कैथल के बालू गांव के किसान राजबीर ने जनवरी 2024 में घर की छत पर 1.30 लाख रुपये से दो किलोवाट का सौर संयंत्र लगवाया। इसमें केंद्र और राज्य सरकार से 1.10 लाख रुपये सब्सिडी मिलने के बाद उन्हें करीब 20 हजार रुपये खर्च करने पड़े। इसके बाद से 30 माह से उनके घर का बिजली बिल शून्य आ रहा है।
पहले करीब 800 रुपये महीना बिजली बिल आता था। ऐसे में अब तक करीब 24 हजार रुपये की बचत हो चुकी है। इसी गांव के सतीश ने अगस्त 2024 में अपने घर की छत पर दो किलोवाट का सौर संयंत्र लगवाया। पहले उनका बिजली बिल प्रति माह करीब एक हजार रुपये आता था। सौर संयंत्र लगने के बाद करीब दो साल से बिल शून्य है।
कैथल का बालू गांव हरियाणा का पहला सौर ऊर्जा मॉडल गांव है। करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में सौर ऊर्जा अब घर-घर की पहचान बन गई है। गांव में करीब तीन हजार घर हैं। इनमें से 2,690 घरों की छत या साथ लगते खेतों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। यानी करीब 90 प्रतिशत घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं और बिजली बिल में बड़ी बचत कर रहे हैं।
हर माह 6.73 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन
बालू गांव की सरपंच मीना रानी के पति साहिल ने बताया कि दो किलोवाट के सौर ऊर्जा संयत्र से एक महीने में औसतन 250 यूनिट बिजली बन जाती है। 2,690 घरों के हिसाब से गांव में हर माह करीब 6.73 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। पांच रुपये प्रति यूनिट की औसत दर से इस बिजली का मूल्य करीब 33.63 लाख रुपये है। सालाना उत्पादन करीब 80.7 लाख यूनिट और इसका मूल्य करीब 4.04 करोड़ रुपये बैठता है।






















