चंडीगढ़। अब बुजुर्गों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। जीएमसीएच-32 में विकसित चंडीगढ़ मॉडल में युवा ही बुजुर्गों के डिजिटल मेंटर बनकर उन्हें आभा आईडी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और ई-संजीवनी जैसी सेवाओं का इस्तेमाल सिखा रहे हैं। इस मॉडल को उत्तर भारत में विस्तार देने पर मंगलवार को आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में मंथन हुआ।
जीएमसीएच-32 के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने आईसीएमआर के सहयोग से यह अंतर-पीढ़ी पहल शुरू की है। विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिया पुरी के नेतृत्व में चल रहे मॉडल का उद्देश्य तकनीक सिखाने के साथ बुजुर्गों का डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना है। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मॉडल के विस्तार, स्थायित्व और क्रियान्वयन पर चर्चा की।
स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी-शिक्षक, एनजीओ, रोटरी क्लब, सेवानिवृत्त बैंकर्स और सामुदायिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। साइबर क्राइम शाखा ने बुजुर्गों को फिशिंग, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।कार्यक्रम में डिजिटल लिटरेसी वेबसाइट, प्रोजेक्ट फिल्म और टूलकिट का अनावरण भी किया गया। विशेषज्ञों ने इसे स्वस्थ वृद्धावस्था और डिजिटल समावेशन के लिए दोहराए जा सकने वाले सामुदायिक मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।





















