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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। देश में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू हुए सात साल से ज़्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इसके दायरे में घोटाले और फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहे। ताज़ा आंकड़ों से साफ है कि हर साल लगभग 20 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी घोटाला हो रहा है। इतना बड़ा घोटाला विभागीय मिलीभगत के बिना संभव नहीं लगता। अनुमान है कि सरकार को हर साल लगभग चार लाख करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है। यह राशि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 5 फीसदी और कुल राजस्व का 9 फीसदी हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गड़बड़ी से हर साल देश में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का काला धन बढ़ रहा है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर इस घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
पांच साल में 7.08 लाख करोड़
का घोटाला उजागर
फोरम के प्रधान बदीश जिंदल के अनुसार सीजीएसटी विभाग ने पिछले पांच वर्षों में तकरीबन 7.08 लाख करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी है। इसमें से 1.79 लाख करोड़ रुपये सिर्फ इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े फर्जीवाड़े में सामने आए। वित्त वर्ष 2024-25 में ही सीजीएसटी अधिकारियों ने 2.23 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी घोटाला पकड़ा, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 2.30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
देश में धड़ाधड़
रद्द हुए जीएसटी नंबर
देश में जीएसटी पंजीकरण के आँकड़े भी घोटालों की कहानी बयां कर रहे हैं। पिछले चार साल में कुल 62.58 लाख पंजीकरण रद्द किए गए। इसी अवधि में पंजीकरण की संख्या 1.16 करोड़ से बढ़कर 1.32 करोड़ हो गई। यानी 62.58 लाख कंपनियों के पंजीकरण रद्द करने के साथ-साथ 78.35 लाख नए जीएसटी नंबर जारी किए गए। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर रद्द किए गए पंजीकरण फर्जी बिलिंग करने वाली कंपनियों के थे और नए पंजीकरण भी बड़ी संख्या में इन्हीं कंपनियों ने नए नाम और पैन नंबर के आधार पर कराए।
दिल्ली से महाराष्ट्र तक फर्जी कंपनियों का जाल
राज्यों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सिर्फ दिल्ली में ही 3.69 लाख जीएसटी नंबर रद्द किए गए। उत्तर प्रदेश में 9 लाख, बिहार में 3.10 लाख, महाराष्ट्र में 6.95 लाख, गुजरात में 4.58 लाख, पश्चिम बंगाल में 2.39 लाख, और पंजाब में 1.14 लाख पंजीकरण रद्द हुए।
0.5 फीसदी घोटाले ही पकड़ पाए अधिकारी
विभाग ने अब तक 91,370 टैक्स चोरों को पकड़ा है, जिन्होंने 7.08 लाख करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की। लेकिन यह कुल घोटाले का महज़ 0.5 फीसदी हिस्सा है। चौंकाने वाली बात यह है कि चार साल में 62 लाख से अधिक कंपनियां बंद हो गईं, लेकिन कार्रवाई केवल कुछ हज़ार पर हुई। अब तक केवल 1,234 लोगों की गिरफ्तारी और 12,831 करोड़ रुपये की वसूली हुई है।
अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल
फोरम का कहना है कि पूरा जीएसटी तंत्र ऑनलाइन है, ऐसे में बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव नहीं। विभाग ने खुद लाखों फर्जी कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए और उन्हें क्लीन चिट भी दी। इसके बाद वही कंपनियां नए नाम से फिर खड़ी हो गईं। अधिकारियों पर आरोप है कि वे इन कंपनियों से रिश्वत लेकर माल पासिंग (बिना बिल माल भेजना) को बढ़ावा देते हैं। घोटाले का एक और पहलू नकली सामान है। बताया जा रहा है कि देश में बेचे जा रहे लगभग 20 फीसदी उत्पाद नकली हैं और इनके कारोबारी हर महीने अधिकारियों को हिस्सा देते हैं। विशेषज्ञों और कारोबारी संगठनों ने कहा है कि यदि हर साल होने वाले 20 लाख करोड़ रुपये के घोटालों को रोकना है तो इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।




























