नई दिल्ली11 मिनट पहले
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CJI ने ऑक्सफर्ड में समाज में निर्णायकों की मानवीय भूमिका विषय पर अपनी बात रखी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा- चुनाव भारत के संवैधानिक लोकतंत्र का मूल आधार है। भारत में जज किसी चुनाव में इलेक्ट नहीं होते हैं। वहां जज सिस्टम की रक्षा करने वाले संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की भावना को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम में CJI से पूछा गया कि फैसला सुनाते समय उन पर कितना पॉलिटिकल और सोशल प्रेशर होता है। इसके जवाब में उन्होंने कहा- न्यायाधीश के रूप में मेरे 24 सालों के कार्यकाल में मुझे कभी भी पॉलिटकल प्रेशर का सामना नहीं करना पड़ा।
हमारा जीवन सरकार की पॉलिटिकल ब्रांच से बिल्कुल अलग है। हम नेताओं से अलग जीवन जीते हैं, लेकिन किसी भी जज को अपने फैसलों के पॉलिटिक्स पर पड़ने वाले असर से परिचित होना चाहिए। इसे पॉलिटिकल प्रेशर नहीं कहा जाता है। इसे किसी फैसले के असर की समझ कहा जाता है।
सेम सेक्स मैरिज के फैसले पर कहा- मैं अल्पमत में था
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने से इनकार किया था। स्पेशल मैरिज एक्ट में बदलाव न करने के फैसले को लेकर CJI ने कहा- मैं यहां फैसले का बचाव करने के लिए नहीं आया हूं। मेरा मानना है कि जजों द्वारा सुनाया गया फैसला वैश्विक मानवता की संपत्ति बन जाता है।
स्पेशल मैरिज एक्ट संसद से पारित किया गया एक कानून था। 5 जजों की संवैधानिक बेंच थी। मैं अल्पमत में था, लेकिन बेंच के 3 जज मुझसे सहमत नहीं थे, क्योंकि उनका मानना था कि सेम-सेक्स मैरिज को मान्यता देना ज्यूडिशयरी के अधिकार क्षेत्र के बाहर है।
कोर्ट लगातार संवाद की प्रोसेस में विश्वास रखता है। कोर्ट मुकदमा करने वाले पक्षों के साथ और नागरिकों और समाज के साथ लगातार संवाद किया है। अहम संवैधानिक मामलों को लाइवस्ट्रीम करने के उनके फैसले पर डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा हमें न्याय की प्रक्रिया और कानून के प्रशासन को लोगों के घरों और दिलों तक ले जाने की जरूरत है।
CJI बोले- हमें टेक्नोलॉजी के उपयोग को समझना होगा
CJI चंद्रचूड़ ने कहा टोक्नोलॉजी और AI पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह अहम है कि हम न्याय के मानवीय तंत्र को सुनिश्चित करने के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग को समझे। हमें इसकी पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट्स को भी समझना होगा।
फ्यूचर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत उपयोगी हो सकता है। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हम AI को नैतिक तरीके से कंट्रोल कर सकें। हमें ध्यान रखना होगा कि हम कम्युनिकेशन प्रोसेस को जज से रोबोट में शिफ्ट न करें।
CJI बोले- हमें तय करना होगा की हमारे अधिकार क्षेत्र में क्या है
आधुनिक लोकतंत्र में लोगों को और समाज को अपने आप ही बहुत करना पड़ता है। किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए लोग कोर्ट की तरफ नहीं देख सकते हैं। जजों के रूप में हम एक लाइन निर्धारित करनी होगी। हमें तय करना होगा कि नैतिक रूप से हमारे अधिकार क्षेत्र में क्या आता है।
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