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मुंबई9 मिनट पहले
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ किसी भी तरह के मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि महायुति गठबंधन (बीजेपी-एनसीपी-शिवसेना) में सब कुछ ठीक है और उनके बीच किसी भी तरह का कोई कोल्ड वॉर नहीं चल रहा है।
इनके बीच अनबन की खबरें तब चर्चा में आई जब शिंदे ने मुख्यमंत्री रिलीफ फंड के जैसा मेडिकल सेल बना दिया। शिंदे के इस कदम को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। शिंदे ने मंगलवार को कहा कि यह नया सेल किसी कॉम्पीटीशन व्यवस्था के रूप में नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के वॉर रूम के साथ मिलकर काम करेगा ताकि मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

जब मैं मुख्यमंत्री था, तो 31 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने ऐसा ही एक मेडिकल एड सेल बनाया था था। मैंने बस इसे फिर से रिकंस्ट्रक्शन किया ताकि यह और बेहतर तरीके से काम कर सके।

फडणवीस ने भी विवाद को खारिज किया मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, “इस तरह के सेल का गठन कोई गलत बात नहीं है, क्योंकि इसका मकसद जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। जब मैं उपमुख्यमंत्री था, तब मैंने भी इसी तरह का सेल बनाया था।”
विपक्ष का आरोप, राज्य में दोहरी सरकार चल रही है शिंदे की यह सफाई विपक्षी दलों के आरोपों के बाद आई है, जिसमें शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने दावा किया था कि राज्य में “समानांतर सरकार चलाई जा रही है”। राउत ने कहा, अगर सरकार इसी तरह चलती रही तो महाराष्ट्र में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।
शिंदे के करीबी बोले- पहले भी यही काम किया था
नए मेडिकल एड सेल के प्रमुख और शिंदे के करीबी सहयोगी मंगेश चिवटे ने इस मुद्दे पर कहा की यह कोई नई पहल नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब भी मैं सीएम राहत कोष के जरिए यही काम कर रहा था और कई जरूरतमंद मरीजों की मदद की थी। अब यह नया सेल फंड बांटेगा नहीं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को मदद करेगा।”
शिंदे गुट के 20 विधायकों की Y-कैटेगरी सुरक्षा घटाई
हाल ही में महाराष्ट्र में शिवसेना शिंदे गुट के 20 विधायकों की Y कैटेगरी सुरक्षा हटा ली गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन विधायकों की सुरक्षा में सिर्फ एक कॉन्स्टेबल तैनात किया गया है।
वहीं, भाजपा और NCP (अजित गुट) के कुछ विधायकों की सुरक्षा घटाने की खबर है। हालांकि, न तो शासन ने इस पर बयान जारी किया है, न ही विधायकों ने कुछ बोला है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि शिंदे इस फैसले से नाराज हैं।
संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी ने साधा निशाना

सुरक्षा हटाने के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने भी तंज कसा है। शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट कर लिखा, “महायुति वैलेंटाइन मंथ मना रही है…नहीं।” वहीं संजय राउत ने इसे महायुति सरकार में दरार का संकेत बताया।
कहां से आईं फडणवीस और शिंदे में अनबन की खबरें….3 वजहें
- डिप्टी सीएम शिंदे ने 17 फरवरी को उद्योग विभाग की रिव्यू मीटिंग की थी। उद्योग मंत्रालय शिंदे के पास है। इस विभाग की रिव्यू मीटिंग जनवरी में सीएम फडणवीस ने भी की थी, तब उसमें एकनाथ शिंदे शामिल नहीं हुए थे।
- 12 फरवरी को सीएम ने 2027 में होने वाले नासिक कुम्भ की तैयारियों को लेकर बैठक बुलाई थी, उसमें भी शिंदे शामिल नहीं हुए थे। शिंदे ने कुम्भ की तैयारियों की अलग से बैठक 14 फरवरी को की थी।
- सीनियर सरकारी अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा अलग-अलग बैठक करने से कामकाज में दोहराव हो रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि विभागों की कामकाज भी प्रभावित हो रही है।
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