• Latest
  • Trending
  • All
जब भरतजी को वन में आते देख गुस्से से आगबबूला हो गए लक्ष्मणजी

जब भरतजी को वन में आते देख गुस्से से आगबबूला हो गए लक्ष्मणजी

2 years ago
Us Iran Tensions: Fragile ceasefire faces fresh test as missiles keep flying as Iran, US trade new blows: Key details

Us Iran Tensions: Fragile ceasefire faces fresh test as missiles keep flying as Iran, US trade new blows: Key details

1 hour ago
Madhuri Dixit Defends Aishwarya Rai Bachchan After Cannes 2026 Trolling, Says ‘Cannot Reduce Her To…’

Madhuri Dixit Defends Aishwarya Rai Bachchan After Cannes 2026 Trolling, Says ‘Cannot Reduce Her To…’

2 hours ago
Indian Stock Market Outlook: RBI Policy, US-Iran Tensions, Crude Oil Prices to Influence Trends

Indian Stock Market Outlook: RBI Policy, US-Iran Tensions, Crude Oil Prices to Influence Trends

4 hours ago
Virat Kohli’s INR 5 crore masterpiece: ‘King’ saved his best for the final to give RCB a controlled demolition

Virat Kohli’s INR 5 crore masterpiece: ‘King’ saved his best for the final to give RCB a controlled demolition

4 hours ago
Trump seeks fresh changes to Iran deal; draft includes Hormuz reopening, nuclear curbs: Report

Trump seeks fresh changes to Iran deal; draft includes Hormuz reopening, nuclear curbs: Report

4 hours ago
Vaibhav Sooryavanshi answers the million-dollar question after becoming youngest to win IPL Orange Cap at 15

Vaibhav Sooryavanshi answers the million-dollar question after becoming youngest to win IPL Orange Cap at 15

11 hours ago
‘Written in my destiny’: Rajat Patidar grateful after winning back-to-back IPL titles as RCB captain

‘Written in my destiny’: Rajat Patidar grateful after winning back-to-back IPL titles as RCB captain

11 hours ago
Whenever I see Virat bhai, he is always there for team: Skipper Patidar

Whenever I see Virat bhai, he is always there for team: Skipper Patidar

11 hours ago
Assam Cabinet Expansion on June 5 after BJP’s strong poll win

Assam Cabinet Expansion on June 5 after BJP’s strong poll win

11 hours ago
Shubman Gill refuses to hide behind excuses after Gujarat Titans miss out on IPL 2026 trophy

Shubman Gill refuses to hide behind excuses after Gujarat Titans miss out on IPL 2026 trophy

11 hours ago
Virat Kohli makes ‘big boys’ admission as he pours his heart out after RCB clinch the IPL double

Virat Kohli makes ‘big boys’ admission as he pours his heart out after RCB clinch the IPL double

12 hours ago
Rise in dengue cases causes concern in Thripunithura municipality

Rise in dengue cases causes concern in Thripunithura municipality

12 hours ago
Monday, June 1, 2026
  • PRESS RELEASE
  • ADVERTISE
  • CONTACT
  • Game
India News Online
  • Home
  • News
    • India
    • Punjab
    • International
    • Entertainment
  • Hindi News
  • Politics
  • Health
  • Business
  • Sports
  • Technology
  • Lifestyle
  • Video
    • All
    • Hindi Songs
    • Punjabi Songs
    पियवा किसनवा 90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi

    पियवा किसनवा 90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi

    90s Bollywood Wedding Songs | Evergreen Bollywood Hits | Shadi Song | Sadabahar Hindi Songs Jukebox

    90s Bollywood Wedding Songs | Evergreen Bollywood Hits | Shadi Song | Sadabahar Hindi Songs Jukebox

    आज तो बाल बाल बच गया😄90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu song

    आज तो बाल बाल बच गया😄90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu song

    भाभी ने बचाई ननद की जान 😆 90’S Old Hindi Songs 🥺90s Love Song 😍Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar

    भाभी ने बचाई ननद की जान 😆 90’S Old Hindi Songs 🥺90s Love Song 😍Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar

    Cold Rude boy falling for cute girl 💕 korean mix hindi songs 💞 Chinese mix hindi songs

    Cold Rude boy falling for cute girl 💕 korean mix hindi songs 💞 Chinese mix hindi songs

    90s हिंदी सदाबहार गीत | 90’s Romantic Hindi Songs | 90’s सदाबहार फिल्मी गाने | 90’s Bollywood Songs

    90s हिंदी सदाबहार गीत | 90’s Romantic Hindi Songs | 90’s सदाबहार फिल्मी गाने | 90’s Bollywood Songs

    90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi Jukebox

    90’S Old Hindi Songs🥰 90s Love Song😍 Udit Narayan, Alka Yagnik, Kumar Sanu songs Hindi Jukebox

    90’s हिंदी गाने | 90’s Evergreen Songs | 90s सदाबहार गाने | Hindi Gana | 90’s Hit Songs | Durga Boss

    90’s हिंदी गाने | 90’s Evergreen Songs | 90s सदाबहार गाने | Hindi Gana | 90’s Hit Songs | Durga Boss

    90’s पुराने गाने | 90’s Evergreen Bollywood Hits | Old is Gold Collection | Hindi Sadabahar Gaane

    90’s पुराने गाने | 90’s Evergreen Bollywood Hits | Old is Gold Collection | Hindi Sadabahar Gaane

  • Travel
  • Game
No Result
View All Result
India News
No Result
View All Result
Home Hindi News

जब भरतजी को वन में आते देख गुस्से से आगबबूला हो गए लक्ष्मणजी

by India News Online Team
January 17, 2024
in Hindi News
0
जब भरतजी को वन में आते देख गुस्से से आगबबूला हो गए लक्ष्मणजी
Share on FacebookShare on TwitterShare on Email


(राम आ रहे हैं…जी हां, सदियों के लंबे इंतजार के बाद भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है और प्रभु श्रीराम अपनी पूरी भव्यता-दिव्यता के साथ उसमें विराजमान हो रहे हैं. इस पावन अवसर पर aajtak.in अपने पाठकों के लिए लाया है तुलसीदास द्वारा अवधी में लिखी गई राम की कथा का हिंदी रूपांतरण (साभारः गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीरामचरितमानस).  इस श्रृंखला ‘रामचरित मानस’ में आप पढ़ेंगे भगवान राम के जन्म से लेकर लंका पर विजय तक की पूरी कहानी. आज पेश है इसका 14वां खंड…)


