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– फोटो : अमर उजाला
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चौधर की बिसात पर लोगों को गोलबंद करने की सियासत को इस विधानसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने अलविदा कह दिया है। इसकी जगह वोटर को स्वीकार्य चेहरे पर दांव लगाने की नई सियासत का आगाज हो गया है।
खास यह है कि समाज में कुछ बदलाव लाने की क्षमता दिखाने वाले ज्यादातर युवाओं को अपना नेता चुनकर लोगों ने कई सियासी दिग्गजों को बड़ा संदेश भी दिया है। करीब छह माह पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली थी।
इसमें रोहतक से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की बड़ी जीत हुई थी। हुड्डा के नजदीकी नेता हिसार, सोनीपत और अंबाला से सीट से जीते थे। तब हुड्डा खेमे की ओर 10 साल बाद हरियाणा की चौधर रोहतक वापस लाने का नारा बुलंद किया गया था।
फिर विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ इसी चौधर के नाम पर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया गया। हालांकि खुद हुड्डा रोहतक की चौधर जैसे जुमलों से बचते रहे और हर रैली में 36 बिरादरी को साथ होने का दावा करते रहे।



























