लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि चंडीगढ़ में मानसिक रूप से दिव्यांग वयस्कों के लिए बनाया गया पहला ग्रुप होम अब शुरू कर दिया गया है। इस सुविधा को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि भवन निर्माण पूरा हो जाने के बावजूद इसे इतने वर्षों तक चालू क्यों नहीं किया गया और आखिरकार इस देरी की जिम्मेदारी किस पर तय होगी।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सरकार से सवाल किया था कि 2021 में निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद यह सुविधा अब तक शुरू क्यों नहीं हुई और देरी की जिम्मेदारी किसकी है। जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि ग्रुप होम अब चालू है। इस परियोजना पर लगभग 24 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि ग्रुप होम में कुल 37 आवेदन आए थे, जिनमें से 7 पात्र लाभार्थियों का चयन किया गया है। फिलहाल कोई वेटिंग लिस्ट नहीं है। यह सुविधा मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 19 के तहत शुरू की गई है। मंत्रालय ने कहा कि दिव्यांगजनों की योजनाओं की निगरानी के लिए संस्थागत तंत्र पहले से मौजूद है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य आयुक्त (दिव्यांगजन अधिकार) और राज्यों में राज्य आयुक्त निगरानी करते हैं। इसके अलावा केंद्रीय सलाहकार बोर्ड और राज्य सलाहकार बोर्ड भी नीतियों व कार्यक्रमों की समीक्षा और मूल्यांकन करते हैं। हालांकि देरी के कारणों और जिम्मेदारी तय करने पर सरकार की तरफ से कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया।




