जब भरतजी को वन में आते देख गुस्से से आगबबूला हो गए लक्ष्मणजी

श्रीरामजी को वन से वापस लेने के लिए भरतजी ने निषादराज गुह की मदद ली. भरतजी के साथ बाकी प्रजा भी थी. सब लोग श्रीरामचंद्रजी के प्रेम के मारे शिथिल होने के कारण सूर्यास्त होने तक दो ही कोस चल पाए और जल-स्थल का सुपास देखकर रात को वहीं बिना खाए-पीए ही रह गए. रात बीतने पर श्रीरघुनाथजी के प्रेमी भरतजी ने आगे गमन किया. उधर श्रीरामचंद्रजी रात शेष रहते ही जागे. रात को सीताजी ने ऐसा स्वप्न देखा मानो समाजसहित भरतजी यहां आए हैं. प्रभु के वियोग की अग्नि से उनका शरीर संतप्त है. सभी लोग मन में उदास, दीन और दुखी हैं. सासों को दूसरी ही सूरत में देखा. सीताजी का स्वप्न सुनकर श्रीरामचंद्रजी के नेत्रों में जल भर आया और सबको सोच से छुड़ा देने वाले प्रभु स्वयं सोच के वश हो गए. और बोले- लक्ष्मण! यह स्वप्न अच्छा नहीं है. कोई भीषण कुसमाचार सुनावेगा. ऐसा कहकर उन्होंने भाई सहित स्नान किया और त्रिपुरारि महादेवजी का पूजन करके साधुओं का सम्मान किया. देवताओं का सम्मान (पूजन) और मुनियों की वन्दना करके श्रीरामचंद्रजी बैठ गए और उत्तर दिशा की ओर देखने लगे. आकाश में धूल छा रही है; बहुत-से पक्षी और पशु व्याकुल होकर भागे हुए प्रभु के आश्रम को आ रहे हैं.  प्रभु श्रीरामचंद्रजी यह देखकर उठे और सोचने लगे कि क्या कारण है? वे चित्त में आश्चर्ययुक्त हो गए. उसी समय कोल-भीलों ने आकर सब समाचार कहे. सुंदर मंगल वचन सुनते ही श्रीरामजी के मन में बड़ा आनंद हुआ. शरीर में पुलकावली छा गई और शरद् ऋतु के कमल के समान नेत्र प्रेमाश्रुओं से भर गए.

सीतापति श्रीरामचंद्रजी पुनः सोचके वश हो गए कि भरत के आने का क्या कारण है? फिर एक ने आकर ऐसा कहा कि उनके साथ में बड़ी भारी चतुरंगिणी सेना भी है. यह सुनकर श्रीरामचंद्रजी को अत्यंत सोच हुआ. इधर तो पिता के वचन और इधर भाई भरतजी का संकोच! भरतजी के स्वभाव को मन में समझकर तो प्रभु श्रीरामचंद्रजी चित्त को ठहराने के लिए कोई स्थान ही नहीं पाते हैं. तब यह जानकर समाधान हो गया कि भरत साधु और सयाने हैं तथा मेरे कहने में आज्ञाकारी हैं. लक्ष्मणजी ने देखा कि प्रभु श्रीरामजी के हृदय में चिन्ता है तो वे समय के अनुसार अपना नीतियुक्त विचार कहने लगे- हे स्वामी! आपके बिना ही पूछे मैं कुछ कहता हूं; सेवक समय पर ढिठाई करने से ढीठ नहीं समझा जाता. हे स्वामी! आप सर्वज्ञों में शिरोमणि हैं (सब जानते ही हैं). मैं सेवक तो अपनी समझ की बात कहता हूं. हे नाथ! आप परम सुहृद, सरलहृदय तथा शील और स्नेह के भंडार हैं, आपका सभी पर प्रेम और विश्वास है और अपने हृदय में सबको अपने ही समान जानते हैं, परंतु मूढ़ विषई जीव प्रभुता पाकर मोहवश अपने असली स्वरूप को प्रकट कर देते हैं. भरत नीतिपरायण, साधु और चतुर हैं तथा प्रभु के चरणों में उनका प्रेम है, इस बात को सारा जगत जानता है.

 

 

वे भरत भी आज श्रीरामजी का पद (सिंहासन या अधिकार) पाकर धर्म की मर्यादा को मिटाकर चले हैं. कुटिल खोटे भाई भरत कुसमय देखकर और यह जानकर कि रामजी वनवास में अकेले हैं, अपने मन में बुरा विचार करके, समाज जोड़कर राज को निष्कंटक करने के लिए यहां आए हैं. करोड़ों प्रकार की कुटिलताएं रचकर सेना बटोरकर दोनों भाई आए हैं. यदि इनके हृदय में कपट और कुचाल न होती, तो रथ, घोड़े और हाथियों की कतार ऐसे समय किसे सुहाती? परंतु भरत को ही व्यर्थ कौन दोष दे? राजपद पा जाने पर सारा जगत ही पागल (मतवाला) हो जाता है. चंद्रमा गुरुपत्नीगामी हुआ, राजा नहुष ब्राह्मणों की पालकी पर चढ़ा. और राजा वेन के समान नीच तो कोई नहीं होगा, जो लोक और वेद दोनों से विमुख हो गया. सहस्रबाहु, देवराज इन्द्र और त्रिशंकु आदि किसको राजमद ने कलंक नहीं दिया? भरत ने यह उपाय उचित ही किया है. क्योंकि शत्रु और ऋण को कभी जरा भी शेष नहीं रखना चाहिए. हां, भरत ने एक बात अच्छी नहीं की, जो रामजी (आप) को असहाय जानकर उनका निरादर किया! पर आज संग्राम में श्रीरामजी का क्रोधपूर्ण मुख देखकर यह बात भी उनकी समझ में विशेषरूप से आ जायगी. इतना कहते ही लक्ष्मणजी नीतिरस भूल गए और युद्धरसरूपी वृक्ष पुलकावली के बहाने से फूल उठा.


वे प्रभु श्रीरामचंद्रजी के चरणों की वन्दना करके, चरण-रज को सिरपर रखकर सच्चा और स्वाभाविक बल कहते हुए बोले- हे नाथ! मेरा कहना अनुचित न मानिएगा. भरत ने हमें कम नहीं प्रचारा है. आखिर कहां तक सहा जाय और मन मारे रहा जाय, जब स्वामी हमारे साथ हैं और धनुष हमारे हाथ में है! क्षत्रिय जाति, रघुकुल में जन्म और फिर मैं श्रीरामजी का अनुगामी हूं, यह जगत जानता है. धूल के समान नीच कौन है, परंतु वह भी लात मारने पर सिर ही चढ़ती है. यों कहकर लक्ष्मणजी ने उठकर, हाथ जोड़कर आज्ञा मांगी. मानो वीररस सोते से जाग उठा हो. सिर पर जटा बांधकर कमर में तरकस कस लिया और धनुष को सजकर तथा बाण को हाथ में लेकर कहा- आज मैं श्रीराम का सेवक होने का यश लूं और भरत को संग्राम में शिक्षा दूं. श्रीरामचंद्रजी के निरादर का फल पाकर दोनों भाई (भरत-शत्रुघ्न) रणशय्या पर सोवें! अच्छा हुआ जो सारा समाज आकर एकत्र हो गया. आज मैं पिछला सब क्रोध प्रकट करूंगा. जैसे सिंह हाथियों के झुंड को कुचल डालता है और बाज जैसे लवे को लपेट में ले लेता है, वैसे ही भरत को सेना समेत और छोटे भाईसहित तिरस्कार करके मैदान में पछाहूंगा. यदि शंकरजी भी आकर उनकी सहायता करें, तो भी, मुझे रामजी की सौगन्ध है, मैं उन्हें युद्ध में अवश्य मार डालूंगा (छोडूंगा नहीं).

