
तुलसीदास लाइब्रेरी।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कनाडा के मॉन्ट्रियल की लाइब्रेरी की तर्ज पर पीजीआई को नई लाइब्रेरी की सौगात जल्द मिलने जा रही है। लाइब्रेरी में जहां किताबों के रख-रखाव की बेहतर व्यवस्था होगी, वहीं कमरों को तापमान के अनुकूल बनाया जाएगा ताकि किताबों को नुकसान से बचाया जा सके। पीजीआई की तुलसीदास लाइब्रेरी को म्यूजियम की तरह विकसित किया जाएगा। इतना ही नहीं, पीजीआई के पूर्व विशेषज्ञों के हस्तलिखित शोध पत्रों को भी यहां प्रदर्शित किया जाएगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार यहां लाइब्रेरी कम म्यूजियम की सुविधा दी जाएगी, जो संस्थान के इतिहास को भी दर्शाएगा।
पीजीआई के फैकेल्टी लाइब्रेरी प्रभारी प्रो. एसएस राणा का कहना है कि संस्थान में बहुत सारी पुरानी पत्रिकाए हैं, जो ऐतिहासिक हैं। उन्हें संग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन अभिलेखागारों में 1960 के दशक के पूर्व निदेशकों के प्रकाशन और उनके हाथ से लिखे गए नोट्स भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वे कनाडा की मॉन्ट्रियल लाइब्रेरी में गए हैं, जिसमें पुरानी पत्रिकाओं/ग्रंथों के स्टोरेज के लिए उपयुक्त तापमान वाले अच्छी तरह से डिजाइन किए कमरे हैं। जहां वे पिछली दो शताब्दियों से संरक्षित हैं। वहां स्क्रब सूट, चप्पल और मास्क पहनकर प्रवेश करना होता है। उसी तर्ज पर पीजीआई की लाइब्रेरी में भी ऐसी व्यवस्था बहाल की जाएगी। इसके लिए तैयार प्रस्ताव को पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मंजूरी दे दी है।
विकास कार्य तेजी पर
प्रो. राणा ने बताया कि लाइब्रेरी के डिजिटलीकरण के अलावा, वाचनालय में सेंसर आधारित लाइटें लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही पूर्व संकाय के लिए एक साउंड प्रूफ चर्चा कक्ष है, जहां वे छात्रों के साथ बैठकर चर्चा करते हैं। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी प्रबंधन के कुछ तरीके आईआईएम अहमदाबाद से भी अपनाए हैं, जो एक प्रमुख लाइब्रेरी मानी जाती है।












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