चंडीगढ़। गृह मंत्रालय में दाखिल आरटीआई आवेदन करीब 10 साल तक लंबित रहा और जब इसका निस्तारण हुआ तो जवाब ही नहीं मिला। चंडीगढ़ प्रशासन की एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य और एडवोकेट अजय जग्गा ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को पत्र भेजकर मामले की जांच और मंत्रालय की आरटीआई व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
जग्गा के मुताबिक, उनका आरटीआई आवेदन 21 जुलाई 2016 को गृह मंत्रालय को प्राप्त हुआ था। आधिकारिक आरटीआई स्टेटस पोर्टल पर इसकी कार्रवाई की तारीख अब 20 अगस्त 2026 और स्थिति रिक्वेस्ट डिस्पोज्ड ऑफ दिखाई दे रही है। जवाब के कॉलम में सूटेबली रिप्लाइड लिखा है लेकिन उनके अनुसार कोई जवाब संलग्न नहीं है।
जग्गा ने गृह सचिव को भेजे पत्र में कहा कि जुलाई 2016 में दाखिल आवेदन का अगस्त 2026 में निस्तारण होना करीब एक दशक का असाधारण विलंब है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सूचना देने के उद्देश्य से बनाया गया है। ऐसे में इतने लंबे समय तक आवेदन लंबित रहना आरटीआई व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
30 दिन की समयसीमा का हवाला
जग्गा ने आरटीआई अधिनियम की धारा 7(1) का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर निर्णय की सूचना आवेदक को दी जानी होती है। उनके अनुसार, इस मामले में निर्धारित अवधि और वास्तविक निस्तारण के बीच करीब 10 वर्ष का अंतर है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
उन्होंने गृह मंत्रालय से यह पता लगाने की मांग की है कि आवेदन इतने लंबे समय तक किस स्तर पर और किन कारणों से लंबित रहा। साथ ही आवेदन की निगरानी, स्थानांतरण, फाइलों की आवाजाही और संबंधित केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी व अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी में हुई संभावित चूक की जांच की मांग की है। जग्गा ने मंत्रालय में स्वचालित निगरानी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है जिसमें आवेदन की समयसीमा पूरी होने से पहले संबंधित अधिकारियों को अलर्ट मिले और वरिष्ठ स्तर पर लंबित मामलों की निगरानी हो।










![JMA – Ninja & Deep Jandu [Official MV] Kaptaan JMA – Ninja & Deep Jandu [Official MV] Kaptaan](https://i.ytimg.com/vi/-dsfIh319s0/maxresdefault.jpg)