Quiz: श्रीराम सीता और लक्ष्मण किस विमान से लंका से अयोध्या आए थे? क्लिक कर बताइए

लक्ष्मणजी को अत्यंत क्रोध से तमतमाया हुआ देखकर और उनकी प्रामाणिक सौगन्ध सुनकर सब लोग भयभीत हो जाते हैं और लोकपाल घबड़ाकर भागना चाहते हैं. सारा जगत भय में डूब गया. तब लक्ष्मणजी के अपार बाहुबल की प्रशंसा करती हुई आकाशवाणी हुई- हे तात! तुम्हारे प्रताप और प्रभाव को कौन कह सकता है और कौन जान सकता है? परंतु कोई भी काम हो, उसे अनुचित-उचित खूब समझ-बूझकर किया जाए तो सब कोई अच्छा कहते हैं. वेद और विद्वान् कहते हैं कि जो बिना विचारे जल्दी में किसी काम को करके पीछे पछताते हैं, वे बुद्धिमान् नहीं हैं. देववाणी सुनकर लक्ष्मणजी सकुचा गए.


श्रीरामचंद्रजी और सीताजी ने उनका आदर के साथ सम्मान किया और कहा- हे तात! तुमने बड़ी सुंदर नीति कही. हे भाई! राज का मद सबसे कठिन मद है. जिन्होंने साधुओं की सभा का सेवन (सत्संग) नहीं किया, वे ही राजा राजमदरूपी मदिरा का आचमन करते ही मतवाले हो जाते हैं. हे लक्ष्मण! सुनो, भरत सरीखा उत्तम पुरुष ब्रह्मा की सृष्टि में न तो कहीं सुना गया है, न देखा ही गया है. अयोध्या के राज की तो बात ही क्या है. ब्रह्मा, विष्णु और महादेव का पद पाकर भी भरत को राज का मद नहीं होने का! क्या कभी कांजी की बूंदों से क्षीरसमुद्र नष्ट हो सकता है? अन्धकार चाहे तरुण (मध्याह्न के) सूर्य को निगल जाए. आकाश चाहे बादलों में समाकर मिल जाए. गौ के खुर-इतने जल में अगस्त्यजी डूब जाएं और पृथ्वी चाहे अपनी स्वाभाविक क्षमा (सहनशीलता) को छोड़ दे.

मच्छर की फूंक से चाहे सुमेरु उड़ जाए. परंतु हे भाई! भरत को राज मद कभी नहीं हो सकता. हे लक्ष्मण! मैं तुम्हारी शपथ और पिताजी की सौगन्ध खाकर कहता हूं, भरत के समान पवित्र और उत्तम भाई संसार में नहीं है. हे तात! गुणरूपी दूध और अवगुणरूपी जल को मिलाकर विधाता इस दृश्य-प्रपंच को रचता है. परंतु भरत ने सूर्यवंशरूपी तालाब में हंसरूप जन्म लेकर गुण और दोष का विभाग कर दिया. गुणरूपी दूध को गुहणकर और अवगुणरूपी जल को त्यागकर भरत ने अपने यश से जगत में उजियाला कर दिया है. भरतजी के गुण, शील और स्वभाव को कहते-कहते श्रीरघुनाथजी प्रेमसमुद्र में मग्न हो गए. श्रीरामचंद्रजी की वाणी सुनकर और भरतजी पर उनका प्रेम देखकर समस्त देवता उनकी सराहना करने लगे और कहने लगे कि श्रीरामचंद्रजी के समान कृपा के धाम प्रभु और कौन हैं? यदि जगत में भरत का जन्म न होता, तो पृथ्वी पर सम्पूर्ण धर्मों की धुरी को कौन धारण करता? हे रघुनाथजी! कविकुल के लिए अगम (उनकी कल्पना से अतीत) भरतजी के गुणों की कथा आपके सिवा और कौन जान सकता है? लक्ष्मणजी, श्रीरामचंद्रजी और सीताजी ने देवताओं की वाणी सुनकर अत्यंत सुख पाया, जो वर्णन नहीं किया जा सकता.


उधर भरतजी ने सारे समाज के साथ पवित्र मन्दाकिनी में स्नान किया. फिर सबको नदी के समीप ठहराकर तथा माता, गुरु और मन्त्री की आज्ञा मांगकर निषादराज और शत्रुघ्न को साथ लेकर भरतजी वहां को चले जहां श्रीसीताजी और श्रीरघुनाथजी थे. भरतजी अपनी माता कैकेयी की करनी को समझकर सकुचाते हैं और मन में अनेक कुतर्क करते हैं और सोचते हैं- श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी मेरा नाम सुनकर स्थान छोड़कर कहीं दूसरी जगह उठकर न चले जाएं. मुझे माता के मत में मानकर वे जो कुछ भी करें सो थोड़ा है, पर वे अपनी ओर समझकर (अपने विरद और सम्बन्ध को देखकर) मेरे पापों और अवगुणों को क्षमा करके मेरा आदर ही करेंगे. चाहे मलिन-मन जानकर मुझे त्याग दें, चाहे अपना सेवक मानकर मेरा सम्मान करें (कुछ भी करें); मेरे तो श्रीरामचंद्रजी की जूतियां ही शरण हैं. श्रीरामचंद्रजी तो अच्छे स्वामी हैं, दोष तो सब दास का ही है. जगत में यश के पात्र तो चातक और मछली ही हैं, जो अपने नेम और प्रेम को सदा नया बनाए रखने में निपुण हैं. ऐसा मन में सोचते हुए भरतजी मार्ग में चले जाते हैं. उनके सब अंग संकोच और प्रेम से शिथिल हो रहे हैं. माता की हुई बुराई मानो उन्हें लौटाती है, पर धीरज की धुरी को धारण करने वाले भरतजी भक्ति के बल से चले जाते हैं. जब श्रीरघुनाथजी के स्वभाव को समझते हैं तब मार्ग में उनके पैर जल्दी-जल्दी पड़ने लगते हैं. उस समय भरत की दशा कैसी है? जैसी जल के प्रवाह में जल के भौरे की गति होती है. भरतजी का सोच और प्रेम देखकर उस समय निषाद विदेह हो गया.

