9 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

गाजा शहर में अहली अरब अस्पताल पर हुए हमले में मारे गए लोग ।
इजराइल- हमास जंग के 11वें दिन 17 सितंबर को देर रात गाजा शहर के अहली अरब अस्पताल पर जोरदार हमला हुआ। इसमें 500 लोगों की मौत हो गई। हमले के तुरंत बाद हमास ने बयान जारी कर बताया कि इस अटैक के पीछे इजराइल का हाथ है।
उन्होंने अस्पताल पर हमला करने के लिए स्मार्ट बम का इस्तेमाल किया। इजराइल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर हमास पर ही आरोप लगा दिए। इजराइल ने कहा कि हमास ने गलती से अपने ही रॉकेट को अस्पताल पर दाग दिया।
स्टोरी में जानेंगे की स्मार्ट बम क्या होते हैं, जंग में इन्हें कब-कब इस्तेमाल किया गया और ये कितने घातक होते हैं…

ये तस्वीर स्मार्ट बम की है। स्मार्ट बमों की सटीकता पर कहा जाता है कि इन्हें गिराकर भूल भी सकते हैं
क्या इजराइल के पास स्मार्ट बम हैं?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक 7 अक्टूबर को हमास से जंग छिड़ने के बाद अमेरिकी कंपनी बोइंग ने इजराइल को 1000 छोटे स्मार्ट बमों की डिलिवेरी की है। इसके अलावा इजराइल के पास खुद से बनाए स्पाइस बम हैं, ये भी स्मार्ट बम की कैटेगरी में आते हैं।
इसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना भी करती है। स्पाइस बम इजराइल की फर्म राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड ने बनाया है। इन 2000-पाउंड के स्मार्ट बमों को गिराने में मिराज 2000 का इस्तेमाल किया जाता है। स्पाइस 2000 की ग्लाइडिंग रेंज (मार करने की क्षमता) 60 किलोमीटर तक है।
वहीं, यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल गाजा में पुराने अनगाइडेड बम दाग रहा है। जिनका टारगेट सटीक नहीं होता है। इसकी वजह से ये फायर होने के बाद कहीं पर भी गिरकर फट जाते हैं। इनमें कई तो 1950 के हैं। जैसे M117, जो कोरियाई युद्द में इस्तेमाल हुए थे। ऐसे में हो सकता है कि इजराइल की तरफ से फायर किया गया कोई अनगाइडेड बम ही गाजा शहर के अस्पताल पर गिरा हो।

ये तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की गई है, इसमें लिखा है कि इजराइल गाजा पर अटैक करने के लिए पुराने M117 बमों का इस्तेमाल कर रहा है।
स्मार्ट बम क्या होते हैं?
स्मार्ट बम को गाइडेड बम भी कहा जाता है। ये बम बड़ी सटीकता से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते हैं। ये हवा से जमीन पर गिरने वाला बम होता है। इसका मकसद एक खास टारगेट पर अटैक कर उसे नष्ट करना है, ताकि आसपास के इलाकों को नुकसान न पहुंचे।
स्मार्ट बम को अमेरिका में बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। इन्हें रेथियॉन टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन और बोइंग इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम्स नाम की कंपनी बनाती हैं।
पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध में इस्तेमाल हुआ
अमेरिकी वायु सेना ने पहली बार इस बम का इस्तेमाल सेकेंड वर्ल्ड वॉर में किया था। जुलाई 1944 में अमेरिकी वायु सेना ने VB-1 AZON बमों का इस्तेमाल कर पश्चिमी यूरोप और बर्मा (म्यांमार) में कई मिलिट्री ऑपरेशन चलाए थे।
ये 450 किलोग्राम के फ्री फॉल बम थे, जिसके पिछले हिस्से में अंगूठी जितना रेडियो कंट्रोल स्टेबलाइजर्स लगा था। इस बम को जाइरोस्कोपिक ऑटोपायलट के साथ भी फिट किया गया था, ताकि ये टारगेट पर अटैक करते वक्त स्थिर रहें और रास्ते से भटके नहीं।
बी-24 लिबरेटर विमान से लॉन्च होते थे स्मार्ट बम
VB-1 AZON शुरुआती स्मार्ट बम था। ऐसे में इसमें कई खामियां भी थी। इसे सटीकता से लॉन्च करने के लिए ऊंचाई, हवा की रफ्तार, वायु दाब जैसी बातों का ध्यान रखना होता था। उस वक्त इस बम के पास लॉन्च होने के बाद अपना रास्ता बदलने की क्षमता नहीं थी। इसे बी-24 लिबरेटर विमान में सवार ऑपरेटर लॉन्च करता था।
ये बम साइट नाम की डिवाइस की मदद से लक्ष्य पर निशाना साधता था। रात में इस बम को ट्रैक करने के लिए इसके ऊपर टॉर्च लगाई जाती थी। इसकी फ्लैशलाइट को देखकर ऑपरेटर बम की दिशा और स्पीड का पता लगाता था। जैसे ही द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हुआ, अमेरिका ने VB-1 AZON को हटाकर उसकी जगह RAZON बम को तैनात कर दिया।
नीचे दी गई तस्वीर में एक स्मार्ट बम फटते देखा जा सकता है…

