एडवोकेट की तरफ से जारी की गई सीसीटीवी फुटेज, इसी में उनका पड़ोसी दिख रहा है।
चंडीगढ़ के एक एडवोकेट ने पुलिस को एप्लिकेशन देकर पड़ोसी की पिटाई की इजाजत मांगी है। पुलिस के अलावा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, गृह सचिव, DGP, SSP और बार काउंसिल चेयरमैन को भी यह एप्लिकेशन भेजी गई है।
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एडवोकेट का कहना है कि पड़ोसी ने जानबूझकर उनकी नई थार पर खरोंचें मारकर उनका 1 लाख रुपए का नुकसान किया है। इस बारे में उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।
एडवोकेट ने यह भी तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता यानी BNS के तहत उन्हें अधिकार प्राप्त है कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो वह सार्वजनिक रूप से व्यक्ति की पिटाई कर सकते हैं।
हालांकि सेक्टर 34 पुलिस ने इस तरह की शिकायत मिलने से इनकार किया है लेकिन अधिकारी अभी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं है।

सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति दूसरे हाथ कुछ छिपाकर जाता हुआ दिख रहा है।
सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला…
- पड़ोसी ने थार पर खरोंचें मारीं, 1 लाख का नुकसान हुआ: धर्मेंद्र सिंह रावत पेशे से एडवोकेट हैं और चंडीगढ़ के सेक्टर 44B में रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोसी ने ईर्ष्या की वजह से उनकी नई थार गाड़ी (नंबर CH 01 CY 2894) पर तेजधार वस्तु से कई बार खरोंचें डालीं, जिससे उन्हें एक लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।
- CCTV में दिखा आरोपी, फुटेज समेत शिकायत की, FIR नहीं हुई: धर्मेंद्र रावत ने आगे बताया कि जब उन्होंने सीसीटीवी फुटेज चेक की तो उसमें आरोपी स्पष्ट नजर आ रहा है। इसके बाद उन्होंने इस फुटेज के साथ इसकी शिकायत एसएसपी चंडीगढ़, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
- एडवोकेट बोले- BNS में मुझे पिटाई का अधिकार: रावत ने पत्र आरोप लगाया कि जब पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती, तो नागरिक को ‘भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS)’ की धारा 35(b) के तहत अपने शरीर और संपत्ति की रक्षा का अधिकार है। इसी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया, तो वे कानून के तहत “सार्वजनिक रूप से थप्पड़ या मारने” के लिए बाध्य होंगे।
- पिटाई से पहले पुलिस-मीडिया को भी बताऊंगा: धर्मेंद्र रावत ने कहा कि आरोपी की पिटाई या थप्पड़ मारने से पहले वह पुलिस, उच्चाधिकारियों और मीडिया को औपचारिक रूप से सूचना देंगे, ताकि उनके खिलाफ कोई गलत धारणा न बने। वह सिर्फ कानूनी तौर पर मिले अधिकार का ही इस्तेमाल करेंगे।
एडवोकेट बोले- पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी की एडवोकेट रावत ने पुलिस अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2013) फैसले की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस फैसले में साफ कहा गया है कि जब भी कोई गंभीर अपराध हो, तो पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना जरूरी है।





















