नई दिल्ली2 मिनट पहले
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यह तस्वीर 17 अगस्त की है, जब बिहार में SIR को लेकर, चुनाव आयोग ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEO) ज्ञानेश कुमार सहित इलेक्शन कमीशन के सीनियर अधिकारियों की बुधवार को राज्य चुनाव अधिकारियों के साथ मीटिंग जारी है। इसमें देशभर में वोटर्स लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) यानी वोटर्स वेरिफिकेशन, कराने की तैयारियों को लेकर चर्चा की जा रही है।
आयोग ने कहा है कि बिहार के बाद, पूरे देश में SIR लागू किया जाएगा। इस साल के अंत में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह शुरू हो सकती है। इसका मुख्य मकसद जन्म स्थान की जांच करके अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है।
फरवरी में मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालने के बाद ज्ञानेश कुमार की यह तीसरी बैठक है। इसमें सीनियर अधिकारी जहां आयोग की SIR पॉलिसी पर प्रजेंटेशन देंगे, वहीं बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी SIR के क्रियान्वयन में राज्य का एक्सपीरियंस शेयर करेंगे।
चुनाव आयोग ने इससे पहले मंगलवार को बिहार चुनाव आयोग से मतदाताओं की पहचान के लिए आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश के बाद आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि वोटर की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर माना जाए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि आधार कार्ड को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो आयोग इसकी जांच कराए।
कोर्ट ने कहा था कि कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे। केवल वास्तविक नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति होगी। जो लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दावा कर रहे हैं, उन्हें मतदाता सूची से बाहर रखा जाएगा।

























