25 मिनट पहले
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सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग में बोलते हुए भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान।
CDS जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर कहा कि अब भारत बिना किसी रणनीति के कोई काम नहीं करता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध कायम रखने का दौर खत्म हो चुका है।
शांगरी-ला डायलॉग कार्यक्रम में CDS चौहान ने याद दिलाया कि कैसे पीएम मोदी ने अपने पहले शपथ ग्रहण में पाकिस्तान के तत्कालीन PM नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था। चौहान ने कहा कि तालियां बजाने के लिए दोनों हाथ चाहिए होते हैं, लेकिन अगर बदले में सिर्फ दुश्मनी ही मिले तो दूरी बनाए रखना एक समझदारी भरा फैसला है।
CDS चौहान ने कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी, तब पाकिस्तान सामाजिक विकास, GDP या फिर प्रति व्यक्ति आय जैसे कई मामलों में भारत से आगे था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब भारत, पाकिस्तान से हर मोर्चे पर आगे है। जनरल चौहान ने कहा कि यह बदलाव किसी संयोग की वजह से नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति का नतीजा है।

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान जनरल चौहान ने जापान, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और कई अन्य देशों के रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की।
CDS बोले- जंग में भारत ने खुद की टेक्नोलॉजी पर भरोसा किया CDS जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान ‘भविष्य के युद्ध’ विषय पर बात की। उन्होंने कहा कि अब युद्ध पहले जैसे नहीं रह गए हैं। अब युद्ध जमीन, हवा, समुद्र के अलावा साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों में भी लड़े जा रहे हैं।
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत ने इस दौरान अपनी स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया। उन्होंने खासतौर पर ‘आकाश’ मिसाइल सिस्टम और देश में बना वायु रक्षा नेटवर्क का जिक्र किया, जिसमें कई रडार सिस्टम को जोड़कर एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया। भारत ने यह सब विदेशी कंपनियों पर निर्भर हुए बिना किया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भले ही चीनी या पश्चिमी सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया हो, लेकिन भारत ने खुद की टेक्नोलॉजी पर भरोसा किया। भारत ने युद्ध के लिए जरूरी नेटवर्क और रडार प्रणाली को खुद से खड़ा किया और यह हमारी बड़ी कामयाबी रही।

सिंगापुर में आयोजित IISS शांगरी-ला वार्ता 2025 में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान (बाएं) एक यूरोपीय अधिकारी से बातचीत के दौरान।
‘युद्ध में गलत जानकारी और अफवाहें बड़ी चुनौती’
CDS चौहान ने कहा कि युद्ध में आजकल एक और चुनौती है- गलत जानकारी और अफवाहें। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी हमारे सैनिकों को काफी समय फर्जी खबरों का मुकाबला करने में देना पड़ा। उन्होंने बताया कि भारत की रणनीति यह रही कि बिना जल्दबाजी किए, पक्के तथ्यों के साथ अपनी बात रखी जाए।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के शुरुआती दिनों में दो महिला अफसर मीडिया से बात कर रही थीं क्योंकि उस वक्त सीनियर अफसर वास्तविक ऑपरेशन में व्यस्त थे।
साइबर युद्ध पर भी उन्होंने कहा कि भले ही दोनों देशों ने एक-दूसरे पर साइबर हमले किए हों, लेकिन भारत की सैन्य प्रणालियां इंटरनेट से जुड़ी नहीं होतीं, इसलिए वो सुरक्षित रहीं।
उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद भारत तुरंत पीछे हट गया, क्योंकि लंबे समय तक सेना को तैनात रखना आर्थिक रूप से भारी पड़ता है और इससे विकास प्रभावित होता है।

