एमपॉक्स निकट संपर्क से फैल सकता है. आमतौर पर हल्का और दुर्लभ मामलों में यह घातक होता है. इससे फ्लू जैसे लक्षण और शरीर पर मवाद से भरे घाव हो जाते हैं. किसी बीमारी को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कन्सर्न’ (PHEIC), जो WHO का उच्चतम स्तर का अलर्ट है, के रूप में निर्धारित करने से उस बीमारी को रोकने के लिए रिसर्च, फंडिंग और अंतर्राष्ट्रीय उपायों और सहयोग में तेजी आ सकती है.
कांगो के पड़ोसी देशों में भी फैला एमपॉक्स
कांगो में प्रकोप की शुरुआत एक स्थानीय वेरिएंट से हुई जिसे क्लैड I के नाम से जाना जाता है. लेकिन एक नया वेरिएंट, क्लैड आईबी, यौन संपर्क सहित निकट संपर्क के माध्यम से ‘अधिक आसानी से’ फैलता नजर आ रहा है.
यह कांगो से बुरुंडी, केन्या, रवांडा और युगांडा सहित पड़ोसी देशों में फैल गया है, जिसके कारण डब्ल्यूएचओ अब हरकत में आ गया है. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने कहा, ‘स्पष्ट है कि इन प्रकोपों को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर कदम उठाने होंगे.’
2024 में अफ्रीका में मिले 17000 केस
इस हफ्ते की शुरुआत में, अफ्रीका की टॉप पब्लिक हेल्थ बॉडी ने चेतावनी के बाद एमपॉक्स को महाद्वीप के लिए इमरजेंसी घोषित कर दिया था. चेतावनी में कहा गया कि संक्रमण ‘खतरनाक दर’ से फैल रहा है.
अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कहा कि इस साल अब तक अफ्रीकी महाद्वीप पर 17,000 से अधिक संदिग्ध एमपॉक्स मामले और 517 मौतें दर्ज की गई हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में मामलों में 160 प्रतिशत की वृद्धि है. कुल 13 देशों में मामले सामने आए हैं.
2022 में भी फैला था वायरस
एमपॉक्स वायरस का एक वेरिएंट- क्लैड आईआईबी- 2022 में दुनियाभर में फैला था, मुख्य रूप से पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों के बीच यौन संपर्क के माध्यम से. तब WHO ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की थी, जो करीब 10 महीने बाद खत्म हुई थी.


























