2 मिनट पहले
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भारतीय मौसम वैज्ञानिक आने वाले 5 सालों में बारिश, ओला और बिजली को कन्ट्रोल कर सकेंगे। मिशन मौसम के तहत इंडिया क्लाइमेट स्मार्ट और वेदर रेडी बनेगा। साथ ही मौसम GPT ऐप लॉन्च करेगा।
यह चैट GPT जैसा एक एप्लीकेशन है जो यूजर को मौसम से रिलेटिड सभी जानकारी देगा। केंद्र सरकार ने इस मिशन के लिए 2000 करोड़ रूपए का फंड देने की मंजूरी दी है।
मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ एंड साइंस (MOES) के सेक्रेटरी एम रविचंद्रन ने इस प्लान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हम शुरू में प्रयोगात्मक आर्टिफिशियल रेन में बढ़ोतरी और कमी लाने पर काम करेंगे।

5 साल के भीतर आर्टिफिशियल वेदर मॉडिफिकेशन पर काम होगा एम रविचंद्रन ने आगे कहा कि जहां ज्यादा बारिश की जरूरत होगी बादलों को वहां क्लाउड सीडिंग की जाएगी। 5 साल के भीतर हम आर्टिफिशियल वेदर मॉडिफिकेशन पर काम करेंगे।’
15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के लिए लाखों लोग इकट्टे होते हैं। उस दिन अगर बारिश होती है, तो क्या उसे रोका जा सकता है, रविचंद्रन ने कहा, ‘मिशन मौसम के तहत हम वेदर फोरकास्टिंग सिस्टम में सुधार करेंगे, जिससे मौसम पूर्वानुमान की सटीकता 5% से 10% तक बढ़ सकती है। पहले से सटीक जानकारी होने पर बारिश को रोका जा सकेगा।’
मिशन मौसम से क्या फायदा होगा? मिशन मौसम से ज्यादा बारिश, बाढ़, बादल फटने और सूखा पड़ने जैसी मुसीबतों से बचा जा सकता है। इस मिशन से कृषि, आपदा प्रबंधन, रक्षा, एविएशन, एनर्जी, वाटर रिसोर्सेज और टूरिज्म सहित कई सेक्टर्स को फायदा होगा।
इसके तहत एडवांस्ड सेंसरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही नेक्स्ट जेनरेशन रडार और सैटेलाइट सिस्टम तैनात किए जाएंगे। हाई कैपेसिटी के सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाएगा। जीआईएस बेस्ड ऑटोमेटिक सपोर्टेड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

जिन जगहों पर बारिश कम होती है, वहां क्लाउड सीडिंग से बादल बरसेंगे। – सिम्बोलिक इमेज
मौसम GPT ऐप से मिलेगी सटीक जानकारी AI पर आधारित इस ऐप से मौसम से जुड़ी जानकारी ले सकेंगे। अब ऐसा नहीं होगा कि आप सुबह की धूप को देख कर प्लान बनाएं और बारिश उसे चौपट कर दे।
वहीं, किसानों के लिए इसके तहत एक आसान नंबर जारी किया जाएगा। उसे डायल कर किसान अपने एरिया के मौसम का पूर्वानुमान ले सकेंगे। यह जानकारी SMS के जरिए मिलेगी। ताकि जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है उन्हें भी यह जानकारी मिल सके।
कई देशों में पहले से तकनीक का प्रयोग अमेरिका, कनाडा, चीन, रूस, और ऑस्ट्रेलिया में एयरक्राफ्ट का उपयोग करके क्लाउड सीडिंग के माध्यम से बारिश को रोकने और बढ़ाने की तकनीकों का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है।
कुछ देशों में क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट का उद्देश्य फलों के बागों और अनाज के खेतों को नुकसान से बचाने के लिए ओलावृष्टि को कम करना है। भारत भी पहले से ही आर्टिफिशियल रेन बनाने की तकनीक का प्रयोग कर रहा है। इसमें एयरक्राफ्ट से बादलों के बीच केमिकल छोड़ा जाता है जिससे वे पानी में बदल जाते हैं और बारिश होती है। इसे क्लाउड सीडिंग कहते हैं।
महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर यह पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया है। यह एक रिसर्च प्रोग्राम- क्लाउड एरोसोल इंटरेक्शन एंड प्रीसिपिटेशन एन्हांसमेंट एक्सपेरीमेंट (CAIPEEX) के तहत किया जा रहा है।



