मंगल-शकुन होने लगे. उन्हें सुनकर और विचारकर निषाद कहने लगा- सोच मिटेगा, हर्ष होगा, पर फिर अन्त में दुख होगा. भरतजी ने सेवक (गृह) के सब वचन सत्य जाने और वे आश्रम के समीप जा पहुंचे. वहां के वन और पर्वतों के समूह को देखा तो भरतजी इतने आनन्दित हुए मानो कोई भूखा अच्छा अन्न पा गया हो. जैसे ईति (अधिक जल बरसना, न बरसना, चूहों का उत्पात, टिड्डियां, तोते और दूसरे राजा की चढ़ाई, खेतों में बाधा देने वाले इन छह उपद्रवों को ‘ईति’ कहते हैं) के भय से दुखी हुई और तीनों (आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक) तापों तथा क्रूर ग्रहों और महामारियों से पीड़ित प्रजा किसी उत्तम देश और उत्तम राज में जाकर सुखी हो जाए. भरतजी की गति (दशा) ठीक उसी प्रकार की हो रही है. श्रीरामचंद्रजी के निवास से वन की सम्पत्ति ऐसी सुशोभित है मानो अच्छे राजा को पाकर प्रजा सुखी हो. सुहावना वन ही पवित्र देश है. विवेक उसका राजा है और वैराग्य मन्त्री है. यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह) तथा नियम (शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वरप्रणिधान) योद्धा हैं. पर्वत राजधानी है, शान्ति तथा सुबुद्धि दो सुंदर पवित्र रानियां हैं. वह श्रेष्ठ राजा राज के सब अंगों से पूर्ण है और श्रीरामचंद्रजी के चरणों के आश्रित रहने से उसके चित्त में चाव (आनंद या उत्साह) है. मोहरूपी राजा को सेनासहित जीतकर विवेकरूपी राजा निष्कंटक राज्य कर रहा है. उसके नगर में सुख, सम्पत्ति और सुकाल वर्तमान है.

लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर कौन से वैद्य को लाया गया था? क्लिक कर बताइए

वनरूपी प्रान्तों में जो मुनियों के बहुत-से निवासस्थान हैं वही मानो शहरों, नगरों, गांवों और खेड़ों का समूह है. बहुत से विचित्र पक्षी और अनेकों पशु ही मानो प्रजाओं का समाज है, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता. गैंडा, हाथी, सिंह, बाघ, सूअर, भैंसे और बैलों को देखकर राजा के साज को सराहते ही बनता है. ये सब आपस का वैर छोड़कर जहां-तहां एक साथ विचरते हैं. यही मानो चतुरंगिनी सेना है. पानी के झरने झर रहे हैं और मतवाले हाथी चिंघाड़ रहे हैं. वे ही मानो वहां अनेकों प्रकार के नगाड़े बज रहे हैं. चकवा, चकोर, पपीहा, तोता तथा कोयलों के समूह और सुंदर हंस प्रसन्न मन से कूज रहे हैं. भौंरों के समूह गुंजार कर रहे हैं और मोर नाच रहे हैं. मानो उस अच्छे राज्य में चारों ओर मंगल हो रहा है. बेल, वृक्ष, तृण सब फल और फूलों से युक्त हैं. सारा समाज आनंद और मंगल का मूल बन रहा है. श्रीरामजी के पर्वत की शोभा देखकर भरतजी के हृदय में अत्यंत प्रेम हुआ. जैसे तपस्वी नियम की समाप्ति होने पर तपस्या का फल पाकर सुखी होता है. तब केवट दौड़कर ऊंचे चढ़ गया और भुजा उठाकर भरतजी से कहने लगा- हे नाथ! ये जो पाकर, जामुन, आम और तमाल के विशाल वृक्ष दिखाई देते हैं, जिन श्रेष्ठ वृक्षों के बीच में एक सुंदर विशाल बड़ का वृक्ष सुशोभित है, जिसको देखकर मन मोहित हो जाता है, उसके पत्ते नीले और सघन हैं और उसमें लाल फल लगे हैं. उसकी घनी छाया सब ऋतुओं में सुख देने वाली है.


मानो ब्रह्माजी ने परम शोभा को एकत्र करके अन्धकार और लालिमामई राशि-सी रच दी है. हे गुसाईं! ये वृक्ष नदी के समीप हैं, जहां श्रीराम की पर्णकुटी छाई है. वहां तुलसीजी के बहुत से सुंदर वृक्ष सुशोभित हैं, जो कहीं-कहीं सीताजी ने और कहीं लक्ष्मणजी ने लगाए हैं. इसी बड़ की छाया में सीताजी ने अपने करकमलों से सुंदर वेदी बनाई है. जहां सुजान श्रीसीतारामजी मुनियों के वृन्द समेत बैठकर नित्य शास्त्र, वेद और पुराणों के सब कथा-इतिहास सुनते हैं. सखा के वचन सुनकर और वृक्षों को देखकर भरतजी के नेत्रों में जल उमड़ आया. दोनों भाई प्रणाम करते हुए चले. उनके प्रेम का वर्णन करने में सरस्वतीजी भी सकुचाती हैं. श्रीरामचंद्रजी के चरण-चिह्न देखकर दोनों भाई ऐसे हर्षित होते हैं मानो दरिद्र पारस पा गया हो. वहां की रज को मस्तक पर रखकर हृदय में और नेत्रों में लगाते हैं और श्रीरघुनाथजी के मिलने के समान सुख पाते हैं. भरतजी की अत्यंत अनिर्वचनीय दशा देखकर वन के पशु, पक्षी और जड़ (वृक्षादि) जीव प्रेम में मग्न हो गए. प्रेम के विशेष वश होने से सखा निषादराज को भी रास्ता भूल गया. तब देवता सुंदर रास्ता बतलाकर फूल बरसाने लगे.

