पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को साधने की जंग तेज हो गई है। एक तरफ शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल मावां-धियां इंसाफ यात्रा के जरिए गांव-गांव पहुंचकर नशे के खिलाफ महिलाओं को लामबंद कर रही हैं, तो दूसरी तरफ भगवंत मान सरकार मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना के जरिए सीधे महिलाओं के बैंक खातों तक आर्थिक मदद पहुंचाकर महिला सशक्तिकरण का अपना मॉडल पेश कर रही है।
कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई सरकारी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा और केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना जैसी योजनाएं भी महिला मतदाताओं के राजनीतिक व्यवहार पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। ऐसे में पंजाब की करीब 1.02 करोड़ महिला मतदाता इस चुनाव में किसके साथ खड़ी होती हैं, यह सत्ता की तस्वीर बदलने वाला सवाल बन गया है।
अकाली दल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा
हरसिमरत कौर बादल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा का केंद्र पंजाब का नशा संकट है। गांवों में महिलाओं से संवाद करते हुए अकाली दल परिवारों पर पड़ रहे नशे के असर, युवाओं की बर्बादी और माताओं की चिंता को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। अभियान के दूसरे चरण में माई भागो मावां-धियां दी फौज की घोषणा भी की गई है, जिसके जरिए महिलाओं को नशा बेचने वालों और उनके कथित संरक्षणकर्ताओं की जानकारी सामने लाने के लिए लामबंद करने की बात कही गई है।
आम आदमी पार्टी सरकार ने महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सीधे आर्थिक लाभ को अपना प्रमुख आधार बनाया है। 2026-27 के बजट में घोषित मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये देने का प्रावधान किया गया। सरकार के लिए यह योजना केवल सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से जोड़ने वाला राजनीतिक संदेश भी है।








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