फर्जी दस्तावेजों से नौकरी लगने का मामला :
अब पानीपत और गोहाना शुगर मिल के एमडी की कमेटी करेगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शाहाबाद शुगर मिल में सहायक इंजीनियर रहे और वर्तमान में पंचकूला शुगरफेड में डिप्टी टेक्नीकल एडवाइजर के पद पर तैनात यशवीर सिंह के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के मामले में रिटायर्ड सेशन जज द्वारा की गई जांच को दरकिनार करते हुए शुगरफेड ने मामले में नए सिरे से जांच कमेटी गठित की है। अब पानीपत शुगर मिल और गोहाना शुगर मिल के एमडी की कमेटी इस मामले की जांच करेगी। उधर, शिकायतकर्ता ने इस इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मामले में लीपापोती की कोशिश की जा रही है। यशवीर सिंह के खिलाफ शुगरफेड को शिकायतें मिली थी। शिकायत के आधार पर जुलाई माह में मामले की जांच रिटायर्ड जज आरपी भसीन को सौंपी गई थी। सितंबर में जांच रिपोर्ट आई थी। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में लिखा है कि यशवीर ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, ऐसे में उनकी नियुक्ति सही नहीं है और पदोन्नति भी कानूनन अवैध है। इसलिए आरोपी के खिलाफ धारा 1860 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद शाहाबाद शुगर मिल के एमडी ने आगामी कार्यवाही को लेकर शुगरफेड से सलाह मांगी थी।
तर्क : रिपोर्ट में साफ नहीं कौन से दस्तावेज फर्जी
रिपोर्ट के बाद शुगरफेड ने इस मामले में नए सिरे से जांच कमेटी गठित कर दी। शुगरफेड के एमडी ने कहा कि रिटायर्ड सेशन जज की रिपोर्ट से यह साफ नहीं होता कि कौन से दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, शैक्षणिक या अनुुभव के। इसलिए इस मामले में नए सिरे से जांच की जरूरत है। गौरतलब है कि शाहाबाद शुगर मिल की ओर से 2012 में सहायक इंजीनियर पद पर विज्ञापन जारी किया था। शिकायतकर्ता संदीप सिंह का कहना है कि शर्तों के अनुसार, उनकी योग्यता मास्टर डिग्री थी, जबकि यशवीर सिंह के पास बीटेक की डिग्री थी। तत्कालीन अधिकारियों ने मैरिट को दरकिनार करके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यशवीर सिंह को नौकरी दे दी।





