इस तस्वीर की कहानी
अप्रैल 2017 की बात है, अमेरिका ने खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए अफगानिस्तान में सबसे बड़ा गैर परमाणु बम ‘GBU-43’ गिराया था। करीब 10 क्विंटल (21,000 पाउंड) वजनी इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ के नाम से जाना जाता है। इस बेहद घातक बम को MC-130 एयरक्राफ्ट से गिराया गया। पेंटागन के प्रवक्ता ने बताया था कि इस बम का पहली बार इस्तेमाल किया गया था।
स्मार्ट बम कैसे काम करते हैं?
स्मार्ट बम या प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन (PGM) एक हवाई बम है। यह कंट्रोल और गाइडेड सिस्टम से लैस होता है। कुछ में छोटे रॉकेट मोटर्स भी फिट किए जाते हैं। ये रॉकेट मोटर न सिर्फ बम की रेंज को बढ़ाते हैं, बल्कि उनके फ्लाइट कंट्रोल में भी मदद करते हैं। ऊंचाई से गिरने के कारण यह बम अपना रास्ता नहीं भटकते हैं।
907 किलोग्राम के स्मार्ट बमों को कई तरह से हथियारों में फिट किया जा सकता है। हथियारों से जुड़ने के बाद इसे ज्वाइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन (JDAM) सिस्टम कहा जाता है। इन बमों को अमेरिका के हाइटेक बॉम्बर जैसे बी-52 और बी-1बी लांसर से लॉन्च किया जा सकता है।
मिलिट्री एनालिसिस नेटवर्क के मुताबिक एक स्मार्ट बम में आम तौर पर 3 मेन पार्ट होते हैं।
पहला – वेपन, ये एक तरह का विस्फोटक होता है।
दूसरा- टॉरगेटिंग सिस्टम ये नेविगेशन में मदद करता है।
तीसरा- एंटी जैमिंग डिवाइस, ये दुश्मन को गाइडेंस सिग्नल में दखल देने से रोकता है।
स्मार्ट बम में और क्या-क्या होता है?
1- रेडियो कमांड गाइडेंस
2- टेलीविजन गाइडेंस
3- इन्फ्रारेड होमिंग गाइडेंस
4- लेजर गाइडेंस
5- GPS रिसीवर


















![Asla – Watan Sahi [Official MV] Latest Punjabi Song – K Million Music Asla – Watan Sahi [Official MV] Latest Punjabi Song – K Million Music](https://i.ytimg.com/vi/sCuLojys0n4/maxresdefault.jpg)







