
सांकेतिक तस्वीर।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या के दोषी करार और फांसी की सजा पाने वाले व्यक्ति की अपील पर फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता को बरी करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा कि यह प्यार के लिए परिवार की हत्या का मामला है।
पुलिस की थ्योरी के मुताबिक मुक्तसर का पलविंदर 20 जून, 2015 को अपनी पत्नी सरबजीत कौर, बेटी गगनप्रीत कौर, बेटे जशनप्रीत सिंह और हेल्पर निर्मल सिंह को अपनी कार में ले गया। वापस जाते समय वह कार से बाहर कूद गया कार को गंग नहर में धकेल दिया। उनकी पत्नी, बच्चे और सहायक सभी की डूबने से मृत्यु हो गई। उसने इसे दुर्घटना बताया और फिर निर्मल सिंह की विधवा करमजीत कौर के साथ रहना शुरू कर दिया।
22 अक्तूबर, 2020 को ट्रायल कोर्ट ने याची पलविंदर और कर्मजीत कौर को याची की पत्नी व बच्चों की हत्या का दोषी करार दिया था। याची को फांसी की सजा सुनाई गई थी तो वहीं कर्मजीत कौर को उम्रकैद की। अदालत ने इस मामले को दुर्लभतम मामलों में से एक बताया था। पुलिस की थ्योरी को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने माना है कि ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं आया है जिससे पता चले कि अपीलकर्ता पलविंदर और करमजीत कौर रिश्ते में थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पलविंदर सिंह ने मारुति कार 11000 रुपये में कबाड़ी को बेच दी थी जिसे अदालत ने सबूत मिटाने का प्रयास माना। जबकि कबाड़ी विजय कुमार जिसने इसे खरीदा था उसके अनुसार पलविंदर सिंह ने कार इसलिए बेची थी क्योंकि इससे उसका परिवार बर्बाद हो गया था और जब भी वह कार देखता था तो उसे पारिवारिक पल याद आ जाते थे। इस भावनात्मक पहलू ने अपीलकर्ता आरोपी पलविंदर सिंह को परेशान कर दिया था, जिसके कारण कार की बिक्री हुई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराने के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का सहारा लिया है, जो हमें लगता है कि उचित नहीं था।


























