
विनेश फोगाट, कविता दलाल और कैप्टन योगेश बैरागी
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जुलाना…अब केवल हरियाणा विधानसभा चुनाव का एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर की दो महिला पहलवानों विनेश फोगाट और कविता दलाल के आमने-सामने आने के बाद यहां का चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। पहलवानों के यौनशोषण मामले में जंतर-मंतर से लेकर पेरिस ओलंपिक तक में संघर्ष करती दिखीं विनेश के लिए जुलाना का राजनीतिक दंगल बड़ी चुनौती से कम नहीं है। 15 साल से यहां जीत की बाट जोह रही कांग्रेस का खाता खोलने की बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। कांग्रेस और विनेश को यहां सहानुभूति के दांव से जीत की उम्मीद है, लेकिन जातीय जाल जीत में बाधक बन रहा है। जाट बहुल जुलाना में गैर-जाट मतदाताओं को कम आंकना भारी पड़ सकता है। जाट और गैर जाट मतदाताओं के ध्रुवीकरण की जबरदस्त कोशिशों के बीच भाजपा के कैप्टन योगेश बैरागी सीधी टक्कर में आ रहे हैं।
जुलाना की सीट को चर्चित बनाने के लिए विनेश का नाम ही काफी था, लेकिन आप ने इसे बहुचर्चित बनाने में कसर नहीं छोड़ी। आप ने डब्ल्यूडब्ल्यूई की अंतरराष्ट्रीय पहलवान और इस खेल की पहली भारतीय महिला का रिकॉर्ड बना चुकी कविता दलाल को उम्मीदवार बनाया है। कविता मूलरूप से जुलाना की बेटी और विनेश यहां की बहू हैं। बहू और बेटी के आमने-सामने होने से लोगों की दुविधा बढ़ गई है। विनेश कहती हैं कि वह खिलाड़ियों की ही नहीं, सभी वर्गों की बात रखेंगी। किसानों के साथ-साथ जवानों और पिछड़े लोगों के मुद्दों को भी उठाएंगी। वहीं, वीआरएस लेकर भाजपा में शामिल हुए डॉ. सुरेंद्र लाठर को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने इनेलो ज्वाइन कर लिया। अभय चौटाला ने उन्हें तत्काल उम्मीदवार भी घोषित कर ली। जननायक जनता पार्टी के मौजूदा विधायक अमरजीत सिंह ढांडा भी जुलाना हलके से ही मैदान में डटे हैं। जिस तरह के राजनीतिक हालात दिख रहे हैं, उससे लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा में भी जाट मतदाताओं के लामबंद होने के आसार हैं। ठीक इसी प्रकार गैर जाट मतदाता भी लामबंद हो रहे हैं। गांवों में विनेश फोगाट का जोरदार स्वागत हो रहा है, लेकिन शहर के मतदाता शांत हैं और अभी पत्ते नहीं खोल रहे हैं। मुद्दों के बजाय यहां विनेश फोगाट का जिक्र ज्यादा है।
इनेलो के गढ़ में भाजपा का कभी नहीं खुला खाता
जुलाना सीट इनेलो का गढ़ रही है। 2009 और 2014 में यहां इनेलो के परमेंद्र सिंह ढुल इनेलो के विधायक रहे। कांग्रेस केवल चार बार यहां से जीती है। 2005 में आईजी शेर सिंह कांग्रेस टिकट पर जीते थे। इसके बाद से कांग्रेस यहां लगातार पिछड़ती जा रही है। यहां से भाजपा का कभी खाता नहीं खुला, जबकि कांग्रेस भी केवल चार बार ही जीती है। दोनों राष्ट्रीय दलों की राहें इतनी आसान नहीं हैं।
मुद्दे…टूटी सड़कें और पानी निकासी
जुलाना में सड़कें टूटी पड़ी हैं। जरा सी बारिश में दुकानों तक पानी पहुंच जाता है। पानी निकासी का पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। गांवों में पीने के पानी की दिक्कत है। आज भी महिलाओं को पानी खेतों से लाना पड़ता है। पीने का पानी साफ नहीं है, पाइप लाइन काफी पुरानी हो चुकी हैं, इसलिए दूषित पानी यहां बड़ा मुद्दा है। दुकानदार मुकेश कुमार, पुरुषोत्तम का मानना है कि सरकार में होने के बावजूद जजपा विधायक अमरजीत विकास कार्य नहीं करवा पाए। जुलाना से गोहाना जाने वाली सड़क टूटी पड़ी है। क्षेत्र में रोजगार के लिए न कोई बड़ा उद्योग है और न शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कोई बड़ा संस्थान। क्षेत्र में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है।
- हलके के गांव किलाजफरगढ़ के शौकिन शर्मा कहते हैं कि विकास कार्य कम हुए हैं, इसलिए इस बार बदलाव का मन है। गांव के ही अनिल कुमार कहते हैं कि गांव की गलियों से लेकर शहर की सड़कें टूटी हैं, इसलिए इस बार कांग्रेस को मौका देना है। इसी गांव के प्रदीप कुमार, ईश्वर सिंह बिना सिफारिश नौकरी देने पर भाजपा की नीतियों का गुणगान कर रहे हैं।




























