प्रयागराज2 मिनट पहले
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महाकुंभ में चर्चा में आई हर्षा रिछारिया ने सुसाइड की धमकी दी है। सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने कहा- मैंने महाकुंभ से प्रतिज्ञा ली थी कि हिंदुत्व के लिए काम करूंगी। युवाओं को जागरूक करूंगी। धर्म संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम करूंगी। लेकिन, कुछ धर्म विरोधी लोग हमें रात-दिन आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।
पहले मेरे पुराने वीडियो को वायरल किया गया। अब इस हद तक उतर आए हैं कि AI से वीडियो एडिट कर सर्कुलेट किया जा रहा है। कुछ लोग मुझे रात-दिन आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। अगर मैं सुसाइड की तो मैं सबका नाम लिख कर जाउंगी।

एक वीडियो हर्षा रिछारिया ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें वह सुसाइड की धमकी दे रही हैं।
17 जनवरी को हर्षा रिछारिया ने महाकुंभ छोड़ा था पेशवाई के रथ पर बैठने के बाद चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने 17 जनवरी की शाम महाकुंभ क्षेत्र छोड़ दिया था। उनके पीए ने बताया कि मानसिक तनाव के चलते उन्होंने कुंभ क्षेत्र छोड़ने का फैसला किया है। अभी वह अज्ञात स्थान पर चली गई हैं। कुछ दिन बाद फिर वापस आएंगी।
वहीं, 16 जनवरी की शाम हर्षा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की थी। इस दौरान वह शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप पर जमकर हमलावर हुईं। उन्होंने कहा- संतों ने महिला होने के बावजूद मेरा अपमान किया। आनंद स्वरूप को पाप लगेगा। मेरे ऊपर लग रहे आरोपों से परेशान हूं। मुझे डर लग रहा है। अब मैं महाकुंभ मेला छोड़कर चली जाऊंगी। यह कहते हुए फूट-फूटकर रोने लगीं।
इस खबर के पब्लिश होने के बाद स्वामी आनंद स्वरूप सामने आ गए थे। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा – महाकुंभ में हर्षा जैसी कई लाखों लड़कियां आई हुई हैं। तुम्हारी असलियत सबके सामने आ गई है। अगर ये सब करोगी तो मैं फिर से रोकूंगा। मेरी बात का अगर बुरा लगा तो लग जाए।

तस्वीर निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के समय की है। हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर सवार हैं।
अब पढ़िए बाबा आनंद स्वरूप ने क्या कहा.. महाकुंभ सनातन धर्मियों का सबसे बड़ा समागम है। यहां धर्म और अध्यात्म पर चर्चा होनी चाहिए। महिला मॉडल और बीफ खाने वाली विदेशी महिला लॉरेन पॉवेल का शुद्धिकरण कराए बिना उसे दीक्षा देना और सनातनी नाम दे देना, यह सिर्फ मजाक और प्रचार है।
मेरा उद्देश्य सिर्फ धर्म की रक्षा है। तुमसे मेरा कोई व्यक्तिगत मतभेद नहीं है। जैसा लगाव मेरी अन्य बहनों से है, वैसा ही तुमसे भी है। मैंने तुम्हें सही रास्ता दिखाने की कोशिश की। इसमें बुरा मानने की कोई बात नहीं है। फिर भी तुमको बुरा लगा तो लगने दो।

शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप ने कहा- सनातन का मजाक उड़ाना गलत है।
बाबा आनंद स्वरूप ने कहा- अगर इस प्रकार का काम कोई दूसरा भी करेगा, तो मैं वही कदम उठाऊंगा। यही मेरा कर्तव्य है। मैंने काली सेना इसी उद्देश्य से बनाई है कि जो लोग धर्म के खिलाफ जाएं, उन्हें रोका जा सके।
तुम गलत रास्ते पर जा रही थी, इसलिए मैंने तुम्हें रोका। तुम्हारी असलियत सबके सामने आ गई। तुम्हारी मां कह रही है कि तुम्हारी अगले महीने शादी है। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। भगवा वस्त्र पहनकर कोई सनातन धर्म का मजाक बनाए। ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं।
तुम अगर एक सामान्य लड़की की तरह कुंभ में रहोगी, तो मुझे कोई समस्या नहीं है। ये सब करोगी तो मैं फिर से टोकूंगा, फिर रोकूंगा। इस तरह संन्यास ग्रहण किए बिना किसी की शिष्या बताना गलत है।
अब पढ़िए हर्षा ने दैनिक भास्कर ने बातचीत में क्या कहा…

दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान हर्षा रिछारिया फूट-फूटकर रोने लगीं और शॉल से अपने आंसू पोछे।
सवाल: आप मॉडल, संत या सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर…क्या हैं?
जवाब: मैं संत नहीं हूं। संत अपने आप में बहुत बड़ी पदवी होती है, इसका टैग मुझे नहीं दिया जाए। मैं कभी भी मॉडल नहीं रही हूं। इसलिए मैं यह टैग भी एक्सेप्ट नहीं कर सकती। मैं सिर्फ एक साधारण सी शिष्या हूं, जो अपने गुरुदेव के सानिध्य में महाकुंभ को जानने, महसूस करने और समझने के लिए तीर्थराज प्रयागराज में आई है।
सवाल: आप महामंडलेश्वर के रथ में सवार हुईं, संतों ने इसका विरोध किया, क्या कहेंगी
जवाब: मुझे जो पर्सनली फील होता है, वो यह है कि अगर कोई भी इंसान वेस्टर्न कल्चर को छोड़कर, सनातन धर्म की संस्कृति से जुड़ना चाहता है, समझना चाहता है, उसमें समाना चाहता है, उसमें रम जाना चाहता है।
तो मुझे लगता है कि हिंदू होने के नाते, सनातनी होने के नाते हमें खुशी से उसे परिवार में, धर्म में शामिल करना चाहिए, न कि उसका विरोध करना चाहिए। उसे बच्चे की तरह ट्रीट करना चाहिए। उसका विरोध करना बहुत गलत बात है।

मीडिया ने मुझे टारगेट किया
शाही सवारी में उस वक्त मेरे अलावा बहुत से गृहस्थ लोग भी बैठे हुए थे। जिनका अपना परिवार है, बच्चे हैं, मां-बाप हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मीडिया ने मुझे टारगेट किया हुआ था। सिर्फ हमारे निरंजनी अखाड़े में गृहस्थ लोग नहीं थे। अलग-अलग अखाड़ों की शाही सवारी में गृहस्थ लोग बैठे थे।
ये कोई विवाद का मुद्दा नहीं था। अगर किसी बच्चे से गलती होती है, तो उसे समझाना चाहिए। लेकिन उसे विवादों में घेरना, नाम खराब करना गलत है। उसे पहले साध्वी का टाइटल देना, फिर मॉडल का टाइटल दे देना। यह बहुत गलत बात है।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं हर्षा रिछारिया।
पूरे युवाओं से धर्म को जानने का मौका छीना गया
हर्षा ने कहा- मैं यहां युवाओं को प्रेरित करने आई थी। धर्म और संस्कृति से जोड़ने के लिए आई थी, लेकिन यहां कुछ लोगों ने मुझसे ही यह मौका छीन लिया। इन्होंने मुझसे नहीं, पूरे युवाओं से यह मौका छीना है। इनका मानना है कि जो वेस्टर्न कल्चर में था, तो उसे कोई हक नहीं कि वह अपने धर्म और संस्कृति को जाने।
भगवान भी यह अधिकार नहीं छीन सकते
हर्षा ने रोते हुए कहा- भगवान ने भी हमसे कभी पूजा करने का हक नहीं छीना। भगवान के पास भी यह अधिकार नहीं कि वह हमसे धर्म और संस्कृति को जानने का हक छीन लें। लेकिन इन लोगों ने मुझे मॉडल और नाचने-गाने वाला करार दिया। मैं अपनी मर्यादा में थी। मैंने महाकुंभ में आकर क्या अभद्र और क्या गलत कर दिया? इन लोगों ने मुझे परेशान कर दिया, त्रस्त कर दिया है।

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