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अंधविश्वास ने ली जान
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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अंबाला के नदी मोहल्ला में एक बंद कमरे में तीन साल तक मौत और जिंदगी के बीच जद्दोजहद चलती रही लेकिन बाहर पहरा दे रहे अंधविश्वास ने जिंदगी का रास्ता रोक दिया। कपड़ा मार्केट में काम करने वाले प्रिंस (24) की बीमारी को जब परिजनों ने ऊपरी साया मान लिया तो वहीं से उसकी मौत का काउंट डाउन शुरू हो चुका था।
पड़ोसियों की मदद ठुकराने और डॉक्टर से दूरी बनाने वाले परिजनों की जिद ने आखिर प्रिंस को मौत की नींद के आगोश में सुला दिया। जब शरीर सूखकर कांटा हो गया और हड्डियां जवाब दे गईं, तब जाकर यह खौफनाक दास्तां दुनिया के सामने आई।
तीन साल पहले अचानक से प्रिंस की तबीयत खराब रहने लगी। परिजनों ने कुछ खास ध्यान नहीं दिया। बाद में जब हाथ-पैर चलना बंद हो गए तो उसे झाड़ फूंक के माध्यम से ही ठीक कराने में लगे रहे। लेकिन तब तक प्रिंस के शरीर की हालत और खराब हो गई और वह बेड पर ही आ गया।

