अमेरिका बोला- एशिया का संतुलन बिगाड़ने की तैयारी कर रहा चीन
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर चीन ने जबरदस्ती ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश की, तो इसका असर इंडो-पैसेफिक क्षेत्र और पूरी दुनिया पर पर बहुत बुरा होगा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हेगसेथ ने सिंगापुर में चल रही शांगरी-ला डायलॉग में कहा कि चीन एशिया में ताकत का संतुलन बिगाड़ने की तैयारी कर रहा है।
रक्षा मंत्री ने चीन पर साइबर हमलों, अपने पड़ोसियों को डराने और दक्षिण चीन सागर में अवैध कब्जा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। हेगसेथ ने ये भी कहा कि चीन लगातार ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास कर रहा है, जो किसी बड़े हमले की तैयारी लगती है।
हेगसेथ ने कहा कि चीन का खतरा असली है और ये कभी भी सामने आ सकता है। उन्होंने दावा किया कि चीन का मकसद 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने का है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन की आक्रामकता का मिलकर मुकाबला करेंगे।
इस साल होने वाले शांगरी-लॉ डायलॉग का उद्घाटन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किया।
अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- हम यहां लंबे समय के लिए आए हैं
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन चीन को रोकने के लिए व्यापार और रक्षा दोनों मोर्चों पर काम कर रहा है। हेगसेथ ने कहा-

हम इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा चाहते हैं और हम यहां लंबे समय तक बने रहने के लिए आए हैं।

हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका अपने इंडो-पैसेफिक सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है और उनकी मदद से अमेरिका इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा और खुशहाली एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ट्रम्प यूरोप के देशों को अपनी सुरक्षा के लिए ज्यादा जिम्मेदारी लेने को कह रहे हैं, जिससे अमेरिका इंडो-पैसेफिक पर ज्यादा संसाधन लगा सके। इससे अमेरिका की मजबूत मौजूदगी से सभी को फायदा मिलेगा, लेकिन ये तभी होगा जब सभी सहयोगी देश भी मजबूत होंगे।
उन्होंने ये भी याद दिलाया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के कार्यकाल में चीन ने ताइवान पर हमला नहीं किया, और ट्रम्प का मकसद भी यही है कि युद्ध न हो।

मैक्रों ने रूस-चीन पर निशाना साधा
शांगरी-लॉ डायलॉग का उद्घाटन पर अपने भाषण में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोप और एशिया के देशों से अपील की कि वे उन ताकतों के खिलाफ एकजुट हों जो जबरदस्ती और दबाव के जरिये अपने प्रभाव का विस्तार करना चाहती हैं। उन्होंने चीन और रूस का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था।
मैक्रों ने कहा कि कुछ देश दुनिया में ऐसे इलाके बनाना चाहते हैं जहां सिर्फ उन्हीं का दबदबा हो। वे समुद्र, द्वीपों और संसाधनों पर कब्जा करना चाहते हैं और दूसरों को बाहर कर देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ये देश यूरोप के आस-पास से लेकर दक्षिण चीन सागर तक अपना प्रभाव फैलाना चाहते हैं।
मैक्रों ने चेतावनी दी कि अगर रूस को यूक्रेन पर हमला करके उसका हिस्सा हथियाने दिया गया, तो फिर ताइवान या फिलीपींस में ऐसा ही कुछ होने से कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन की जंग को दूर की बात समझना गलत होगा, क्योंकि अगर आज दुनिया रूस को नहीं रोक पाई, तो कल और देश भी यही करने की हिम्मत जुटा लेंगे।

शांगरी-लॉ डायलॉग 2025 का उद्घाटन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किया।
चीन ने नहीं भेजा अपना रक्षामंत्री
इस बार शांगरी-ला डायलॉग में चीन की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 47 देशों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 40 से अधिक मंत्री स्तर के नेता हैं। लेकिन चीन ने इस बार अपने रक्षा मंत्री डोंग जुन को नहीं भेजा। उनकी जगह पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी का एक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया है।
यह 2019 के बाद पहली बार है जब चीन का रक्षा मंत्री इस मंच से गायब रहा। पहले इस समिट में चीन के रक्षा मंत्री आया करते थे।
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