
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व आयकर अधिकारी की याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई सूचना के अधिकार के दायरे में नहीं आती है, वह एक्ट के दूसरे शेड्यूल में है। याचिका दाखिल करते हुए राज कुमार अरोड़ा ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई अधिनियम) के तहत सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए ट्रैप से संबंधित जानकारी मांगी थी।
इस मामले में पटियाला में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था और सजा के खिलाफ उनकी अपील अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। एजेंसी के सूचना अधिकारी ने याचिकाकर्ता को सूचित किया था कि आरटीआई अधिनियम सीबीआई पर लागू नहीं होता है। वैधानिक अपीलों के खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए सूचना उपलब्ध करवाने का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सीबीआई को दूसरी अनुसूची में रखने वाली अधिसूचना की आड़ में सूचना देने से इन्कार कर दिया गया। भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित जानकारी मांगने वाला आरटीआई आवेदन विचारणीय है। केंद्रीय सूचना आयोग के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एक जनहितैषी व्यक्ति नहीं है और उसके द्वारा मांगी गई जानकारी इस कारण से प्रदान नहीं की जा सकती है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची द्वारा मांगी गई जानकारी किसी जनहित का संकेत नहीं देती, यह आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण दुरुपयोग है। इसका उद्देश्य सीबीआई के अधिकारियों को गलत उद्देश्य से परेशान करना है। न्यायालय ने कहा कि सीबीआई को आरटीआई अधिनियम की दूसरी अनुसूची में रखा गया है, इसलिए याची के निवेदन को सही तरीके से खारिज किया गया है।




























