लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि यह युवाओं को जीवन रक्षक कौशल से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तैयारी का मतलब सिर्फ साहस नहीं होता बल्कि प्रशिक्षित साहस होता है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लोगों की व्यापक प्रतिक्रिया को याद करते हुए उन्होंने कहा कि टैगोर थिएटर में आपातकालीन कॉल के दौरान 7,000 से ज्यादा युवा कुछ ही घंटों में आगे आए। उस पल ने हमें सामूहिक जिम्मेदारी की सच्ची भावना दिखाई ।जन भागीदारी, तकनीकी प्रशिक्षण और प्रशासनिक समन्वय मिलकर आपदा-प्रतिरोधी शहर की रीढ़ बनते हैं।
आयोजकों ने बताया कि आने वाले छह दिनों में प्रशिक्षण कार्यक्रम में निकासी अभ्यास, प्राथमिक चिकित्सा, अग्नि सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर व्यावहारिक मॉड्यूल शामिल हैं।
छह दिन चलेगा शिविर
छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के पहले तीन दिनों तक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। जिसके साथ फर्स्ट एड की जानकारी भी दी जाएगी। चौथे दिन वेस्टर्न कमांड चंडी मंदिर के समीप भारतीय सेना द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। पांचवें दिन दमकल विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को ट्रेनिंग दी जाएगी। छठे दिन एनडीआरएफ की टीम द्वारा आपातकाल ओर बाढ़ राहत के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर के पहले दिन बच्चों ने ट्रेनिंग देने वाले ट्रेनरों से आपदा को लेकर कई सवाल किए।
आग पर काबू पाने की दी गई ट्रेनिंग
ट्रेनिंग में आग पर काबू पाने ,बाढ़ राहत कार्य के दौरान सहायता के तरीके , ऊंची इमारतों से सावधानी पूर्वक बाहर आना, फर्स्ट एड मुहैया करवाना, मलबे में दबे हुए व्यक्तियों को किस प्रकार बाहर निकालना, डूबते हुए व्यक्ति को किस प्रकार बाहर निकालना, दम घुटने पर किस प्रकार सहायता प्रदान करना,सांस फूलने पर कृत्रिम श्वास देना संबंधी जानकारी दी गई।




























