खनौरी बॉर्डर पर मरणव्रत पर चल रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की जांच करती सेहत विभाग की टीम।
हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर 46 दिन से चल रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसके साथ ही कोर्ट में शंभू बॉर्डर खोलने के खिलाफ दायर याचिका पर भी सुनवाई करेगा। पिछली 6 जनवरी की सुनवाई में पंजाब सरकार न
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वहीं, गुरुवार को पंजाब के मोगा में महापंचायत के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने आंदोलन को समर्थन दिया था। इसको लेकर आज (शुक्रवार) किसान नेताओं की 6 सदस्यीय कमेटी 101 किसानों के साथ खनौरी बॉर्डर पर आएगी। यहां SKM की ओर से आंदोलन चला रहे नेताओं सरवण पंधेर और डल्लेवाल से समर्थन पर सहमति ली जाएगी।
इसके अलावा, SKM पूरे देश में आज केंद्र सरकार के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाएगी। बता दें कि किसान फसलों पर MSP की गारंटी समेत 13 मांगों को लेकर पिछले 11 महीने से आंदोलन कर रहे हैं।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात करती हाई पावर कमेटी। – फाइल फोटो
डल्लेवाल के गुरुवार को टेस्ट हुए, आज आएगी रिपोर्ट अनशन पर बैठे डल्लेवाल की तबीयत नाजुक बनी हुई है। उन्हें बोलने में दिक्कत हो रही है। इलाज न लेने के साथ ही उन्होंने मालिश कराने से भी मना कर दिया है। हालांकि, राजिंदरा अस्पताल पटियाला में गठित डॉक्टरों के बोर्ड ने वीरवार को खनौरी पहुंचकर डल्लेवाल का अल्ट्रासाउंड सहित अन्य टेस्ट किए। उनकी रिपोर्ट आज शुक्रवार को आएगी।
इससे पहले गुरुवार को कर्नाटक स्टेट एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन के पूर्व चेयरमैन प्रकाश कामारेड्डी, कर्नाटक के विधायक बीआर पाटिल और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) छात्रसंघ के अध्यक्ष धनंजय कुमार खनौरी मोर्चे पर पहुंचे। इन्होंने डल्लेवाल का हाल जाना।
गुरुवार को ही शंभू बार्डर पर केंद्र सरकार द्वारा किसानों की सुनवाई न किए जाने से आहत किसान रेशम सिंह ने आत्महत्या कर ली। वहीं, खनौरी बॉर्डर पर पानी गर्म करते समय देसी गीजर में आग जलाते समय किसान गुरदियाल सिंह झुलस गया। उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में किसान रेशम सिंह ने दम तोड़ा और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की टांगें पोंछते हुए डॉक्टर।
डल्लेवाल मामले की सुप्रीम कोर्ट में 8 सुनवाई में क्या-क्या हुआ…
1. 13 दिसंबर- तत्काल डॉक्टरी मदद दें डल्लेवाल 26 नवंबर को अनशन पर बैठे थे। 13 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में आमरण अनशन को लेकर सुनवाई हुई। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और केंद्र सरकार को कहा कि डल्लेवाल को तत्काल डॉक्टरी मदद दें। उन्हें जबरन कुछ न खिलाया जाए। आंदोलन से ज्यादा उनकी जान जरूरी है। इसके बाद पंजाब के DGP गौरव यादव और केंद्रीय गृह निदेशक मयंक मिश्रा ने खनौरी पहुंच डल्लेवाल से मुलाकात की।
2. 18 दिसंबर- पंजाब सरकार को कुछ करना चाहिए सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा कि डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनसे भावनाएं जुड़ी हुई हैं। राज्य को कुछ करना चाहिए। ढिलाई नहीं बरती जा सकती। आपको हालात संभालने होंगे।
3. 19 दिसंबर- बिना टेस्ट 70 साल के आदमी को कौन ठीक बता रहा पंजाब सरकार ने दावा किया कि डल्लेवाल की तबीयत ठीक है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 70 साल का आदमी 24 दिन से भूख हड़ताल पर है। कौन डॉक्टर है, जो बिना किसी टेस्ट के डल्लेवाल को सही बता रहा है? आप कैसे कह सकते हैं डल्लेवाल ठीक हैं? जब उनकी कोई जांच नहीं हुई, ब्लड टेस्ट नहीं हुआ, ECG नहीं हुई।
4. 20 दिसंबर- अधिकारी अस्पताल में भर्ती करने पर फैसला लें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डल्लेवाल की हालत रोज बिगड़ रही है। पंजाब सरकार उन्हें अस्पताल में शिफ्ट में क्यों नहीं कराती? यह उन्हीं की जिम्मेदारी है। यदि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होती है तो अधिकारी निर्णय लेंगे।

