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- Yemen’s Houthi Rebels Detain At Least 9 UN Staffers And Others In Sudden Crackdown, Officials Say
2 घंटे पहले
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यमन में हूती विद्रोहियों ने यूएन एजेंसी से जुड़े कम से कम 9 लोगों का अपहरण कर लिया है। अपहृत लोगों में यूएन ह्यूमन राइट्स एजेंसी, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के स्टाफ और यूएन के स्पेशल एम्बेसडर के कार्यालय में काम करने वाला एक व्यक्ति भी शामिल है। इसके अलावा एक स्टाफ की पत्नी का भी अपहरण कर लिया गया है।
न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक यूएन एजेंसी से जुड़े लोगों ने ये जानकारी दी। यूएन के रिजनल ऑफिसर्स ने नाम न बताने की शर्त पर न्यूज एजेंसी से किडनैप हुए लोगों की पुष्टि की है। फिलहाल न तो हूती विद्रोही और न ही यूएन ने आधिकारिक रूप से इस पर कोई जानकारी नहीं दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी और अन्य देशों की एयरस्ट्राइक्स की वजह से हूती विद्रोही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इससे पहले हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के लिए यमन में 44 लोगों को मौत की सजा भी दी थी।
यमन के ईरान समर्थक हूती विद्रोही लाल सागर और हिंद महासागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बना रहे हैं। ऐसा कर वे इजराइल पर गाजा में जंग रोकने का दबाव बना रहे हैं। इन हमलों से बचने के लिए नवंबर से दुनियाभर के कॉमर्शियल जहाज लाल सागर के बदले अफ्रीका से होते हुए गुजर रहे हैं।

लाल सागर से दुनिया का 10% व्यापार किया जाता है और एशिया-यूरोप का 40%।
इजराइल को टारगेट करना चाहते हैं हूती विद्रोही
पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने लाल सागर और उसके आसपास 100 से ज्यादा हमले किए हैं। फरवरी में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक कार्गो शिप गैलेक्सी लीडर को हाईजैक कर लिया था। यह जहाज तुर्किये से भारत आ रहा था। हूती विद्रोहियों ने इसे इजराइली जहाज समझ कर हाईजैक किया था।
वारदात से पहले हूती समूह ने इजराइली जहाजों पर हमले की चेतावनी दी थी। हूती विद्रोहियों के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा था कि इजराइल की तरफ से चलने वाले सभी जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।
कौन हैं हूती विद्रोही
- साल 2014 में यमन में गृह युद्ध शुरू हुआ। इसकी जड़ शिया-सुन्नी विवाद है। कार्नेजी मिडिल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों समुदायों में हमेशा से विवाद था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत से गृह युद्ध में बदल गया। 2014 में शिया विद्रोहियों ने सुन्नी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
- इस सरकार का नेतृत्व राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी कर रहे थे। हादी ने अरब क्रांति के बाद लंबे समय से सत्ता पर काबिज पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से फरवरी 2012 में सत्ता छीनी थी। हादी देश में बदलाव के बीच स्थिरता लाने के लिए जूझ रहे थे। उसी समय सेना दो फाड़ हो गई और अलगाववादी हूती दक्षिण में लामबंद हो गए।
- अरब देशों में दबदबा बनाने की होड़ में ईरान और सऊदी अरब भी इस गृह युद्ध में कूद पड़े। एक तरफ हूती विद्रोहियों को शिया बहुल देश ईरान का समर्थन मिला। तो सरकार को सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब का।
- देखते ही देखते हूती के नाम से मशहूर विद्रोहियों ने देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 2015 में हालात ये हो गए थे कि विद्रोहियों ने पूरी सरकार को निर्वासन में जाने पर मजबूर कर दिया था।











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