भरत के प्रेम की इस स्थिति को देखकर सिद्ध और साधक लोग भी अनुराग से भर गए और उनके स्वाभाविक प्रेम की प्रशंसा करने लगे कि यदि इस पृथ्वीतल पर भरत का जन्म अथवा प्रेम न होता, तो जड़ को चेतन और चेतन को जड़ कौन करता? प्रेम अमृत है, विरह मन्दराचल पर्वत है, भरतजी गहरे समुद्र हैं. कृपा के समुद्र श्रीरामचंद्रजी ने देवता और साधुओं के हित के लिए स्वयं मथकर यह प्रेमरूपी अमृत प्रकट किया है. सखा निषादराज सहित इस मनोहर जोड़ी को सघन वन की आड़ के कारण लक्ष्मणजी नहीं देख पाए. भरतजी ने प्रभु श्रीरामचंद्रजी के समस्त सुमंगलों के धाम और सुंदर पवित्र आश्रम को देखा. आश्रम में प्रवेश करते ही भरतजी का दुख और दाह (जलन) मिट गया, मानो योगी को परमार्थ (परमतत्त्व) की प्राप्ति हो गई हो. भरतजी ने देखा कि लक्ष्मणजी प्रभु के आगे खड़े हैं और पूछे हुए वचन प्रेमपूर्वक कह रहे हैं- सिर पर जटा है. कमर में मुनियों का (वल्कल) वस्त्र बांधे हैं और उसी में तरकस कसे हैं. हाथ में बाण तथा कंधे पर धनुष है. वेदी पर मुनि तथा साधुओं का समुदाय बैठा है और सीताजी सहित श्रीरघुनाथजी विराजमान हैं. श्रीरामजी के वल्कल वस्त्र हैं, जटा धारण किए हैं, श्याम शरीर है, सीतारामजी ऐसे लगते हैं मानो रति और कामदेव ने मुनि का वेष धारण किया हो. श्रीरामजी अपने करकमलों से धनुष-बाण फेर रहे हैं, और हंसकर देखते ही जी की जलन हर लेते हैं. सुंदर मुनिमंडली के बीच में सीताजी और रघुकुलचंद्र श्रीरामचंद्रजी ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो ज्ञान की सभा में साक्षात् भक्ति और सच्चिदानन्द शरीर धारण करके विराजमान हैं.

 

 

छोटे भाई शत्रुघ्न और सखा निषादराज समेत भरतजी का मन प्रेम में मग्न हो रहा है. हर्ष-शोक, सुख-दुख आदि सब भूल गए. ‘हे नाथ! रक्षा कीजिए, हे गुसाईं! रक्षा कीजिए’ ऐसा कहकर वे पृथ्वी पर दंड की तरह गिर पड़े. प्रेमभरे वचनों से लक्ष्मणजी ने पहचान लिया और मन में जान लिया कि भरतजी प्रणाम कर रहे हैं. अब इस ओर तो भाई भरतजी का सरस प्रेम और उधर स्वामी श्रीरामचंद्रजी की सेवा की प्रबल परवशता न तो क्षणभर के लिए भी सेवा से पृथक होकर मिलते ही बनता है और न प्रेमवश छोड़ते ही. कोई श्रेष्ठ कवि ही लक्ष्मणजी के चित्त की इस गति का वर्णन कर सकता है. वे सेवा पर भार रखकर रह गए मानो चढ़ी हुई पतंग को खिलाड़ी (पतंग उड़ाने वाला) खींच रहा हो. लक्ष्मणजी ने प्रेमसहित पृथ्वी पर मस्तक नवाकर कहा- हे रघुनाथजी! भरतजी प्रणाम कर रहे हैं. यह सुनते ही श्रीरघुनाथजी प्रेम में अधीर होकर उठे. कहीं वस्त्र गिरा, कहीं तरकस, कहीं धनुष और कहीं बाण. कृपानिधान श्रीरामचंद्रजी ने उनको जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया. भरतजी और श्रीरामजी के मिलने की रीति को देखकर सबको अपनी सुध भूल गई. मिलन की प्रीति कैसे बखानी जाए? वह तो कविकुल के लिए कर्म, मन, वाणी तीनों से अगम है. दोनों भाई (भरतजी और श्रीरामजी) मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार को भुलाकर परम प्रेम से पूर्ण हो रहे हैं.


कहिए, उस श्रेष्ठ प्रेम को कौन प्रकट करे? कवि की बुद्धि किसकी छाया का अनुसरण करे? कवि को तो अक्षर और अर्थ का ही सच्चा बल है. नट ताल की गति के अनुसार ही नाचता है! भरतजी और श्रीरघुनाथजी का प्रेम अगम्य है, जहां ब्रह्मा, विष्णु और महादेव का भी मन नहीं जा सकता. उस प्रेम को मैं कुबुद्धि किस प्रकार कहूं! भला, गांडर की तांत से भी कहीं सुंदर राग बज सकता है? (तालाबों और झीलों में एक तरह की घास होती है, उसे गांडर कहते हैं). भरतजी और श्रीरामचंद्रजी के मिलने का ढंग देखकर देवता भयभीत हो गए, उनकी धुकधुकी धड़कने लगी. देवगुरु बृहस्पतिजी ने समझाया, तब कहीं वे मूर्ख चेते और फूल बरसाकर प्रशंसा करने लगे. फिर श्रीरामजी प्रेम के साथ शत्रुघ्न से मिलकर तब केवट से मिले. प्रणाम करते हुए लक्ष्मणजी से भरतजी बड़े ही प्रेम से मिले. तब लक्ष्मणजी ललककर (बड़ी उमंग के साथ) छोटे भाई शत्रुघ्न से मिले. फिर उन्होंने निषादराज को हृदय से लगा लिया. फिर भरत शत्रुघ्न दोनों भाइयों ने मुनियों को प्रणाम किया और इच्छित आशीर्वाद पाकर वे आनन्दित हुए. छोटे भाई शत्रुघ्नसहित भरतजी प्रेम में उमंग कर सीताजी के चरणकमलों की रज सिरपर धारण कर बार-बार प्रणाम करने लगे. सीताजी ने उन्हें उठाकर उनके सिर को अपने करकमल से स्पर्शकर उन दोनों को बैठाया.

सीताजी ने मन-ही-मन आशीर्वाद दिया; क्योंकि वे स्नेह में मग्न हैं, उन्हें देह की सुध-बुध नहीं है. सीताजी को सब प्रकार से अपने अनुकूल देखकर भरतजी सोचरहित हो गए और उनके हृदय का कल्पित भय जाता रहा. उस समय न तो कोई कुछ कहता है, न कोई कुछ पूछता है. मन प्रेम से परिपूर्ण है, वह अपनी गति से खाली है. उस अवसर पर केवट (निषादराज) धीरज धर और हाथ जोड़कर प्रणाम करके विनती करने लगा- हे नाथ! मुनिनाथ वसिष्ठजी के साथ सब माताएं, नगरनिवासी, सेवक, सेनापति, मन्त्री सब आपके वियोग से व्याकुल होकर आए हैं. गुरु का आगमन सुनकर शील के समुद्र श्रीरामचंद्रजी ने सीताजी के पास शत्रुघ्नजी को रख दिया और वे परम धीर, धर्मधुरन्धर, दीनदयालु श्रीरामचंद्रजी उसी समय वेग के साथ चल पड़े. गुरुजी के दर्शन करके लक्ष्मणजी सहित प्रभु श्रीरामचंद्रजी प्रेम में भर गए और दंडवत प्रणाम करने लगे. मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजी ने दौड़कर उन्हें हृदय से लगा लिया और प्रेम में उमंगकर वे दोनों भाइयों से मिले, फिर प्रेम से पुलकित होकर केवट ने अपना नाम लेकर दूर से ही वसिष्ठजी को दंडवत प्रणाम किया. ऋषि वसिष्ठजी ने रामसखा जानकर उसको जबर्दस्ती हृदय से लगा लिया. मानो जमीन पर लोटते हुए प्रेम को समेट लिया हो. श्रीरघुनाथजी की भक्ति सुंदर मंगलों का मूल है, इस प्रकार कहकर सराहना करते हुए देवता आकाश से फूल बरसाने लगे. वे कहने लगे- जगत में इसके समान सर्वथा नीच कोई नहीं और वसिष्ठजी के समान बड़ा कौन हैं?

