासियों के साथ ही संसद तक ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी लेकिन अधिकारियों ने प्रभावशाली लोगों से मिलीभगत कर इन सब के प्रति आंखे मूंद ली।
हैरत की बात तो यह है कि अवैध खनन का मामला मीडिया में बहुत अधिक प्रकाशित होने के बावजूद अधिकारियों की नींद नहीं टूटी। याची ने एनजीटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि अनियंत्रित खनन की वजह से बड़ा झेत्र बर्बाद हो रहा है। याचिका में बताया गया कि कुछ ही समय पहले डाडम में एक बड़ा हादसा हुआ जिसमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस हादसे का सबसे बड़ा कारण अवैध और अनियंत्रित खनन था। यदि अवैध खनन पर समय से लगाम लगा दी गई होती तो इस हादसे को रोका जा सकता था।
मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि खनन अधिकारी, सहायक खनन अभियंता, खनन निरीक्षक रैंक के 10 अधिकारियों पर 21 जनवरी 2025 के आदेश के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उपरोक्त 10 अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया है या नहीं। कोर्ट ने अब मुख्य सचिव से पूछा है कि खनन अधिकारी से
वरिष्ठ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।


