दो दिन पहले डल्लेवाल बेहोश हो गए थे। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उनके हाथ-पैर रगड़े। वे लगातार उनके ब्लड प्रेशर पर नजर बनाए हुए थे।
5. 28 दिसंबर- केंद्र की मदद से अस्पताल शिफ्ट करें यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 20 दिसंबर के आदेश को लागू न करने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर हुई। इसमें कोर्ट ने पंजाब सरकार को कहा कि पहले आप समस्या पैदा करते हैं, फिर कहते हैं कि आप कुछ नहीं कर सकते। केंद्र की मदद से उन्हें अस्पताल में शिफ्ट करें।
इसमें किसानों के विरोध पर कोर्ट ने कहा कि किसी को अस्पताल ले जाने से रोकने का आंदोलन कभी नहीं सुना। यह आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा है। किस तरह के किसान नेता हैं जो चाहते हैं कि डल्लेवाल मर जाएं? डल्लेवाल पर दबाव दिखता है। जो लोग उनका अस्पताल में भर्ती होने का विरोध कर रहे हैं, वे उनके शुभचिंतक नहीं हैं।
6. 31 दिसंबर को पंजाब सरकार ने 3 दिन की मोहलत ली पंजाब सरकार ने कोर्ट को बताया कि 30 दिसंबर को पंजाब बंद था, जिस वजह से ट्रैफिक नहीं चला। इसके अलावा अगर केंद्र सरकार पहल करती है तो डल्लेवाल बातचीत के लिए तैयार हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार के समय मांगने के आवेदन को मंजूर कर लिया।
7. 2 जनवरी- हमने अनशन तोड़ने को नहीं कहा कोर्ट ने कहा कि जानबूझकर हालात बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। हमने कभी अनशन तोड़ने को नहीं कहा। कोर्ट ने पंजाब सरकार को कहा कि आपका रवैया ही सुलह करवाने का नहीं है। कुछ तथाकथित किसान नेता गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे हैं।
इस केस में डल्लेवाल की एडवोकेट गुनिंदर कौर गिल ने पार्टी बनने की याचिका दायर की थी। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “कृपया टकराव के बारे में न सोचें, हम किसानों से सीधे बातचीत नहीं कर सकते। हमने कमेटी बनाई है। किसानों से उसी कमेटी के जरिए बात करेंगे।”
8. 6 जनवरी- किसान मुलाकात के लिए तैयार पंजाब सरकार ने कहा कि आंदोलन पर चल रहे किसान हाई पावर कमेटी से बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। इसके बाद अदालत ने इस मामले की सुनवाई 10 जनवरी तय की। इसके बाद कमेटी ने मुलाकात की।

शंभू बॉर्डर का मामला ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा…
1. फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी के कानून को लेकर 13 फरवरी 2024 से शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन चल रहा है। इसके अलावा खनौरी बॉर्डर पर भी किसान बैठे हैं।
2. 10 जुलाई 2024 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि एक हफ्ते में शंभू बॉर्डर को खोला जाए। इसके खिलाफ हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई।
3. 12 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने एंबुलेंस, सीनियर सिटीजन्स, महिलाओं, छात्रों के लिए शंभू बॉर्डर की एक लेन खोलने के लिए कहा। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाई, जिसे सरकार और किसानों के बीच मध्यस्थता करनी थी।
4. सुप्रीम कोर्ट की यह कमेटी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस नवाब सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई। इसमें पूर्व DGP बीएस संधू, कृषि विश्लेषक देवेंद्र शर्मा, प्रोफेसर रंजीत सिंह घुम्मन, कृषि सूचनाविद डॉ. सुखपाल सिंह और विशेष आमंत्रित सदस्य प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज शामिल हैं।
5. कमेटी ने 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया कि आंदोलन करने वाले किसान बातचीत के लिए नहीं आ रहे। किसानों से उनकी सुविधा के अनुसार तारीख और समय भी मांगा गया था, लेकिन उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद की मीटिंग में किसानों ने शामिल होने से इनकार कर दिया।
आंदोलन में आगे क्या…
- 12 जनवरी से रोजाना एक जिले के किसान खनौरी पहुंचेंगे। इसके लिए सभी जिलों के दिन और तारीख तय कर दिए गए हैं।
- 13 जनवरी को लोहड़ी वाले दिन केंद्र सरकार की ओर से जारी एग्रीकल्चर मार्केटिंग पॉलिसी के ड्रॉफ्ट की कॉपियां जलाई जाएंगी।
- 26 जनवरी को पूरे देश में ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा।

















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