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– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तीन कानून लागू होते ही चोरी और मारपीट के मामलों में पुलिस बिना किसी देरी के घटनास्थल पर पहुंची और नए कानूनों के तहत कार्रवाई की। पुलिस ने घटनास्थल पर रिकार्डिंग, क्लाउड सिंकिंग, सर्टिफिकेट जनरेट कर कानूनी सलाहकार से सलाह लेने के बाद नई धाराओं के केस दर्ज किए है।
चोरी के मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 105 के अनुपालन में केस दर्ज किया गया। जबकि मारपीट के मामले में बीएनएसएस की धारा 115(2), 126(2), 190, 191(2), 191(3), 351(2) और 351(3) के तहत औद्योगिक क्षेत्र थाने में दोनों मामले दर्ज किए है।
केस नंबर-एक: चोरी : दरअसल सोमवार सुबह पुलिस को सूचना मिली थी कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक प्लॉट परिसर में काफी सामान चोरी हो गया है। यह सूचना पाते ही संबंधित थाने का जांच अधिकारी (आईओ) तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और मौके का जाजया लिया। जांच अधिकारी ने नए कानूनों के तहत मिले नए टैबलेट पर पहले से इंस्टॉल किए गए ई-साक्ष्य ऐप का उपयोग करके साक्ष्य एकत्र कर इस ऐप में दर्ज किए। यह प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 105 के अनुपालन में की गई। इसके अलावा नए कानूनों के मुताबिक जांच अधिकारी ने अपराध स्थल की रिकॉर्डिंग के तहत घटनास्थल पर ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से दस्तावेजीकरण किया। अगले पड़ाव में पुलिस ने क्लाउड सिंकिंग के तहत कैप्चर किए गए वीडियो को क्लाउड से सिंक किया गया और सिंक किए गए साक्ष्य की एसआईडी (सेशन आईडी) केस डायरी में दर्ज की गई।
प्रमाण पत्र तैयार करना: भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63(4) के तहत एक प्रमाण पत्र ऐप द्वारा स्वचालित रूप से तैयार किया गया, जिससे कस्टडी की चेन सुनिश्चित हुई।
एफआईआर पंजीकरण: एफआईआर संख्या 72/2024 पीएस औद्योगिक क्षेत्र, उप-मंडल पूर्व में बीएनएसएस की धारा 305 और 331(4) के तहत सीसीटीएनएस प्लेटफॉर्म पर शाम 5:29 बजे दर्ज की गई।
विशेषज्ञ की भागीदारी: बीएनएसएस की धारा 176(3) का अनुपालन करने के लिए सीएफएसएल विशेषज्ञ को मौके पर जाने का अनुरोध किया गया।
काम्यूनिकेशन: एफआईआर की एक प्रति शिकायतकर्ता के साथ सांझा की गई। यह नए कानूनों के तहत सबसे पहले एफआईआर है।
केस नंबर-दो: मारपीट और धमकी
दूसरे मामले में पुलिस को जीएमसीएच-32 में से घायल व्यक्ति के बारे में इंडस्ट्रियल एरिया थाने में एक रुक्का प्राप्त हुआ। रूक्का मिलने के कुछ देर बाद ही थाने का जांच अधिकरी अस्पताल में पहुंचा और नियमानुसार वहां उपचाराधीन घायल व्यक्ति के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक 5-6 अज्ञात युवकों द्वारा उसे बीच रास्ते में रोककर उसके साथ मारपीट की गई और उसे जान से मारने की धमकी भी दी। इस दौरान उसे कई जगह चोटें आई और परिजनों द्वारा उसे सेक्टर-32 अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इसके बाद पुलिस ने तीन कानूनों के नियमानुसार आगामी कार्रवाई शुरू कर दी।
बयान दर्ज करना: घायल व्यक्ति का बयान अस्पताल में दर्ज किया गया।
अपराध स्थल का दस्तावेजीकरण: आई.ओ. ने चंडीगढ़ के सेक्टर 30 में अपराध स्थल का दौरा किया और ई-साक्ष्य ऐप का उपयोग करके इसका दस्तावेजीकरण किया।
