
Haryana Election
– फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा चुनाव के 67 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते ही अभूतपूर्व बगावत का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव में सत्ता विरोध का प्रभाव कम करने की कवायद में भाजपा अंतर्विरोध में उलझ गई है। टिकट न मिलने से नाराज नेताओं व उनके समर्थकों के इस्तीफे और निर्दलीय चुनाव लड़ने के एलान हो रहे हैं।
लगभग एक तिहाई प्रत्याशियों के विरोध में स्वर उठने से भाजपा के सामने फिलहाल नई चुनौती खड़ी हो गई है। सिर्फ हारे ही नहीं, मौजूदा विधायकों व मंत्रियों के भी टिकट काटकर जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का भाजपा का फार्मूला कई राज्यों में सफल रहा है।
इन जिताऊ उम्मीदवारों में चाहे दूसरे दलों से आए ही क्यों न हों। इसी फार्मूले पर हरियाणा में भी काम हुआ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का फीडबैक भी रहा है कि चुने हुए कई नेताओं के विरोध को देखते हुए नए लोगों को मौका दिया जाए।
10 साल से सत्ता में होने की वजह से सरकार के प्रति नाराजगी के मद्देनजर न केवल पिछली बार हारे 50 में से 23 उम्मीदवारों को बदल दिया गया है, बल्कि 8 मौजूदा विधायकों का भी पत्ता साफ कर दिया है। 40 सीटों पर चेहरे बदलने पड़े हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ही सीट करनाल से बदलकर लाडवा करने से स्थिति समझी जा सकती है।
















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