उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की अलग राजनीतिक स्टाइल है. यह तौर-तरीका न सिर्फ उनके करीबियों बल्कि कई बार उनके विरोधियों तक को हैरान करता है. मायावती कब किसे बसपा से बाहर का रास्ता दिखाकर पैदल कर दें और कब किसे फर्श से अर्श पर पहुंचा दें, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है.
मायावती की इस अलग स्टाइल का शिकार उनकी पार्टी के कई दिग्गज हो चुके हैं और अब इस फेहरिस्त में एक बार फिर से आकाश आनंद का नाम जुड़ा है. लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में पार्टी बैठक के दौरान मायावती ने अपने भतीजे और चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को पद से हटाकर पार्टी कार्यकर्ता की भूमिका में लाकर खड़ा कर दिया है.
यह तीसरा मौका है जब आकाश आनंद को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. वहीं, इस बैठक में आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद की मौजूदगी ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती आखिर आकाश आनंद पर क्यों भरोसा नहीं जता पा रही हैं और क्यों सारे पद छीनकर पैदल कर दिया है?
आकाश आनंद पर मायावती की गिरी गाज
बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आकाश आनंद को सभी पदों से हटाने का ऐलान किया. आनंद अब तक बसपा में नेशनल कोऑर्डिनेटर थे. मायावती ने कहा कि आकाश आनंद अभी मैच्योर नहीं हैं और उन्हें अभी और ज्यादा परिपक्व होने की जरूरत है, इसलिए फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी. एक तरह से मायावती ने सियासी तौर पर आकाश आनंद को ‘पैदल’ कर दिया है.
सवा दो साल पहले मायावती ने जब आकाश आनंद को हटाया था तो ऐसे ही शब्दों का प्रयोग किया था. मायावती ने अपने सगे भतीजे आकाश आनंद को पहले अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर ‘अर्श’ पर बिठाया, लेकिन फिर राष्ट्रीय संयोजक के बड़े पद से हटा भी दिया था. इसके बाद दोबारा पार्टी में लिया और नंबर दो की पोजिशन सौंपी. अब बसपा प्रमुख मायावती ने दोबारा स्पष्ट किया कि आकाश आनंद अभी परिपक्व नहीं हैं और उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.
बसपा की प्रेस विज्ञप्ति में मायावती के हवाले से कहा गया, “मैंने आकाश आनंद को पार्टी में कार्य करने की जो इजाजत दी है, वह हकीकत आप सभी लोगों के सामने है. लेकिन आकाश आनंद को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है. तब तक उनको बसपा में अभी बड़ी जिम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुंचाने से बचने के लिए समय की जरूरत भी है.”
मायावती ने आकाश को क्यों किया पैदल
मायावती ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर यह बात कही है कि आकाश आनंद को तब तक बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखा जाएगा जब तक वे पूर्ण राजनीतिक परिपक्वता हासिल नहीं कर लेते. हालांकि, बसपा सूत्रों की मानें तो मायावती जैसी बात कह रही हैं, मामला सिर्फ उतना नहीं है. आकाश आनंद का राजनीतिक तौर-तरीका मायावती को पसंद नहीं आ रहा है. मायावती चाहती हैं कि आकाश बहुत सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखें और बीजेपी और आरएसएस पर सीधा हमला करने से बचें.
आकाश आनंद बदले हुए सियासी माहौल में आक्रामक तरीके से राजनीति कर बसपा के खिसकते सियासी आधार को रोकना चाहते हैं. वे आरक्षण से लेकर दलित मुद्दों पर आक्रामक सियासत करना चाहते हैं. आकाश का यही तेवर मायावती को पसंद नहीं आ रहा है. हाथरस रैली में आकाश आनंद ने भाजपा और मोदी-योगी सरकार के खिलाफ काफी तीखा और आक्रामक भाषण दिया था.
मोहन भागवत को टारगेट पर लेना पड़ा मंहगा?
