
Stress
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आमतौर पर बुजुर्ग अवस्था में याददाश्त कमजोर होने संबंधी शिकायत पाई जाती है। लेकिन अब युवाओं में तेजी से बढ़ रहा हाइपरटेंशन उनकी याददाश्त के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।
हाइपरटेंशन की चपेट में आकर युवाओं के दिमाग के न्यूरॉन्स तेजी से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। जिससे उनकी सोचने समझने, याद रखने, कार्य योजना बनाने संबंधित शक्ति कम हो रही है। इस समस्या को विशेषज्ञों ने वैस्कुलर डिमेंशिया का नाम दिया है, जो आमतौर पर बुजुर्ग अवस्था में अल्जाइमर के कारण होने वाली स्थिति है।
पीजीआई के न्यूरोलॉजी की ओपीडी में ऐसे कम उम्र वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिनमें हाइपरटेंशन और शुगर के कारण ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति उन्हें कम उम्र में ही याददाश्त संबंधी कई तरह की समस्या दे रही है।
पीजीआई न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर कार्तिक विनय महेश का कहना है कि सामान्य तौर पर एक महीने में अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया से संबंधित 50 से 60 मरीज आ रहे हैं। उनमें वैस्कुलर डिमेंशिया वाले केसेस 40 से 50% है। जिसमें युवाओं की संख्या ज्यादा होना चिंता की बात है।
प्रो कार्तिक ने बताया कि जरूरी है कि युवा वर्ग इन बीमारियों से बचाव संबंधी मानकों का कड़ाई से पालन करें। नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करने के साथ ही संतुलित आहार ले व धूम्रपान, शराब, नशीली दवाओं का सेवन न करें।





























