53 मिनट पहले
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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने मंगलवार को तीन दिन में दूसरी बार ईरान पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े सैन्य ठिकानों पर किए गए। एक घर पर हमला होने से दो लोगों की मौत हो गई, जहां शादी हो रही थी।
अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की ओर से जहाजों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के जवाब में की गई है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास, चाबहार और केश्म द्वीप पर हमले किए गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान पर हमले बड़े और शक्तिशाली थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमले का बदला लिया तो अमेरिका और ज्यादा कड़ा हमला करेगा।
रविवार को भी अमेरिका ने किया हमला
अमेरिका और ईरान के बीच नया तनाव रविवार से शुरू हुआ। अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना था कि ईरान की IRGC होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थी।
ईरान ने हमले में लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही। हालांकि, संख्या नहीं बताई। ईरान ने हमले को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए जवाब देने की धमकी दी।
ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की IRGC ने जॉर्डन और UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने 8 ईरानी मिसाइलें रोक दीं।
UAE ने भी एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने की बात कही। इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या बड़े नुकसान की तुरंत पुष्टि नहीं हुई।
एक महीने बाद फिर बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने से सैन्य कार्रवाई कम थी। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश भी चल रही थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा को लेकर विवाद फिर बढ़ गया।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम है?
होर्मुज स्ट्रेट से खाड़ी देशों का तेल और गैस दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है। इसलिए यहां संघर्ष बढ़ने से पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी हमलों के बाद तेल बाजार में भी चिंता बढ़ी है। तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर ऊर्जा सप्लाई भी घट सकती है।
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