अमरावती2 घंटे पहले
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देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि उनके ऊपर दबाव बनाने के लिए उनके परिवार वालों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। वे शनिवार को अमरावती स्थित VIT-AP यूनिवर्सिटी के पांचवें कन्वोकेशन में बोल रहे थे।
जस्टिस रमना ने आंध्र प्रदेश की पिछली वाईएसआरसीपी सरकार का नाम लिए बिना कहा कि संवैधानिक मूल्यों का पालन करने वाले न्यायपालिका के सदस्यों को भी दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा-

आप में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि मेरे परिवार को झूठे केसों में फंसाया गया, ताकि मुझ पर दबाव डाला जा सके। उस समय अमरावती के किसानों के साथ खड़े लोगों को भी डराया-धमकाया गया।

दरअसल, पूर्व सीजेआई 2019-24 के किसानों के उस आंदोलन का जिक्र कर रहे थे जिसमें किसान तब की वाईएस जगनमोहन रेड्डी सरकार के अमरावती की जगह तीन राजधानियां बनाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे।
रेड्डी सरकार ने विशाखापट्टनम को एडमिनिस्ट्रेटिव, अमरावती को लेजिस्लेटिव और कुरनूल को ज्यूडिशियल राजधानी बनाने का प्रस्ताव दिया था।

रमना बोले- किसी नेता ने किसानों का साथ नहीं दिया
उन्होंने कहा- जब कई पॉलिटिकल लीडर कोई स्टैंड लेने में हिचकिचा रहे थे, तब देश के ज्यूरिस्ट, वकील और न्यायपालिका अपने संवैधानिक वादे पर डटे रहे। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन अदालतें और कानून का राज देश की स्थिरता का आधार बने रहते हैं।
अमरावती से अपने जुड़ाव को याद करते हुए रमना ने कहा- मैं अमरावती के किसानों के जज्बे को सलाम करता हूं, जिन्होंने सरकारी दबाव के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से संघर्ष किया। वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायपालिका पर भरोसा बनाए हुए हैं, इसके लिए मैं उनका आभारी हूं।
आंध्र के किसानों का आंदोलन
आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती शिफ्ट करने के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगभग चार साल तक चला। आंदोलन 2019 में शुरू हुआ था। जून 2024 में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद किसानों ने अपना चार साल पुराना आंदोलन समाप्त कर दिया। किसान अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी बनाए जाने की मांग कर रहे थे।
जस्टिस रमना ने 1983 में वकालत शुरू की
जस्टिस रमना का जन्म 27 अगस्त 1957 को आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नवरम गांव में हुआ था। 10 फरवरी 1983 को उन्होंने वकालत की शुरुआत की। 27 जून 2000 को वे आंध्रप्रदेश के हाईकोर्ट में स्थायी जज के तौर पर नियुक्त हुए। जस्टिस रमना को फरवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।
उन्होंने 24 अप्रैल 2021 को देश के 48वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में अपना कार्यभार संभाल था। वे 26 अगस्त 2022 को रिटायर हुए थे।
जस्टिस रमना के चर्चित फैसले…
- जस्टिस रमना ने 10 जनवरी 2020 को जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था।
- वे उस ऐतिहासिक बेंच में भी शामिल थे, जिसने 13 नवंबर 2019 को CJI के ऑफिस को RTI के दायरे में लाने का फैसला दिया था।
- जस्टिस रमना और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने जनवरी 2021 में फैसला दिया कि किसी घरेलू महिला के काम का मूल्य उसके ऑफिस जाने वाले पति से कम नहीं है।
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