चंडीगढ़। अब तक चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट स्थापित नहीं किए जाने के मुद्दे पर 40 पद मंजूर करने की खंडपीठ को हाईकोर्ट ने जानकारी दी है। पीपल वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका पर जवाब में बताया गया कि इनमें 2 पद न्यायिक अधिकारियों के होंगे और बाकी अन्य स्टाफ। हाईकोर्ट के लिटिगेशन सेल की मंजूरी के बाद अब यूटी प्रशासन का इसे अधिसूचित करना बाकी है।
याचिका में कहा गया था कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पारिवारिक विवादों के शीघ्र एवं संवेदनशील निपटारे के लिए फैमिली कोर्ट स्थापित हैं, लेकिन चंडीगढ़ में आज तक अलग फैमिली कोर्ट का गठन नहीं किया गया। इसके कारण तलाक, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा, वैवाहिक विवाद और अन्य पारिवारिक मामलों में पक्षकारों को सामान्य अदालतों में लंबा इंतजार करना पड़ता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 का उद्देश्य पारिवारिक विवादों का सौहार्दपूर्ण और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। अलग फैमिली कोर्ट होने से मामलों की सुनवाई अधिक संवेदनशील वातावरण में होती है और लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। इसके बावजूद चंडीगढ़ में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में जवाब दाखिल कर दिया है लेकिन अभी यूटी प्रशासन का जवाब आना बाकी है।