जिस (निषाद) को देखकर मुनिराज वसिष्ठजी लक्ष्मणजी से भी अधिक उससे आनन्दित होकर मिले. यह सब सीतापति श्रीरामचंद्रजी के भजन का प्रत्यक्ष प्रताप और प्रभाव है. दया की खान, सुजान भगवान श्रीरामजी ने सब लोगों को दुखी (मिलनेके लिए व्याकुल ) जाना. तब जो जिस भाव से मिलने का अभिलाषी था, उस उसका उस-उस प्रकार का रुख रखते हुए उन्होंने लक्ष्मणजी सहित पलभर में सब किसी से मिलकर उनके दुख और कठिन संताप को दूर कर दिया. श्रीरामचंद्रजी के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है. जैसे करोड़ों घड़ों में एक ही सूर्य की छाया एक साथ ही दिखती है. समस्त पुरवासी प्रेम में उमंगकर केवट से मिलकर उसके भाग्य की सराहना करते हैं. श्रीरामचंद्रजी ने सब माताओं को दुखी देखा. मानो सुंदर लताओं की पंक्तियों को पाला मार गया हो. सबसे पहले रामजी कैकेयी से मिले और अपने सरल स्वभाव तथा भक्ति से उसकी बुद्धि को तर कर दिया. फिर चरणों में गिरकर काल, कर्म और विधाता के सिर दोष मंढ़कर, श्रीरामजी ने उनको सान्त्वना दी. फिर श्रीरघुनाथजी सब माताओं से मिले. उन्होंने सबको समझा-बुझाकर सन्तोष कराया कि हे माता! जगत ईश्वर के अधीन है, किसी को भी दोष नहीं देना चाहिए. फिर दोनों भाइयों ने ब्राह्मणों की स्त्रियों सहित जो भरतजी के साथ आई थीं, गुरुजी की पत्नी अरुन्धतीजी के चरणों की वन्दना की और उन सबका गंगाजी तथा गौरीजी के समान सम्मान किया. वे सब आनन्दित होकर कोमल वाणी से आशीर्वाद देने लगीं.


तब दोनों भाई पैर पकड़कर सुमित्राजी की गोद में जा चिपटे. मानो किसी अत्यंत दरिद्र को सम्पत्ति से भेंट हो गई हो. फिर दोनों भाई माता कौसल्याजी के चरणों में गिर पड़े. प्रेम के मारे उनके सारे अंग शिथिल हैं. बड़े ही स्नेह से माता ने उन्हें हृदय से लगा लिया और नेत्रों से बहे हुए प्रेमाश्रुओं के जल से उन्हें नहला दिया. उस समय के हर्ष और विषाद को कवि कैसे कहे? श्रीरघुनाथजी ने छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित माता कौशल्या से मिलकर गुरु से कहा कि आश्रम पर पधारिए. तदनन्तर मुनीश्वर वसिष्ठजी की आज्ञा पाकर अयोध्यावासी सब लोग जल और थल का सुभीता देख-देखकर उतर गए. ब्राह्मण, मन्त्री, माताएं और गुरु आदि गिने-चुने लोगों को साथ लिए हुए, भरतजी, लक्ष्मणजी और श्रीरघुनाथजी पवित्र आश्रम को चले. सीताजी आकर मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजी के चरणों लगीं और उन्होंने मनमांगी उचित आशीष पाई. फिर मुनियों की स्त्रियों सहित गुरुपत्नी अरुन्धतीजी से मिलीं. उनका जितना प्रेम था, वह कहा नहीं जाता. सीताजी ने सभी के चरणों की अलग-अलग वन्दना करके अपने हृदय को प्रिय (अनुकूल) लगने वाले आशीर्वाद पाए. जब सुकुमारी सीताजी ने सब सासों को देखा, तब उन्होंने सहमकर अपनी आंखें बंद कर लीं. सासों की बुरी दशा देखकर उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ मानो राजहंसिनियां बधिक के वश में पड़ गई हों. मन में सोचने लगीं कि कुचाली विधाता ने क्या कर डाला? उन्होंने भी सीताजी को देखकर बड़ा दुख पाया. सोचा जो कुछ देव सहावे, वह सब सहना ही पड़ता है.

तब जानकीजी हृदय में धीरज धरकर, नील कमल के समान नेत्रों में जल भरकर, सब सासों से जाकर मिलीं. उस समय पृथ्वी पर करुणा छा गई. सीताजी सबके पैरों लग-लगकर अत्यंत प्रेम से मिल रही हैं, और सब सासें स्नेहवश हृदय से आशीर्वाद दे रही हैं कि तुम सुहाग से भरी रहो. सीताजी और सब रानियां स्नेह के मारे व्याकुल हैं. तब ज्ञानी गुरु ने सबको बैठ जाने के लिए कहा. फिर मुनिनाथ वसिष्ठजी ने जगत की गति को मायिक कहकर कुछ परमार्थ की कथाएं कहीं. तदनन्तर वसिष्ठजी ने राजा दशरथजी के स्वर्गगमन की बात सुनाई, जिसे सुनकर रघुनाथजी ने दुख पाया. और अपने प्रति उनके स्नेह को उनके मरने का कारण विचारकर धीरधुरन्धर श्रीरामचंद्रजी अत्यंत व्याकुल हो गए. वज्र के समान कठोर, कड़वी वाणी सुनकर लक्ष्मणजी, सीताजी और सब रानियां विलाप करने लगीं. सारा समाज शोक से अत्यंत व्याकुल हो गया! मानो राजा आज ही मरे हों. फिर मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजी ने श्रीरामजी को समझाया. तब उन्होंने समाजसहित श्रेष्ठ नदी मन्दाकिनीजी में स्नान किया. उस दिन प्रभु श्रीरामचंद्रजी ने निर्जल व्रत किया. मुनि वसिष्ठजी के कहने पर भी किसी ने जल ग्रहण नहीं किया.

