केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की चंडीगढ़ में रफ्तार शुरू होने से पहले ही थम गई है। पहले जहां चंडीगढ़ प्रशासन ने योजना को शुरू करने में 6 महीने की देरी की, वहीं अब पिछले चार महीने से केंद्र सरकार की मंजूरी फाइलों में अटकी हुई है। इस वजह से योजना पर अमल शुरू नहीं हो सका है जिससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का सपना अधूरा पड़ा है।
पीएमएवाई 2.0 की शुरुआत एक सितंबर 2024 से चंडीगढ़ समेत पूरे देश में पांच वर्षों की अवधि के लिए की गई थी लेकिन चंडीगढ़ में इसका क्रियान्वयन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। वजह यह है कि प्रशासन की तरफ से संशोधित समझौता ज्ञापन (एमओए) पर साइन कर केंद्र सरकार को भेजे जाने के बावजूद अब तक मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल पाई है।
सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन ने एमओए पर 28 मार्च 2025 को साइन किए थे और इसे केंद्र के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को भेज दिया गया था लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी मंत्रालय की ओर से इस पर स्वीकृति नहीं आई है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक मंजूरी का इंतजार है। हाल ही में चंडीगढ़ पहुंचे एमएचए के अपर सचिव (यूटी) नितेश कुमार व्यास को भी इसकी जानकारी दी गई थी। अब जैसे ही मंजूरी मिलती है, योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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पहले चरण में 28.45 करोड़ की दी गई सब्सिडी
वर्ष 2016 से 2023 के बीच ब्याज सब्सिडी योजना घटक के तहत कुल 1256 लाभार्थियों को घर मंजूर हुए। इन्हें कुल 28.45 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता बैंकों के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई। ये घर अब तैयार भी हो चुके हैं। वहीं, प्रशासन ने योजना के तीसरे घटक अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम (एआरएचसी) में भी खेल किया। मलोया में पुनर्वास योजना के तहत बनाए गए 4960 स्मॉल फ्लैट्स में से ही 2195 फ्लैटों को एआरएचसी के तहत चिह्नित कर दिया और इनमें से 1997 फ्लैट्स सेक्टर-52 और 56 की कालोनी को तोड़कर वहां के लोगों को 3000 रुपये प्रति माह के किराए पर अलॉट कर दिया।
जमीन महंगी, इसलिए निर्माण नहीं, दी जाती है सब्सिडी
चंडीगढ़ में पीएम आवास योजना का पहला चरण 2016 में लागू हुआ था। अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट को लांच किया गया। तीन इलाकों में कम दाम पर जमीन अधिग्रहण की मंजूरी मांगी गई लेकिन नहीं मिली। मार्केट रेट पर जमीन बहुत ज्यादा महंगी थी। इस बीच योजना के तहत 1.27 लाख आवेदन आ गए। दस्तावेजों की जांच के बाद 10 हजार लोगों को योग्य पाया गया था और इसमें से 444 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया था लेकिन सस्ती जमीन नहीं मिलने पर योजना ठप हो गई। बाद में सभी आवेदनों को बैंकों को ट्रांसफर कर दिया गया था ताकि उन्हें लोन में सब्सिडी दी जा सके।
25 लाख तक के लोन पर चार फीसदी ब्याज की सब्सिडी
पीएमएवाई 2.0 में गरीब, निम्न आय वर्ग (एलआईजी) और मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें चार प्रमुख वर्टिकल हैं। स्वनिधि आधारित निर्माण (बीएलसी), साझेदारी में किफायती आवास (एसएचपी), किफायती किराये पर आवास (एआरएचसी) और ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस/सीएलएसएस)। ईडब्ल्यूएस को 2.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। वहीं 25 लाख तक के होम लोन पर 4 फीसदी ब्याज सब्सिडी भी दी जानी है। आय सीमा के अनुसार ईडब्ल्यूएस (3 लाख), एलआईजी (6 लाख) और एमआईजी (9 लाख) तक के परिवार इस योजना के पात्र हैं।














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