लखनऊ के दलित कैब ड्राइवर अंकित कुमार के समर्थन में उतरकर आकाश आनंद ने सिर्फ कैब कंपनी की कार्यशैली पर ही सवाल नहीं उठाए थे, बल्कि जातिवाद को लेकर एक नई बहस छेड़ दी थी. उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी दलितों को लेकर तीखे सवाल पूछे थे. आकाश आनंद ने कहा था कि रैपिडो जैसी बड़ी कंपनियां भी आज उसी संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित हैं, जिसे जड़ से खत्म करने के लिए बहुजन समाज पिछले कई दशकों से संघर्ष कर रहा है. उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी को फैसला लेने से पहले सभी पक्षों की बात सुननी चाहिए.
मोहन भागवत पर सीधा निशाना साधते हुए आकाश आनंद ने कहा था कि आरक्षण खत्म करने पर अपनी राय रखने वाले संघ प्रमुख मोहन भागवत जी को अंकित जैसे करोड़ों दलित युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए.
उन्होंने कहा था कि देश की आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी जातिवाद की यही मानसिकता आज समाज में गहरी जड़ें जमाए बैठी है और इसे उखाड़ फेंकने के लिए ही आरक्षण बेहद जरूरी है. आकाश आनंद के इस ट्वीट को मायावती ने बाद में हटवा दिया था. माना जा रहा है कि संघ प्रमुख को निशाने पर लिए जाने के चलते ही मायावती ने आकाश आनंद से सारे पद छीन लिए हैं.
क्या आकाश आनंद का विकल्प ईशान बनेंगे?
मायावती ने चार दिन पहले बुलाई गई बैठक और गुरुवार की बैठक में आकाश आनंद को बुलाया तक नहीं था. हालांकि, बैठक में उनके भाई आनंद कुमार और दूसरे भतीजे ईशान आनंद मौजूद रहे. गुरुवार को आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से भी हटा दिया गया. लगातार तीसरी बार लिए गए एक्शन के बाद बसपा में आकाश आनंद की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को बसपा से निष्कासित किए जाने के बाद से परिवार और संगठन में नए समीकरण बने हैं. मायावती बसपा और परिवार दोनों की कमान पूरी तरह अपने हाथों में रखना चाहती हैं. इसीलिए वक्त-वक्त पर पार्टी और परिवार में एक्शन लेकर सियासी संदेश देती रहती हैं.
बसपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि क्या मायावती अब आकाश आनंद की जगह अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को राजनीति में आगे बढ़ाने का प्लान बना रही हैं. बैठक में आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद नीले रंग का पटका पहने मायावती और अपने पिता आनंद कुमार के साथ मुख्य मंच पर उपस्थित रहे.
बसपा कैसे करेगी चंद्रशेखर का मुकाबला
ईशान आनंद, मायावती के भाई आनंद कुमार के छोटे बेटे हैं. उन्होंने लंदन की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर’ से कानून की पढ़ाई की है. 27 वर्षीय ईशान को मायावती ने इससे पहले अपने जन्मदिन के मौके पर सार्वजनिक रूप से कार्यकर्ताओं से मिलवाया था. पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि मायावती युवाओं और पढ़े-लिखे दलित कैडर को साधने के लिए ईशान को एक बैकअप चेहरे के रूप में तैयार कर रही हैं.
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले चंद्रशेखर आजाद जैसे युवा दलित नेताओं के प्रभाव को काउंटर करने के लिए बसपा को एक ऊर्जावान और बेदाग युवा चेहरे की जरूरत है. ऐसे में आकाश आनंद ही वह युवा चेहरा थे, जिन्हें आगे कर बसपा अपने खिसके हुए जनाधार को दोबारा हासिल कर सकती थी. लेकिन आकाश को हटाए जाने के बाद दलित युवाओं को साधने का दांव गड़बड़ा सकता है, क्योंकि ईशान आनंद ने राजनीति में आने का अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है. ऐसे में आकाश आनंद ही पार्टी के पास अहम विकल्प थे.
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