Quiz: लक्ष्मण जी किसके वार से मूर्छित हो गए थे? क्लिक कर बताइए

दूसरे दिन सबेरा होने पर मुनि वसिष्ठजी ने श्रीरघुनाथजी को जो-जो आज्ञा दी, वह सब कार्य प्रभु श्रीरामचंद्रजी ने श्रद्धा-भक्तिसहित आदर के साथ किया. वेदों में जैसा कहा गया है, उसी के अनुसार पिता की क्रिया करके, पापरूपी अन्धकार के नष्ट करने वाले सूर्यरूप श्रीरामचंद्रजी शुद्ध हुए! जिनका नाम पापरूपी रूई के लिए अग्नि है; और जिनका स्मरणमात्र समस्त शुभ मंगलों का मूल है, वे (नित्य शुद्ध-बुद्ध) भगवान श्रीरामजी शुद्ध हुए. साधुओं की ऐसी सम्मति है कि उनका शुद्ध होना वैसे ही है जैसा तीर्थों के आवाहन से गंगाजी शुद्ध होती हैं! जब शुद्ध हुए दो दिन बीत गए तब श्रीरामचंद्रजी प्रीति के साथ गुरुजी से बोले- हे नाथ! सब लोग यहां अत्यंत दुखी हो रहे हैं. कन्द, मूल, फल और जल का ही आहार करते हैं. भाई शत्रुघ्न सहित भरत को, मन्त्रियों को और सब माताओं को देखकर मुझे एक-एक पल युग के समान बीत रहा है. अतः सबके साथ आप अयोध्यापुरी को पधारिए (लौट जाइए). आप यहां हैं, और राजा अमरावती (स्वर्ग) में हैं अयोध्या सूनी है! मैंने बहुत कह डाला, यह सब बड़ी ढिठाई की है. हे गोसाईं! जैसा उचित हो, वैसा ही कीजिए. वसिष्ठजी ने कहा- हे राम! तुम धर्म के सेतु और दया के धाम हो, तुम भला ऐसा क्यों न कहो? लोग दुखी हैं. दो दिन तुम्हारा दर्शन कर शान्ति लाभ कर लें. श्रीरामजी के वचन सुनकर सारा समाज भयभीत हो गया. मानो बीच समुद्र में जहाज डगमगा गया हो. परंतु जब उन्होंने गुरु वसिष्ठजी की श्रेष्ठ कल्याणमूलक वाणी सुनी, तो उस जहाज के लिए मानो हवा अनुकूल हो गई.


सब लोग पवित्र पयस्विनी नदी में तीनों समय (सबेरे, दोपहर और सायंकाल) स्नान करते हैं, जिसके दर्शन से ही पापों के समूह नष्ट हो जाते हैं और मंगलमूर्ति श्रीरामचंद्रजी को दंडवत प्रणाम कर-करके उन्हें नेत्र भर-भरकर देखते हैं. सब श्रीरामचंद्रजी के पर्वत (कामदगिरि) और वन को देखने जाते हैं, जहां सभी सुख हैं और सभी दुखों का अभाव है. झरने अमृत के समान जल झरते हैं और तीन प्रकार की (शीतल, मन्द, सुगन्ध) हवा तीनों प्रकार के (आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक) तापों को हर लेती है. असंख्य जाति के वृक्ष, लताएं और तृण हैं तथा बहुत तरह के फल, फूल और पत्ते हैं. सुंदर शिलाएं हैं. वृक्षों की छाया सुख देने वाली है. वन की शोभा किससे वर्णन की जा सकती है? तालाबों में कमल खिल रहे हैं, जल के पक्षी कूज रहे हैं, भौरे गुंजार कर रहे हैं और बहुत रंगों के पक्षी और पशु वन में वैररहित होकर विहार कर रहे हैं. कोल, किरात और भील आदि वन के रहने वाले लोग पवित्र, सुंदर एवं अमृत के समान स्वादिष्ट मधु को सुंदर दोने बनाकर और उनमें भर-भरकर तथा कन्द, मूल, फल और अंकुर आदि की जूड़ियों को, सबको विनय और प्रणाम करके उन चीजों के अलग-अलग स्वाद, भेद, गुण और नाम बता-बताकर देते हैं. लोग उनका बहुत दाम देते हैं, पर वे नहीं लेते और लौटा देने में श्रीरामजी की दुहाई देते हैं.

प्रेम में मग्न हुए वे कोमल वाणी से कहते हैं कि साधु लोग प्रेम को पहचानकर उसका सम्मान करते हैं. आप तो पुण्यात्मा हैं, हम नीच निषाद हैं. श्रीरामजी की कृपा से ही हमने आप लोगों के दर्शन पाए हैं. हम लोगों को आपके दर्शन बड़े ही दुर्लभ हैं, जैसे मरुभूमि के लिए गंगाजी की धारा दुर्लभ है! देखिए, कृपालु श्रीरामचंद्रजी ने निषाद पर कैसी कृपा की है. जैसे राजा हैं वैसा ही उनके परिवार और प्रजा को भी होना चाहिए. हृदय में ऐसा जानकर संकोच छोड़कर और हमारा प्रेम देखकर कृपा कीजिए और हमको कृतार्थ करने के लिए ही फल, तृण और अंकुर लीजिए. आप प्रिय पाहुने वन में पधारे हैं. आपकी सेवा करने के योग्य हमारे भाग्य नहीं हैं. हे स्वामी! हम आपको क्या देंगे? भीलों की मित्रता तो बस, ईंधन (लकड़ी) और पत्तों ही तक है. हमारी तो यही बड़ी भारी सेवा है कि हम आपके कपड़े और बर्तन नहीं चुरा लेते. हम लोग जड़ जीव हैं, जीवों की हिंसा करने वाले हैं, कुटिल, कुचाली, कुबुद्धि और कुजाति हैं. हमारे दिन-रात पाप करते ही बीतते हैं. तो भी न तो हमारी कमर में कपड़ा है और न पेट ही भरते हैं. हममें स्वप्न में भी कभी धर्मबुद्धि कैसी? यह सब तो श्रीरघुनाथजी के दर्शन का प्रभाव है. जबसे प्रभु के चरणकमल देखे, तबसे हमारे दुख और दोष मिट गए. वनवासियों के वचन सुनकर अयोध्या के लोग प्रेम में भर गए और उनके भाग्य की सराहना करने लगे.


