
केपी शर्मा ओली
Explainer: नेपाल में जारी ‘जेन ज़ी’ के विरोध प्रदर्शनों के बीच केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। सोशल मीडिया पर बैन लगाने के मुद्दे पर भड़की हिंसा और विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा भेजा था और इस्तीफ़े में ओली ने लिखा था, “मैंने संविधान के अनुच्छेद 77 (1) (ए) के अनुसार प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है, ताकि संविधान के अनुसार राजनीतिक समाधान ढूंढा जा सके और देश में उत्पन्न असामान्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए समस्याओं को हल करने के लिए आगे की पहल की जा सके।”
मैंने अपने दिमाग़ से ‘हार’ और ‘अपमान’ को…
नेपाल के पीएम के तौर पर केपी शर्मा ओली का यह चौथा कार्यकाल था, जो काफी विवादास्पद हो गया। पिछले साल जुलाई में ही वे चौथी बार प्रधानमंत्री बने थे। सबसे पहले वे साल 2015 में 10 महीने के लिए, 2018 में 40 महीने के लिए, 2021 में तीन महीने के लिए और 2024 से लेकर अब तक करीब 14 महीने मिलाकर साढ़े पांच साल से अधिक समय तक ओली नेपाल के प्रधानमंत्री रहे हैं।

केपी शर्मा ओली
केपी ओली की छवि एक तेज़तर्रार नेता की रही है, जिन्होंने चार चार बार प्रधानमंत्री बनकर देश का नेतृत्व किया। ओली ने नेपाल में राष्ट्रवाद का समर्थन किया और दो बार किडनी ट्रांसप्लांट होने के बावजूद सक्रिय राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहे। इसके साथ ही ओली की छवि एक ऐसे राजनेता की रही है जो पार्टी से लेकर सरकार पर अपना पूरा नियंत्रण रखता रहा है।
केपी शर्मा ओली ने नेपाली अख़बार कांतिपुर में एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था- ”मैंने अपने दिमाग़ से ‘हार’ और ‘अपमान’ को हटा दिया है। कभी-कभी अगर मुझसे कोई आगे निकल जाता है तो जब तक वो मुझसे आगे निकलने की ख़ुशी मना रहा होता है, उस वक़्त मैं हमले की तैयारी कर रहा होता हूं। ये एक मानवीय प्रवृत्ति है कि जब मैं गिरता हूं तो तुरंत उठ भी जाता हूं।”

केपी शर्मा ओली
राजनीति के धुरंधर हैं केपी शर्मा ओली
साल 2022 में हुए चुनाव में उनकी पार्टी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी), या सीपीएन (यूएमएल) ने पुष्प कमल दहल प्रचंड को समर्थन दिया और ओली ने प्रचंड को प्रधानमंत्री और उनके सांसदों को मंत्री बनवाया था। प्रचंड की पार्टी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर)’ ने राष्ट्रपति पद के लिए नेपाली कांग्रेस नेता रामचंद्र पौडेल का समर्थन किया था, जिसके बाद यूएमएल-माओवादी गठबंधन टूट गया। कांग्रेस के समर्थन से केपी ओली प्रधानमंत्री बन गए थे।
जब हेलिकॉप्टर से लाया गया केक
ओली के जन्मदिन से जुड़ा एक किस्सा काफी दिलचस्प रहा है। उस वक़्त इस खबर की खूब चर्चा हुई जिसमें बताया गया कि ओली के जन्मदिन को मनाने के लिए निजी खर्च पर उनके जन्मस्थान तेहराथुम, आठराई के पास चार लाख रुपये खर्च करके एक हेलिपैड बनाया गया था और हेलिकॉप्टर से केक लाया गया था। इसके साथ इस बात की भी आलोचना हुई थी कि अपने जन्मदिन पर ओली सुरक्षाकर्मियों से घिरे हुए थे और उन्हें आम लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा था।

केपी शर्मा ओली
मोहन प्रसाद और मधुमाया के घर जन्मे ओली
केपी ओली का जन्म नेपाल के पूर्वी ज़िले तेहराथुम में 22 फरवरी 1952 को मोहन प्रसाद ओली और मधुमाया ओली के घर हुआ था। जब ओली की उम्र दस साल की थी तब उनका परिवार नेपाल के झापा ज़िले में रहने चला गया था।नेपाल के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक़, उन्होंने 14 साल की उम्र में ही राजनीति में क़दम रख दिया था और साल 1970 में वो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन) में शामिल हुए थे। इसके तीन साल बाद 1973 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था और 14 साल तक वो जेल में क़ैद में रहे थे। साल 1987 में वो जेल से रिहा हुए सीपीएन (एमएल) के कमेटी मेंबर बने थे।
1991 में वो झापा-6 से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और साल 1994 में वो दोबारा चुने गए।अप्रैल 2006 से मार्च 2007 तक वो प्रधानमंत्री जीपी कोइराला के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में उप-प्रधानमंत्री रहे और पहली बार 11 अक्तूबर 2015 को वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए थे।

केपी शर्मा ओली
जेल से निकलते ही ओली को हो गया था तपेदिक
अपने कारावास के दौरान, ओली को तपेदिक हो गया और वह गैस्ट्रिक अल्सर से भी पीड़ित थे। रिहाई के समय, उन्हें बेहद दुबला-पतला बताया गया था। 1990 की क्रांति के बाद उनके गुर्दे में समस्याएं उत्पन्न हो गईं। उन्होंने 2007 में अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली में गुर्दा प्रत्यारोपण कराया और 2020 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल , काठमांडू में दूसरा प्रत्यारोपण हुआ। उन्हें नवंबर 2019 में गुर्दे की बीमारी के लिए डायलिसिस के तहत गहन देखभाल में भर्ती कराया गया था।
गैंडे को गैडा कहें और माउंट एवरेस्ट को सागरमाथा
अगस्त 2019 में, ओली ने दावा किया कि अंग्रेजी शब्द गैंडे को जानवर के लिए नेपाली शब्द गैडा से बदल दिया जाना चाहिए, और माउंट एवरेस्ट को सभी को सागरमाथा कर देना चाहिए।उन्होंने कहा, “…क्या आप जानते हैं कि गैडा क्या है? आप लोग गैडा को गैंडे के रूप में जानते हैं। लेकिन गैंडे गैंडे नहीं हैं, वे गैडा हैं । मैं आपसे इस शब्द को याद रखने का अनुरोध करता हूं- गैडा.. ।”
इनपुट-विकीपीडिया
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