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-अमृतसर 54% व जालंधर के औसत एक्यूआई में आई 45% की गिरावट
-लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ अभी भी सबसे प्रदूषित शहर
-राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम पर प्रगति रिपोर्ट में खुलासा
राजिंद्र शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब में पिछले आठ वर्षों के दौरान अमृतसर और जालंधर ने वायु गुणवत्ता सुधार में सबसे अधिक प्रगति की है। ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र द्वारा जारी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) की रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 2017 में 189 था, जो 2025 तक घटकर 87 हो गया, यानी 54% कमी। इसी तरह, जालंधर का एक्यूआई 178 से घटकर 99 हुआ, यानी 45% की गिरावट दर्ज की गई।
प्रदेश ने एनसीएपी के तहत 2019-2026 के बीच मिले फंड का 88% खर्च किया। इस राशि का सही इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने, निर्माण कार्यों की धूल कम करने, कचरा जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने के साथ-साथ वायु गुणवत्ता निगरानी, हरित क्षेत्र विस्तार और जन जागरूकता अभियान में किया गया।
अन्य शहरों में सुधार और चुनौतियां
पटियाला में एक्यूआई 106 से घटकर 95 और खन्ना में 142 से 90 हुआ। हालांकि लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ अभी भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। लुधियाना का एक्यूआई 168 से 104 (38% कमी) और मंडी गोबिंदगढ़ का 148 से 120 (19% कमी) रहा।
प्रदूषण के मुख्य कारण
कारणों में वाहनों का धुआं, पराली व कचरा जलाना और धूल शामिल हैं। प्रदेश के 136 शहर/नगर अभी भी प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतरे। केंद्र ने 9 शहरों को गैर-प्राप्ति सूची में रखा, जिसमें डेराबस्सी, गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, नया नंगल, पठानकोट, पटियाला और अमृतसर शामिल हैं।
स्वास्थ्य पर असर
जब वायु में पीएम-10 कण बढ़ते हैं, तो सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, और अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार की ठोस कोशिशों के बावजूद कुछ शहरों में प्रदूषण नियंत्रण चुनौती बना हुआ है। यह रिपोर्ट दिखाती है कि योजना और संसाधनों का सही इस्तेमाल वायु गुणवत्ता सुधार में निर्णायक साबित हो सकता है।

