सब उनके भाग्य की सराहना करने लगे और प्रेम के वचन सुनाने लगे. उन लोगों के बोलने और मिलने का ढंग तथा श्रीसीतारामजी के चरणों में उनका प्रेम देखकर सब सुख पा रहे हैं. उन कोल-भीलों की वाणी सुनकर सभी नर-नारी अपने प्रेम का निरादर करते हैं. तुलसीदासजी कहते हैं कि यह रघुवंशमणि श्रीरामचंद्रजी की कृपा है कि लोहा नौका को अपने ऊपर लेकर तैर गया. सब लोग दिनोदिन परम आनन्दित होते हुए वन में चारों ओर विचरते हैं, जैसे पहली वर्षा के जल से मेंढक और मोर मोटे हो जाते हैं. अयोध्यापुरी के पुरुष और स्त्री सभी प्रेम में अत्यंत मग्न हो रहे हैं. उनके दिन पल के समान बीत जाते हैं. जितनी सासें थीं, उतने ही वेष (रूप) बनाकर सीताजी सब सासों की आदरपूर्वक एक-सी सेवा करती हैं. श्रीरामचंद्रजी के सिवा इस भेद को और किसी ने नहीं जाना. सब मायाएं श्रीसीताजी की माया में ही हैं. सीताजी ने सासों को सेवा से वश में कर लिया. उन्होंने सुख पाकर सीख और आशीर्वाद दिए. सीताजी समेत दोनों भाइयों (श्रीराम-लक्ष्मण) को सरल स्वभाव देखकर कुटिल रानी कैकेयी भरपेट पछताई. वह पृथ्वी तथा यमराज से याचना करती है, किन्तु धरती बीच (फटकर समा जाने के लिए रास्ता) नहीं देती और विधाता मौत नहीं देता. लोक और वेद में प्रसिद्ध है और कवि (ज्ञानी) भी कहते हैं कि जो श्रीरामजी से विमुख हैं उन्हें नरक में भी ठौर नहीं मिलती. सबके मन में यह सन्देह हो रहा था कि हे विधाता! श्रीरामचंद्रजी का अयोध्या जाना होगा या नहीं.



Source link

Tags: आगबबलआतकगएगससजबदखभरतजमलकषमणजवनसह
Share198Tweet124Send

Related Posts

Aaj Ka Shabd Pash Mahadevi Verma Poem Rupasi Tera Ghan Kesh – Amar Ujala Kavya – आज का शब्द:पाश और महादेवी वर्मा की कविता
Hindi News

Aaj Ka Shabd Pash Mahadevi Verma Poem Rupasi Tera Ghan Kesh – Amar Ujala Kavya – आज का शब्द:पाश और महादेवी वर्मा की कविता

January 27, 2026
IMD Weather Update Today snowfall Uttarakhand himachal jammu kashmir cold Wave Alert Rajasthan UP MP rain
Hindi News

IMD Weather Update Today snowfall Uttarakhand himachal jammu kashmir cold Wave Alert Rajasthan UP MP rain

January 26, 2026
Aaj Ka Meen Rashifal 27 January 2026: अपने खर्चों को कंट्रोल करें, मन में नेगेटिव विचारों को बढ़ाने ना दें
Hindi News

Aaj Ka Meen Rashifal 27 January 2026: अपने खर्चों को कंट्रोल करें, मन में नेगेटिव विचारों को बढ़ाने ना दें

January 26, 2026
गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के माता-पिता श्री मुक्तसर साहिब से गिरफ्तार, 2024 के मामले में हुई कार्रवाई
Hindi News

गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के माता-पिता श्री मुक्तसर साहिब से गिरफ्तार, 2024 के मामले में हुई कार्रवाई

January 26, 2026
Load More
  • Trending
  • Comments
  • Latest
9 Festivals to Celebratein August in India

9 Festivals to Celebratein August in India

August 8, 2025
Corruption cases against govt officials: SC bats for striking balance | Latest News India

Corruption cases against govt officials: SC bats for striking balance | Latest News India

August 5, 2025
Guru Randhawa – SIRRA ( Official Video )

Guru Randhawa – SIRRA ( Official Video )

July 1, 2025
Baharon Phool Barsao – Suraj – Rajendra Kumar, Vyjayanthimala – Old Hindi Songs

Baharon Phool Barsao – Suraj – Rajendra Kumar, Vyjayanthimala – Old Hindi Songs

0
Phool Maangu Na Bahaar Maangu – Video Song | Raja | Madhuri Dixit & Sanjay Kapoor

Phool Maangu Na Bahaar Maangu – Video Song | Raja | Madhuri Dixit & Sanjay Kapoor

0
Dil Ka Rishta Song – Aishwarya Rai,Arjun Rampal, Alka Yagnik,Udit Narayan,Kumar Sanu, Nadeem-Shravan

Dil Ka Rishta Song – Aishwarya Rai,Arjun Rampal, Alka Yagnik,Udit Narayan,Kumar Sanu, Nadeem-Shravan

0
Us Iran Tensions: Fragile ceasefire faces fresh test as missiles keep flying as Iran, US trade new blows: Key details

Us Iran Tensions: Fragile ceasefire faces fresh test as missiles keep flying as Iran, US trade new blows: Key details

June 1, 2026
Madhuri Dixit Defends Aishwarya Rai Bachchan After Cannes 2026 Trolling, Says ‘Cannot Reduce Her To…’

Madhuri Dixit Defends Aishwarya Rai Bachchan After Cannes 2026 Trolling, Says ‘Cannot Reduce Her To…’

June 1, 2026
Indian Stock Market Outlook: RBI Policy, US-Iran Tensions, Crude Oil Prices to Influence Trends

Indian Stock Market Outlook: RBI Policy, US-Iran Tensions, Crude Oil Prices to Influence Trends

June 1, 2026
India News Online

24x7 Online News From India
India News Online is your news, entertainment, music fashion website. We provide you with the latest breaking news and videos straight from the entertainment industry.

Categories

  • Business
  • Entertainment
  • Health
  • Hindi News
  • Hindi Songs
  • India
  • International
  • Lifestyle
  • Panjab
  • Politics
  • Punjabi Songs
  • Sports
  • Technology
  • Travel
  • Uncategorized
No Result
View All Result

Recent Posts

  • Us Iran Tensions: Fragile ceasefire faces fresh test as missiles keep flying as Iran, US trade new blows: Key details
  • Madhuri Dixit Defends Aishwarya Rai Bachchan After Cannes 2026 Trolling, Says ‘Cannot Reduce Her To…’
  • Indian Stock Market Outlook: RBI Policy, US-Iran Tensions, Crude Oil Prices to Influence Trends
  • Home
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Privacy Policy
  • Cookie Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact

Copyright © 2021 - India News Online.

No Result
View All Result
  • Home
  • News
    • India
    • Punjab
    • International
    • Entertainment
  • Hindi News
  • Politics
  • Health
  • Business
  • Sports
  • Technology
  • Lifestyle
  • Video
  • Travel
  • Game

Copyright © 2021 - India News Online.