मोहाली। भारतीय किसान यूनियन (पंजाब) लखोवाल और भारतीय किसान यूनियन राजेवाल ने केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर बिजली (संशोधन) बिल 2025 को रद्द करने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि यह बिल बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है, जो किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है। किसान नेताओं परमदीप सिंह बैदवान, किरपाल सिंह सियाऊ, हरजीत सिंह, रंजीत सिंह बजहेड़ी, दर्शन सिंह दुराली, दविंदर सिंह देह कलां, रंजीत सिंह राणा, जगजीत सिंह, जसपाल सिंह, मनप्रीत सिंह अमलाला, कुलवंत सिंह चिल्ला और गुरविंदर सिंह ने बताया कि 9 अक्टूबर 2025 को बिजली (संशोधन) बिल 2025 का एक ड्राफ्ट जारी किया गया था, जिस पर राज्य सरकारों, उपभोक्ताओं और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। किसान यूनियनों ने अपने पत्र में कहा है कि यह बिल शक्तियों का केंद्रीकरण करने और बिजली क्षेत्र को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले करने की सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस संशोधन के माध्यम से बिजली वितरण और उत्पादन के क्षेत्र में निजी कंपनियों को बढ़ावा देना चाहती है, जिससे सरकारी नियंत्रण और जवाबदेही खत्म हो जाएगी। किसान संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि वे इस बिल का हर स्तर पर विरोध करेंगे। यूनियनों ने कहा कि सरकार या तो इस कार्रवाई को तुरंत रोक दे या फिर जनता के तीव्र विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहे।

























