
यह जमीन रिकॉर्ड में दो लोगों के नाम पर दर्ज है।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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खनन के लिए डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार करने के दौरान खनन विभाग ने नरोट जैमल सिंह ब्लॉक की गोल पंचायत में अलग-अलग लोगों की 470 एकड़ जमीन महज दो व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी। इसका खुलासा डिप्टी कमिश्नर की ओर से करवाई गई जांच में हुआ। राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद पिछले माह खनन विभाग की अप्रेजल कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि यह सारी जमीन पठानकोट के दो नामी क्रशर कारोबारियों के नाम दर्ज कर दी गई है।
रिपोर्ट में सीरियल नं. 45 से 64 तक निपुण महाजन के नाम पर 384 एकड़ जमीन दिखाई गई है, जबकि विपन गुप्ता के नाम 86 एकड़ जमीन दर्ज की गई है। अलग-अलग लोगों की मालिकाना हक वाली इस जमीन पर रेत-बजरी के लिए खनन होना था।
गड़बड़ी सामने आने पर मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने पूरे मामले की जांच कर डिप्टी कमिश्नर पठानकोट से रिपोर्ट तलब की थी। जांच में पाया गया कि खनन के लिए अलग-अलग जमीन मालिकों की जमाबंदी विभाग को उपलब्ध कराई गई थी लेकिन जमीन मालिक वाले कॉलम में इन लोगों के बजाय विपन गुप्ता और निपुण महाजन का ही नाम दर्ज है। पंजाब लैंड रिफॉर्म एक्ट 1972 की धारा 4 के तहत एक व्यक्ति के नाम पर 16 एकड़ से अधिक जमीन नहीं होनी चाहिए।
मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी: डीसी
डीसी हरबीर सिंह ने बताया कि मामले की जांच करके रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजी गई है। खनन विभाग की गलती से लोगों की 470 एकड़ जमीन कारोबारियों विपन गुप्ता और निपुण महाजन के नाम पर दर्ज हो गई थी। इसकी सूचना खनन विभाग को भी दी गई है। सरकार जल्द ही इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगी।
पहले 100 एकड़ जमीन में गड़बड़ी पर नौ लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
इससे पहले भी नरोट जैमल सिंह ब्लॉक की गोल पंचायत में जमीन मामले में गड़बड़ी हो चुकी है। पंचायत की 100 एकड़ जमीन तत्कालीन एडीसी कुलदीप सिंह ने रिटायर होने के एक दिन पहले सात प्राइवेट पार्टियों के नाम कर दी थी। जांच के बाद कुलदीप सिंह समेत नौ लोगों के खिलाफ विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की थी। इस केस में कुलदीप सिंह समेत कुछ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।



