साक्ष्य संग्रह: खून के धब्बे जब्त किए गए और धारा 105 बी.एन.एस.एस. के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए, ऐप का उपयोग करके प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई।
क्लाउड सिंकिंग: वीडियो को क्लाउड से सिंक किया गया और एस.आई.डी. को केस डायरी में दर्ज किया गया।
प्रमाण पत्र निर्माण: भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63(4) के तहत प्रमाण पत्र स्वतः ही तैयार हो गया।
एफआईआर पंजीकरण: एफआईआर संख्या 73/2024 को सीसीटीएनएस प्लेटफॉर्म पर बीएनएसएस की धारा 115(2), 126(2), 190, 191(2), 191(3), 351(2) और 351(3) के तहत पीएस औद्योगिक क्षेत्र, उप-मंडल पूर्व में पंजीकृत किया गया।
काम्यूनिकेशन: एफआईआर की एक प्रति शिकायतकर्ता के साथ सांझा की गई।
हेल्पलाइन नंबर पर फोन करते ही मिलेगी तीन कानूनों की जानकारी
यूटी पुलिस की ओर से तीन कानूनों के तहत एक अलग से कंट्रोल रूम भी बनाया है। यह कानून लागू होने के बाद पहली स्टेज पर इन्हें लागू करने में अभी तकनीकी दिक्कतें आ सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार की तकनीकी दिक्कतों का दूर करने के लिए विशेष तौर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है जिसमें 24*7 हर समय टेक्नीशियन तैनात रहेंगे। इसके लिए पुलिस की ओर से बाकायदा कंप्यूटर सेक्शन के हेल्पलाइन नंबर 172-2740708 और मोबाइल नंबर 7889114112 नंबर जारी किए गए है। इसके अलावा कोई जरूरत पड़ने पर सेक्टर-9 पुलिस मुख्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है। बाकायदा इसके लिए यूटी के सभी थाने-चौकी सहित एनआईसी, कंप्यूटर सेक्शन और सभी एसडीपीओ को भी इसकी जानकारी दे दी गई है।
डीजीपी ने तीन कानूनों को किया लांच
आपराधिक न्याय प्रणाली में परिवर्तन लाने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए हैं। इसी कड़ी में सेक्टर-17 स्थित पुलिस स्टेशन में एक विशेष जागरूकता सत्र के साथ तीन नए आपराधिक कानूनों को लांच करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की। जबकि इस दौरान पुलिस महानिदेशक सुरेंद्र सिंह यादव, आईजी राज कुमार सिंह, एसएसपी कंवरदीप कौश्र, एसएसपी ट्रैफिक सुमेर प्रताप सिंह, एसपी मुख्यालय केतन बंसल और एसपी क्राइम मृदुल सहित उपायुक्त विनय प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम मं पुलिस द्वारा तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी गई। डीजीपी ने बताया कि सभी एसडीपीओ, एसएचओ, यूनिट इंचार्ज, आईओ और सीसीटीएनएस ऑपरेटरों को पहले ही नए कानूनों, ई-साक्ष्य एप्लिकेशन के उपयोग, नए कानूनों के कार्यान्वयन के संबंध में एसओपी/सर्कुलर पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशासक राजीव वर्मा ने जांच अधिकारियों को नए टैब सौंपे। बाकायदा डीजीपी ने लोगों को जागरूक करने के लिए एक गाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
नए कानूनों के तहत चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल थाने में चोरी और मारपीट से संबंधित दो मामले बीएनएस की धाराओं के तहत दर्ज किए गए है। दोनों मामलों में नए कानूनों के तहत नियमों का ध्यान रखते हुए ई-साक्ष्य पर भी सारे दस्तावेज सहित वीडियो भी अपलोड की गई। मामले में नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। -कंवरदीप कौर, एसएसपी, चंडीगढ़।














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