
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
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दिव्यांग सैनिकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के सेना के जवानों के प्रति रवैये पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा के समय देश सेना पर निर्भर होता है, तो दिव्यांग सैनिकों की अनदेखी क्यों की जा रही है।
हाईकोर्ट ने केजेएस बुट्टर के मामले में दिव्यांग सैनिकों को जारी विशेष पेंशन लाभ याचिकाकर्ताओं तक सीमित न रखते हुए सभी दिव्यांग सैनिकों के लिए लागूू करने को लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया था कि केजेएस बुट्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेवा के दौरान दिव्यांग सैनिकों की विशेष पेंशन को लेकर अहम आदेश जारी किया था। आदेश के अनुसार एक प्रतिशत दिव्यांगता की स्थिति में भी सैनिक 50 प्रतिशत विशेष पेंशन का हकदार होगा।
विशेष पेंशन एरियर को तीन साल तक सीमित क्यों किया गया
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि देश में जब भी आपदा की स्थिति होती है तो सभी की निगाहें सेना की ओर होती हैं। जब बात सेना के लिए कुछ करने की आती है, तो न जाने क्यों उनकी अनदेखी कर दी जाती है।
- हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि क्यों सुप्रीम कोर्ट के फैसले को केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित रखा गया है, जबकि इसका लाभ देशभर के दिव्यांग सैनिकों को दिया जाना चाहिए। आखिर क्यों विशेष पेंशन एरियर को 3 साल तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है, जबकि इसे 1 जनवरी 1996 से लागू किया जाना चाहिए था।



























