उत्तर प्रदेश के रुहेलखंड क्षेत्र में आने वाला शाहजहांपुर खेती-किसानी के साथ अपनी राजनीतिक पहचान के लिए भी जाना जाता है. गेहूं, धान और गन्ने की खेती यहां की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है. वहीं, काकोरी कांड के अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की जन्मस्थली और कर्मभूमि होने के कारण जिले का ऐतिहासिक महत्व भी है. हनुमत धाम यहां की नई पहचान बनकर उभरा है.
शाहजहांपुर की राजनीति में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार खन्ना का खास स्थान है. वह लगातार नौ बार विधानसभा पहुंच चुके हैं. दूसरी ओर, जितिन प्रसाद का राजनीतिक परिवार भी जिले की सियासत में लंबे समय से प्रभाव रखता है. जिले की छह विधानसभा सीटों पर अलग-अलग दलों की ताकत और स्थानीय नेताओं का प्रभाव चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाता है.
बरेली से अलग होकर बना जिला
शाहजहांपुर की स्थापना 1813 में हुई थी. इससे पहले यह बरेली जिले का हिस्सा था. इसकी सीमाएं लखीमपुर खीरी, हरदोई, फर्रुखाबाद, बरेली, बदायूं और पीलीभीत से लगती हैं. गर्रा और खनौत नदियों के बीच बसा यह शहर समय के साथ फैलता गया. साल 2018 में महानगर बनने के बाद इसके शहरी विस्तार को नई दिशा मिली. जिले की पहचान मुख्य रूप से कृषि से जुड़ी है. यहां गेहूं, धान और गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है. खेती के साथ-साथ शाहजहांपुर का नाम स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भी दर्ज है. काकोरी कांड से जुड़े तीन प्रमुख क्रांतिकारियों का इस जिले से संबंध रहा है. शहर में स्थित हनुमत धाम भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
सुरेश खन्ना का मजबूत सियासी आधार
शाहजहांपुर विधानसभा सीट पर सुरेश कुमार खन्ना का लंबे समय से दबदबा रहा है. वह 1989 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद लगातार विधानसभा पहुंचते रहे. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने सपा के तनवीर खां को 9,313 वोटों से हराया. इस चुनाव में खन्ना को 1,09,942 वोट मिले. उनका लगातार नौवीं बार विधायक बनना जिले की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ को दिखाता है. योगी सरकार में भी सुरेश खन्ना को महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली. शाहजहांपुर की राजनीति में उनका प्रभाव केवल विधानसभा सीट तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि जिले के राजनीतिक परिदृश्य में भी उनकी अहम भूमिका रही है.
जितिन प्रसाद और राजनीतिक विरासत
शाहजहांपुर की राजनीति में जितिन प्रसाद के परिवार का भी पुराना प्रभाव रहा है. उनके पिता जितेंद्र प्रसाद को लोग बाबा साहब के नाम से जानते थे. वह राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार रहे. कांग्रेस संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. साल 1995 में वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और बाद में पार्टी के उपाध्यक्ष भी रहे. जितिन प्रसाद ने कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें योगी सरकार में मंत्री बनाया गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पीलीभीत सीट से जीत दर्ज की और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बने. शाहजहांपुर के अलावा लखीमपुर और सीतापुर में भी उनकी राजनीतिक सक्रियता और पहचान रही है. जिले से जुड़ी एक अन्य प्रमुख राजनीतिक हस्ती स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती हैं. उनकी कर्मस्थली शाहजहांपुर रही है. वह यहां मुमुक्ष आश्रम और मुमुक्षु शिक्षा संकुल से जुड़े रहे हैं.
तिलहर की राजनीति में सत्यपाल सिंह यादव की छाप
तिलहर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे सत्यपाल सिंह यादव ने भी जिले की राजनीति में अहम भूमिका निभाई. वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने. उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया.
छह विधानसभा सीटों का चुनावी हिसाब
शाहजहांपुर जिले में छह विधानसभा सीटें हैं. 2022 के चुनाव में बीजेपी ने सभी छह सीटों पर जीत दर्ज की थी. अलग-अलग सीटों पर जीत का अंतर और उम्मीदवारों के बीच मुकाबला जिले के चुनावी समीकरणों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
कटरा: यहां बीजेपी के वीर विक्रम सिंह ने सपा के राजेश यादव को हराया. 2017 में भी इस सीट पर वीर विक्रम सिंह ने जीत दर्ज की थी.
जलालाबाद: बीजेपी के हरि प्रकाश वर्मा ने जीत हासिल की, जबकि सपा के नीरज नलिनीश दूसरे स्थान पर रहे. 2017 में यह सीट सपा के शरदवीर सिंह ने जीती थी.
तिलहर: बीजेपी की सलोना कुशवाहा ने सपा के रोशनलाल वर्मा को 13,277 वोटों से हराया. 2017 में रोशनलाल वर्मा इसी सीट से बीजेपी के विधायक बने थे.
ददरौल: बीजेपी के मानवेंद्र सिंह ने सपा के राजेश वर्मा को 9,701 वोटों से मात दी. 2017 में भी मानवेंद्र सिंह ने इस सीट पर जीत हासिल की थी.
पुवायां: बीजेपी के चेतराम ने सपा के उपेंद्र पाल को 51,578 वोटों के बड़े अंतर से हराया. वह 2017 में भी यहां से विधायक चुने गए थे.
शाहजहांपुर: इस सीट पर सुरेश कुमार खन्ना ने सपा के तनवीर खां को 9,313 वोटों से हराया और लगातार नौवीं बार विधानसभा पहुंचे.
फिल्म जगत में शाहजहांपुर का नाम रोशन करने वाले राजपाल यादव
शाहजहांपुर जिले का नाम हिंदी सिनेमा में भी जाना जाता है. यहां के कुंडरा गांव से ताल्लुक रखने वाले राजपाल यादव ने अपनी कॉमेडी और अभिनय से फिल्म जगत में अलग पहचान बनाई. शुरुआती दौर में उन्होंने शाहजहांपुर में थिएटर किया, फिर लखनऊ की भारतेंदु नाट्य अकादमी और दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की पढ़ाई की. फिल्मों में उन्होंने हास्य भूमिकाओं के साथ अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. हंगामा, चुप चुप के, भूल भुलैया और फिर हेरा फेरी जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया. राजपाल यादव की कहानी शाहजहांपुर से निकलकर हिंदी सिनेमा तक पहुंचने वाले कलाकार के सफर को दिखाती है.
राजपाल यादव का नाम इन दिनों चेक बाउंस मामले को लेकर भी चर्चा में है. यह विवाद उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए वर्ष 2010 में ली गई करीब 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद से जुड़ा है. कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत पहुंचा और जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2026 को दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है. ्इस मामले में वह जेल भी जा चुके हैं.
—- समाप्त —-





















