
पीजीआई पहुंचे अंगदाता के परिजन।
– फोटो : अमर उजाला
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किसी अजनबी के जीवन को बचाने के लिए अपने प्रिय के अंग को दान करने वालों का बलिदान अतुल्य है। पीजीआई के नर्सिंग इंस्टीट्यूट सभागार में तब एक बेहद भावुक नजारा देखने को मिला, जब अपनों के अंगों से जीवन पाने वाले अजनबियों को अंगदाता परिवार के सदस्यों ने देखा।
किसी के अपने का दिल लेने वाला कोई अजनबी उनके सामने हंस-बोल रहा था, तो किसी के प्रियजन की आंखें किसी दूसरे की जिंदगी में रोशनी बिखेर रही थीं। अपनों को खोने के बाद उनके अंगों से जीवनदान पाने वालों को सामने देखकर उन परिजनों की आंखें छलक पड़ीं। अंगदाता परिवार जहां अपने प्रिय को याद कर भावुक हुए, वहीं अंग प्राप्त करने वालों ने उन्हें दिल से धन्यवाद दिया जिनकी बदौलत उन्हें नया जीवन मिला।
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बेटी तो बच पाई नहीं, दूसरे को दिया जीवनदान
मेरी बेटी कॉलेज जाते समय सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई। पीजीआई लाने पर उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। उस वक्त एक बात तो समझ में आ गई थी कि अब मेरी बेटी तो जिंदा होगी नहीं, इसलिए दूसरे की जिंदगी बचाने का निर्णय लेना उस वक्त सही लगा। -अंगदाता अमरजोत कौर के पिता, अंबाला सिटी
भाई ने बचाई चार जिंदगी
22 साल का मेरा भाई अमनदीप सिंह सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। मेरे बुजुर्ग माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं था कि इस उम्र में बेटे के खोने का गम झेलना होगा। उस वक्त पीजीआई में इलाज के दौरान जब डॉक्टरों ने भाई के अंगदान की बात कही तो हम सभी स्तब्ध रह गए। लेकिन फिर उन लोगों का ख्याल आया जो मेरे भाई के अंगों से नया जीवन पा सकते थे, इसलिए हम सभी ने मिलकर भाई के अंगदान का निर्णय लिया। -अंगदाता मनप्रीत सिंह के परिजन, हिमाचल प्रदेश
एक झटके में बिखर गए सारे सपने
हम तो अपने छोटे बेटे मनप्रीत के साथ ही रहते थे। उसे लेकर न जाने कितने सपने सजाए थे। लेकिन अचानक एक ही झटके में सब कुछ तहस-नहस हो गया। एक दुर्घटना ने मेरे बच्चे को हमसे छीन लिया। पीजीआई में इलाज के दौरान जब पता चला कि अब मेरा बेटा नहीं बच सकता तब ऐसा लगा सबकुछ खत्म हो गया है। उसी बीच अंगदान की बात बताई गई। हम तैयार हो गए क्योंकि अपने को खोने का दर्द हमसे बेहतर कोई और नहीं समझ सकता है। -अंगदाता अमनदीप सिंह के परिजन, पंजाब
अंगदान से इन्हें मिला जीवनदान
कोविड के समय पता चला कि मेरा दिल खराब हो गया है। उस स्थिति में इलाज के बारे में सोचकर डर लग रहा था। मैं खेल और जीम का शौकीन था। दिल खराब होने का कारण समझ नहीं आया। पीजीआई में इलाज शुरू कराया। हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए पीजीआई में पंजीकृत हुआ। एक साल बाद मुझे हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। मेरा एक साल का बेटा भी है। अब मैं पूरी तरह से सामान्य जीवन जी रहा हूं। मैं और मेरा परिवार अंगदाता परिवार के लिए दिल से आभार व्यक्त करते हैं। -दीपक राय, बठिंडा
ढाई साल की उम्र में मुझे टाइप 1 डायबिटीज हुआ। 18 साल की उम्र में किडनी फेल हो गया। तीन साल 7 महीने तक हफ्ते में तीन बार डायलिसिस हुआ। 4 सितंबर 2023 को मेरा किडनी और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट हुआ। मैं बचपन से खेलकूद में रुचि रखता था, लेकिन ज्यादा खेल नहीं पाता था। ज्यादा समय घर में रहने के कारण मैं पढ़ाई करता रहता था। इस कारण वकालत के पहले सेमेस्टर में पीयू में मुझे गोल्ड मेडल मिला। ट्रांसप्लांट के बाद एक दिन में चार बार लेने वाले इंसुलिन को बंद कर दिया गया है। डायलिसिस बंद हो गया है। मैं अब सामान्य जीवन जी रहा हूं। -निदिश नादन, जीरकपुर
2012 में मेरी किडनी फेल हो गई। डॉक्टरों ने डायलिसिस करने की बात कही, लेकिन उससे पहले ही मेरे घर में ही मेरा अंगदाता मिल गया। बहन आशा ने किडनी दी। इतना ही नहीं मेरी बहन को ऐसा पति मिला जिन्हें उनकी बहन ने अपनी किडनी दी थी। इसलिए हमारी नजर में अंगदाता का सम्मान बहुत ज्यादा है। जहां तक अंगदान की बात है तो इससे किसी को जीवनदान मिल सकता है। अंगदान से मेरी जिंदगी बदल गई। खिलाड़ी होने के नाते मैं अंगदान के बाद भी लगातार खेल रहा हूं। ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में अप्रैल 2023 में आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम में भाला फेंक में मैंने पहला स्थान हासिल किया। वहीं जीजा अभिनव ने भी वहां बैडमिंटन में कांस्य पद जीता। -हीरा सिंह दास्पा, चंडीगढ़












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