चंडीगढ़ में रॉक गार्डन के पीछे फैले उस जंगल को फिर से हरा-भरा बनाने की कोशिश शुरू हो गई है, जिसे वर्षों से पंजाब से आ रहे सीवरेज ने पेड़ों का कब्रिस्तान बना दिया था।
अमर उजाला ने 20 जनवरी के अंक में “पेड़ों का कब्रिस्तान” शीर्षक से इस गंभीर मुद्दे को उठाया था। तब से वहां लगातार काम हो रहा है। पहले नगर निगम ने नई सीवरेज लाइन डालकर पंप के जरिए गंदा पानी बाहर निकाला। अब मिट्टी बदली जा रही है और जंगल को फिर से जीवन देने की तैयारी जोरों पर है।
वर्षों से रॉक गार्डन के पीछे फैले जंगल में पंजाब के हिस्से से आने वाला गंदा सीवरेज का पानी जमा हो रहा था, जिससे कई पुराने पेड़ सूखकर मर गए। इस मामले को गंभीरता से उठाने के बाद यूटी प्रशासन के पर्यावरण विभाग ने पंजाब के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया।
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समस्या के समाधान के लिए एक समग्र कार्य योजना बनाई गई। सबसे बड़ी काम वर्षों से खड़े सीवरेज और कैमिकल युक्त पानी को बाहर निकालना था। इसके लिए वन विभाग ने नगर निगम से संपर्क किया। निगम ने एक नई सीवरेज लाइन डाली और पंप लगाकर गंदा पानी बाहर निकाला गया, जिसे ट्रीटमेंट के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) में भेजा गया।
जंगल के अंदर जो थोड़ा पानी रहा गया था, उसे सुखाया गया। वहां की मिट्टी को भी बदला जा रहा है। चूंकि यह इलाका लो-लाइन में आता है, इसलिए वहां भराव करके जमीन को ऊंचा किया जा रहा है ताकि बारिश में दोबारा पानी जमा न हो।



























