रूस ने सोमवार को इंटरमीडिएट और शॉर्टर-रेंज मिसाइलों की तैनाती पर लगाई गई खुद की मोराटोरियम (स्वैच्छिक रोक) को हटाने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला अमेरिका द्वारा अपने दो न्यूक्लियर सबमरीन्स को रूसी तटों के पास तैनात करने के आदेश के बाद लिया गया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “अब रूस खुद पर लगाई गई उन मोराटोरियम से बंधा नहीं महसूस करता जो इंटरमीडिएट और शॉर्टर-रेंज मिसाइलों की तैनाती को लेकर थीं. इन मोराटोरियम को बनाए रखने की परिस्थितियां अब नहीं बची हैं.”
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रूस ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह इस मोराटोरियम को खत्म कर सकता है. दिसंबर 2024 में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस दिशा में इशारा किया था, और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उस महीने संकेत दिया था कि 2025 की दूसरी छमाही में रूस अपनी ओरशनिक इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल बेलारूस में तैनात कर सकता है.
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रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और नाटो की तरफ से इस मुद्दे पर रूस की चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया गया. मंत्रालय के मुताबिक, “अब हालात ऐसे हैं कि अमेरिका द्वारा बनाए गए इंटरमीडिएट और शॉर्टर-रेंज ग्राउंड-बेस्ड मिसाइल्स यूरोप और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में असल में तैनात किए जा रहे हैं.” मसलन, रूस द्वारा प्रतिबंध हटाए जाने के फैसले से उसे खासतौर से लैंड-बेस्ड शॉर्ट रेंज मिसाइलें तैनात करने की छूट मिल गई है, जो यूरोप और एशिया को निशाना बना सकती हैं.
रूस के पास फ्रीडम ऑफ एक्शन, जरूरत पड़ी तो किया जाएगा इस्तेमाल
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि “अब ऐसे किसी भी शर्त की मौजूदगी नहीं है जो इस मोराटोरियम को बनाए रखने को सही ठहरा सके.” बयान में आगे कहा गया है, “रूस अब खुद पर पहले से लागू स्वैच्छिक रोकों को नहीं मानता.” क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी कहा कि रूस इस मुद्दे पर फ्रीडम ऑफ एक्शन रखता है और जब जरूरत होगी, तो वह नाटो की ‘आक्रामक कार्रवाइयों’ के जवाब में इस फ्रीडम का इस्तेमाल करेगा.
रूसी विदेश मंत्रालय ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की मिसाइलों की तैनाती की दिशा में उनकी गतिविधियां रूस की सुरक्षा के लिए ‘डायरेक्ट थ्रेट’ बन चुकी हैं. ऐसे में रूस को अपनी सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाने पड़ेंगे.
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रूस के मोराटोरियम हटाने का क्या मतलब है?
गौरतलब है कि इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) ट्रीटी अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच 1987 में साइन हुई थी, जिसमें 500 से 5,500 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों की तैनाती पर रोक लगाई गई थी. हालांकि, अमेरिका 2019 में इस एग्रीमेंट से बाहर हो गया था. अब जबकि अमेरिका ने अपने सबमरीन्स को रूस के करीब भेजने का कदम उठाया है, रूस ने इस ऐतिहासिक संधि से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धता को पूरी तरह से खत्म कर दिया है.
शुक्रवार को ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में बताया कि उन्होंने अमेरिकी सबमरीन्स को “उचित क्षेत्रों” में भेजने का आदेश दिया है. यह कदम रूसी सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के कथित “भड़काऊ बयानों” के बाद उठाया गया. रूस का यह कदम दोनों देशों के बीच रणनीतिक तनाव को एक नए मोड़ पर ले जा सकता है, खासकर तब जब वैश्विक सुरक्षा पहले से ही कई मोर्चों पर चुनौती का सामना कर रही है.
अमेरिका-यूरोप के लिए नई चुनौती
रूस द्वारा INF ट्रीटी से खुदकी रोक हटाना यूरोप के लिए एक नई चुनौती पेश करेगा. अब New Strategic Arms Reduction Treaty (New START) ही अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों पर लगाम लगाने वाली आखिरी संधि बची है. अगर यह संधि भी खत्म हो गई, तो 1972 के बाद पहली बार दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा. मसलन, रूस अब बेरोकटोक इंटरमीडिएट और शॉर्टर-रेंज ग्राउंड-बेस्ड मिसाइलें बना और उसको तैनात कर सकेगा.
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