चंडीगढ़। शहर में अब किसी भी कॉमर्शियल इमारत के निर्माण में चंडीगढ़ ऊर्जा संरक्षण भवन कोड-2024 (सीईसीबीसी) का पालन करना होगा। यूटी प्रशासन ने करीब 17 साल बाद सीईसीबीसी को लागू कर दिया है। यह एक मई 2024 से प्रभावी होगा। चंडीगढ़ ने इसे लागू करने में काफी देर की है क्योंकि पड़ोसी राज्यों समेत देश के लगभग हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने ईसीबीसी को अपना लिया है और हर वर्ष करीब 20 से 30 फीसदी तक बिजली की बचत कर रहे हैं।केंद्र सरकार ने नई कॉमर्शियल इमारतों में ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए 2007 में ईसीबीसी बनाया गया। इस कोड को 2017 में अपडेट किया और अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए थे। चंडीगढ़ में वर्ष 2022 में इस पर काम शुरू हुआ और उपयुक्त संशोधनों का सुझाव देने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने चंडीगढ़ ईसीबीसी कोड का मसौदा तैयार करने और इसे सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित करने और उसके बाद इसे अधिसूचित करने में चंडीगढ़ की सहायता के लिए अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान (एआईआईएलएसजी) को नियुक्त किया। करीब एक साल पहले ईसीबीसी का ड्राफ्ट तैयार कर सुझाव मांगे गए थे। पूर्व सलाहकार धर्मपाल ने भी सुझाव मिलने के बाद सभी अधिकारियों के साथ बैठक की थी और इसे जल्द लागू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, अब जाकर प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से चंडीगढ़ ऊर्जा संरक्षण भवन कोड-2024 की अधिसूचना जारी की गई है।
इन कॉमर्शियल इमारतों पर लागू होंगे कोड
जिस बिल्डिंग का कनेक्टेड लोड 50 किलोवाट या उससे अधिक है या भवन की कॉन्ट्रैक्ट डिमांड 60 केवीए या इससे अधिक है या भवन का प्लॉट क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है या भवन का निर्मित क्षेत्र बेसमेंट को छोड़कर 2000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है। इस दायरे में आने वाली सभी कॉमर्शियल इमारतों पर ये कोड लागू होगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि आवासीय उद्देश्यों के लिए बनाई गई इमारतें इसके अंतर्गत नहीं आती हैं।




























